284वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 30 अगस्त, 2025
एक शे'र अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित #डिजिटल_वीडियो_गोष्ठी का 284वाँ तरही मुशायरा कार्यक्रम।
आज का मुशायरा इन दो मिसरों पर आधारित था:
567वाँ मिसरा: ‘यूँ ही उसको भी ज़रा हाथ लगा देना था’
~ शाहिद कबीर
568वाँ मिसरा: ‘होंट की लालियों ने मार दिया’
~ अब्दुल हमीद अदम
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जायज़ा लीजिए अलग अलग ज़ावियों से इन मिसरों पर लगाई हुई गिरह का;
567 वें मिसरे:
‘यूँ ही उसको भी ज़रा हाथ लगा देना था’
पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:
बोझ गठरी का जो बूढ़े के था सर पे भारी
‘यूं ही उसको भी ज़रा हाथ लगा देना था’|
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत
जैसे चलते हुए छूती है पवन पेड़ों को
‘यूं ही उसको भी ज़रा हाथ लगा देना था’।
~ ममता किरण, भारत
फूल को चूम के तितली अभी निकली जैसे
‘यूँ ही उसको भी ज़रा हाथ लगा देना था’ |
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया
जैसे बारिश में कोई बूंद ठहर जाती है
‘यूँ ही उसको भी ज़रा हाथ लगा देना था’ |1|
~ अकबर शाद 'उदयपुरी', भारत
जैसे छू लेता है ख़ुशबू को गुजरते हुए वो
‘यूँ ही उसको भी ज़रा हाथ लगा देना था ‘|2|
~ अकबर शाद 'उदयपुरी', भारत
छूने भर से जो पिघल जाता कोई पत्थर दिल
‘यूँ ही उसको भी ज़रा हाथ लगा देना था’|
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत
छू के गुज़री है तुझे रिमझिमी जो बूंद अभी
‘यूँ ही उसको भी ज़रा हाथ लगा देना था’|1|
~ रेणु हुसैन, भारत
जैसे छू कर के निकल जाए शुआ पत्तों को
‘यूँ ही उसको भी ज़रा हाथ लगा देना था’|2|
~ रेणु हुसैन, भारत
छ नहीं और तो बेबस की दुआ ही मिलती,
‘यूँ ही उसको भी ज़रा हाथ लगा देना था’ |
~ के पी सक्सेना, भारत
रूह को उसकी भी आ जाता ज़रा सा आराम
‘यूँ ही उसको भी ज़रा हाथ लगा देना था’ |
~रमणी थापर, कैलिफ़ोर्निया
दिल तुम्हें देख के बेहाल हुआ जाता है
‘यूं ही उसको भी ज़रा हाथ लगा देना था’ |
~ सज्जाद अख्तर ,भारत
सुर्ख़ रुखसार को छूता है दुपट्टा जैसे
‘यूँ ही उसको भी ज़रा हाथ लगा देना था’ |1|
~ मनोज अबोध, भारत
गन्दुमीं गाल को छू जाय हवा हौले से
‘यूँ ही उसको भी ज़रा हाथ लगा देना था’ |2|
~ मनोज अबोध, भारत
जैसे महफ़िल में गले मिलता था सबसे हँसकर,
‘यूँ ही उसको भी जरा हाथ लगा देना था’ |
~ अनमोल प्रकाश शुक्ला
बोझ सर उसको ही ढोना था मगर कहने को,
‘यूँ ही उसको भी ज़रा हाथ लगा देना था’|1|
~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क
मन की तस्दीक़ भी हो जाती अगर है वो वहम,
‘यूँ ही उसको भी ज़रा हाथ लगा देना था’|2|
~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क
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568 वें मिसरे: ‘होंट की लालियों ने मार दिया’
पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:
मुस्कुराहट ने उसकी जाँ ले ली,
‘होंट की लालियों ने मार दिया’ |
~ अकबर शाद 'उदयपुरी', भारत
सर से पा तक वो स्याह थी लेकिन
‘होंट की लालियों ने मार दिया’ |
~ सज्जाद अख्तर ,भारत
लाख चाहा कि होश में रह लूँ,
‘होंट की लालियों ने मार दिया’।
~ के पी सक्सेना, भारत
लिपस्टिक खा गयी पगार आधी
‘होंट की लालियों ने मार दिया’ |
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत
हम तो यूं भी थे उसके दीवाने
‘होंट की लालियों ने मार दिया’।
~ ममता किरण, भारत
ज़ब्त रक्खा हरेक शय में पर
‘होंट की लालियों ने मार दिया’ |
~ प्रज्ञा त्रिवेदी, भारत
गाल की लालियों से ठीक हुए
‘होंट की लालियों ने मार दिया’ |
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया
ख़ून तो पी रहे थे पहले भी
‘होंट की लालियों ने मार दिया’ |
~ सज्जाद अख्तर ,भारत
आदमी ठीक- ठाक थे हम भी
‘होंट की लालियों ने मार दिया’ |
~ मनोज अबोध, भारत
मैच करता है शेड क्या मुझ पर
‘होंट की लालियों ने मार दिया’ |
~रूबी मोहंती, भारत
आँख की मय ने कर दिया बेसुध
‘होंट की लालियों ने मार दिया’ |
~ अनमोल प्रकाश शुक्ला
इक तो रुखसार पर हया,उसपर
‘होंट की लालियों ने मार दिया’ |
~ रेणु हुसैन, भारत
ज़ुल्फ़ों की ख़म ने जान ली आधी,
‘होंट की लालियों ने मार दिया’ |
~ अशोक सिंह , न्यूयॉर्क
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इस कार्यक्रम का यू-ट्यूब वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करिये:
https://youtu.be/ocK6jZRzdKw
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संपादक
~ कौसर भुट्टो, दुबई