रविवार, 22 फ़रवरी 2026

309 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 21 फरवरी, 2026

309 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 21 फरवरी, 2026

एक‌ शे'र‌ अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित #डिजिटल_वीडियो_गोष्ठी का 309 वाँ तरही मुशायरा कार्यक्रम।

 आज का मुशायरा इन दो मिसरों पर आधारित था:

617 वाँ मिसरा: ''ख़ुदा का नाम लेते मर गया है'। 

~ अंजुम लुधियानवी


618 वाँ मिसरा:  'तेरी दौलत ने तेरे ऐब छुपा रक्खे हैं'।

~ सागर सिद्दीकी

                                 *****^*****

 जायज़ा लीजिए अलग अलग ज़ावियों से इन मिसरों पर लगाई हुई गिरह का;

617 वें मिसरे:  'ख़ुदा का नाम लेते मर गया है'

पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:


ख़ुदा आया न उसके पास आख़िर 
‘ख़ुदा का नाम लेते मर गया है’।
~ममता 'किरण' भारत


कहाँ है फ़िक्र उसे अपने बशर की 
‘ख़ुदा का नाम लेते मर गया है’।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया



सवालों में है ख़ुद कुदरत की सत्ता 
‘ख़ुदा का नाम लेते मर गया है’।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया


रहा महरूम सिजदे में भी रह कर 
'ख़ुदा का नाम लेते मर गया है'l
~डा आदेश त्यागी, भारत


ख़ुदा से बेख़बर ताउम्र था जो 
‘ख़ुदा का नाम लेते मर गया है’।
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


है भीतर जानता था ख़ुद के फिर भी
‘ख़ुदा का नाम लेते मर गया है’।
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत


मेरे अन्दर छुपा शैतान था जो
‘ख़ुदा का नाम लेते मर गया है’।
~मधु शर्मा, न्यू यॉर्क


निगाहें उसकी तो दर पर लगीं थीं 
‘ख़ुदा का नाम लेते मर गया है’।
~रेनू हुसैन, भारत


नसीबों से हुआ ये फ़ख़्र हासिल 
‘ख़ुदा का नाम लेते मर गया है’।
~मनोज 'अबोध', भारत


किसी की आख़िरी आवाज़ थी बस,
‘ख़ुदा का नाम लेते मर गया है’। 1 l
~अकबर 'शाद' उदयपुरी, भारत


महल में जश्न चलता रह गया था,
‘ख़ुदा का नाम लेते मर गया है’। 2 l
~अकबर 'शाद' उदयपुरी, भारत


उसे कब था यकीं सुन लेगा सचमुच
‘ख़ुदा का नाम लेते मर गया है’।
के पी सक्सेना, भारत


न थी मंज़ूर रुसवाई किसी की
‘ख़ुदा का नाम लेते मर गया है’।
सज्जाद अख्तर भारत


दमकते शहर की ज़ीनत वही था,
‘ख़ुदा का नाम लेते मर गया है’। 1 l
संजीव दुआ भारत


सिसकती ज़िन्दगी की राह में वो
‘ख़ुदा का नाम लेते मर गया है’। 2 l
संजीव दुआ भारत


दबाए आरज़ू सीने में अपने
‘ख़ुदा का नाम लेते मर गया है’। 3 l
संजीव दुआ भारत


इबादत की नहीं डाली थी आदत,
‘ख़ुदा का नाम लेते मर गया है’।
सुषमा मल्होत्रा न्यू जर्सी


मुबारक होगी जन्नत ही उसे जो,
‘ख़ुदा का नाम लेते मर गया है’।
~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क 


*✨*☀️**✨**


 618 वें मिसरे:  'तेरी दौलत ने तेरे ऐब छुपा रक्खे हैं'

 पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:


जानती है ये पुलिस भी कि नराधम है तू
‘तेरी दौलत ने तेरे ऐब छुपा रक्खे हैं’। 1 l
~प्रज्ञा त्रिवेदी ,भारत


बाँध दी जाएगी मासूम कली इक तुझसे
‘तेरी दौलत ने तेरे ऐब छुपा रक्खे हैं’। 2 l
~प्रज्ञा त्रिवेदी ,भारत


मेरे हालात ने हर ख़्वाब कुचल डाला है,
'तेरी दौलत ने तेरे ऐब छुपा रक्खे हैं'।
~अकबर 'शाद' उदयपुरी, भारत


एक परदा है ,मना शुक्र,तेरे दागों पर,
‘तेरी दौलत ने तेरे ऐब छुपा रक्खे हैं’।
~अनमोल प्रकाश शुक्ला, भारत 


ये मना शुक्र कि तू जेल से बाहर घूमे 
‘तेरी दौलत ने तेरे ऐब छुपा रक्खे हैं’। 1 l
~लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


इक हॅंसी देर से आने का मिटा दे गुस्सा 
‘तेरी दौलत ने तेरे ऐब छुपा रक्खे हैं’। 2 l
~लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


जानते सब हैं मगर कौन लगे मुंह तेरे
‘तेरी दौलत ने तेरे ऐब छुपा रक्खे हैं’।
~के पी सक्सेना, भारत 


हमको मालूम है ऐ दोस्त हक़ीक़त सारी 
‘तेरी दौलत ने तेरे ऐब छुपा रक्खे हैं’।
~मनोज 'अबोध', भारत


तू है अपराधी मगर तुझको मिली है कुर्सी 
‘तेरी दौलत ने तेरे ऐब छुपा रक्खे हैं’।
~ममता किरण, भारत


उँगलियाँ उठती रहीं मेरी शराफ़त पर ही,
‘तेरी दौलत ने तेरे ऐब छुपा रक्खे हैं’।
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत


शुक्र कर रब का मेहरबान रहे बस तुझ पर 
‘तेरी दौलत ने तेरे ऐब छुपा रक्खे हैं’। 1 l
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया


शुक्र कर मुफ्त में भर भर के मिली है तुझ को 
‘तेरी दौलत ने तेरे ऐब छुपा रक्खे हैं’। 2 l
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया


ख़ूब मालूम है सबको तेरा असली चेहरा
 ‘तेरी दौलत ने तेरे ऐब छुपा रक्खे हैं’।
~रेनू हुसैन, भारत 


मेरी हर बात में सौ नुस्ख निकाले तूने
‘तेरी दौलत ने तेरे ऐब छुपा रक्खे हैं’। 1 l
~मधु शर्मा, न्यू यॉर्क


मेरे हर दोष से वाक़िफ़ है ज़माना सारा 
‘तेरी दौलत ने तेरे ऐब छुपा रक्खे हैं’। 2 l
~मधु शर्मा, न्यू यॉर्क


कोई मतलब ही नहीं अब है ऐब-जूई का,
‘तेरी दौलत ने तेरे ऐब छुपा रक्खे हैं’। 1 l
*ऐब-जूई=दोष ढूँढना
~ अशोक सिंह , न्यू यॉर्क 


हुस्न ने जैसे छुपा रक्खे बला के तेवर,
‘तेरी दौलत ने तेरे ऐब छुपा रक्खे हैं’। 2 l
~ अशोक सिंह , न्यू यॉर्क 


****^*****


इस कार्यक्रम का यू-ट्यूब वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करिये:


©️सर्वाधिकार सुरक्षित। इस पोस्ट में साझा किए गए सभी गिरह के शे'र 'एक शे'र अर्ज़ किया है' पटल पर शामिल शायरों के हैं। इनमें से कोई भी शे'र शायर की लिखित पूर्व सहमति के बग़ैर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।

संपादक

~ कौसर भुट्टो, दुबई


 


मंगलवार, 17 फ़रवरी 2026

308 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 14 फरवरी, 2026

308 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 14 फरवरी, 2026

एक‌ शे'र‌ अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित #डिजिटल_वीडियो_गोष्ठी का 307 वाँ तरही मुशायरा कार्यक्रम।

 आज का मुशायरा इन दो मिसरों पर आधारित था:

615 वाँ मिसरा: 'झूठी खुशियों से सच्चा ग़म अच्छा लगता है'।

~ वाली आसी


616 वाँ मिसरा: ' 'मिरी अना भी कहाँ सर झुकाने वाली है'।

 ~ वाली आसी

                                 *****^*****

 जायज़ा लीजिए अलग अलग ज़ावियों से इन मिसरों पर लगाई हुई गिरह का;

615 वें मिसरे: 'झूठी खुशियों से सच्चा ग़म अच्छा लगता है'

पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:


जो सच था वही दिल ने अपनाना सीखा,
‘झूठी ख़ुशियों से सच्चा ग़म अच्छा लगता है’।
~अकबर 'शाद' उदयपुरी, भारत


कब तक यूँ ही सबके आगे हँसना है हमको,
‘झूठी ख़ुशियों से सच्चा ग़म अच्छा लगता है’। 1 ।
~मनोज अबोध भारत


कब तक सारे शे’रों पर ही ‘वा-वा’ करनी है ,
‘झूठी ख़ुशियों से सच्चा ग़म अच्छा लगता है’। 2 ।
~मनोज अबोध भारत


काश कोई लफ़्फ़ाज़ रहनुमा को ये समझा दे,
‘झूठी ख़ुशियों से सच्चा ग़म अच्छा लगता है’। 1 ।
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


अच्छा है जो तेरा असली चेहरा देख लिया ,
‘झूठी ख़ुशियों से सच्चा ग़म अच्छा लगता है’। 2 ।
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


दर्पण जब-जब कह देता है अभिनय ठीक नहीं ,
‘झूठी ख़ुशियों से सच्चा ग़म अच्छा लगता है’।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया


मरहम का अहसान कभी मंज़ूर नहीं हमको ,
‘झूठी ख़ुशियों से सच्चा ग़म अच्छा लगता है’।
~सज्जाद अख्तर भारत


हो न सकेगा पीतल सोना चाहे जो कर लो ,
‘झूठी ख़ुशियों से सच्चा ग़म अच्छा लगता है’।
~रेनू हुसैन भारत


उनकी लल्लो-चप्पो हमको नेक नही भायी,
‘झूठी ख़ुशियों से सच्चा ग़म अच्छा लगता है’।
~केपी सक्सेना भारत


सबका मन रखने को चाहे हंस लूं मैं लेकिन ,
‘झूठी ख़ुशियों से सच्चा ग़म अच्छा लगता है’।
~ममता 'किरण' भारत


जीवन जीने की है इक ईमानदार कोशिश 
*झूठी खुशियों से सच्चा ग़म अच्छा लगता है।*
~अनमोल प्रकाश शुक्ला, भारत 


इतने झटके इस जीवन में खाए हैं कि अब
‘झूठी ख़ुशियों से सच्चा ग़म अच्छा लगता है’।
~आलोक 'अविरल', भारत


ग़म तो ग़म है, अच्छा लगना मुश्किल है, फिर भी,
‘झूठी ख़ुशियों से सच्चा ग़म अच्छा लगता है’।
~खुर्रम 'नूर', भारत


कितनी देर भला चकमक की चिंगारी रुकती,
‘झूठी ख़ुशियों से सच्चा ग़म अच्छा लगता है’।
~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क 


*✨*☀️**✨**


 616 वें मिसरे: 'मिरी अना भी कहाँ सर झुकाने वाली है'

 पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:

ख़ुदा ने भेजा है शायर बना के धरती पर 
‘मिरी अना भी कहाँ सर झुकाने वाली है’। 1 ।
~लक्ष्मी शंकर वाजपेई भारत


गुरूर है तो रहे उसको अपनी दौलत पर
‘मिरी अना भी कहाँ सर झुकाने वाली है’। 2 ।
~लक्ष्मी शंकर वाजपेई भारत


बड़ा ही नाज है अपनी उन्हें वसीयत पर
‘मिरी अना भी कहाँ सर झुकाने वाली है’।
~के पी सक्सेना , भारत 


मेरी उपज है तो इतना तो मैं समझता हूँ 
‘मिरी अना भी कहाँ सर झुकाने वाली है’।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया


मैं डरने वाली नहीं हूं रसूख़ से उनके 
‘मिरी अना भी कहाँ सर झुकाने वाली है’।
~ममता किरण भारत


वो मुझको देख के मसरूफ़ हो गया कस्दन,
‘मिरी अना भी कहाँ सर झुकाने वाली है’।
~अनमोल प्रकाश शुक्ला, भारत 


वो जितना तोड़ लें मुझको नहीं मैं टूटूंगीं,
‘मिरी अना भी कहाँ सर झुकाने वाली है’।
~रेनू हुसैन, भारत 


तुझे जमाना लगेगा मुझे मनाने में,
'मिरी अना भी कहाँ सर झुकाने वाली है'। 
~सुषमा मल्होत्रा, न्यू जर्सी


मुझे पता है तेरे जौर-ओ-ज़ुल्म की शिद्दत,
'मेरी अना भी कहाँ सर झुकाने वाली है' ।
~डॉ. आदेश त्यागी, भारत


तेरे गुरूर की हद टूटती नहीं जब तक,
मेरी अना भी कहाँ सर झुकाने वाली है।
~मंजुल मंज़र लखनवी


बढ़ेगा हाथ जो उनका न दोस्ती के लिए,
‘मिरी अना भी कहाँ सर झुकाने वाली है’।
~ अशोक सिंह , न्यू यॉर्क 


****^*****


इस कार्यक्रम का यू-ट्यूब वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करिये:


©️सर्वाधिकार सुरक्षित। इस पोस्ट में साझा किए गए सभी गिरह के शे'र 'एक शे'र अर्ज़ किया है' पटल पर शामिल शायरों के हैं। इनमें से कोई भी शे'र शायर की लिखित पूर्व सहमति के बग़ैर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।

संपादक

~ कौसर भुट्टो, दुबई


 


सोमवार, 9 फ़रवरी 2026

307 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 7 फरवरी, 2026

307 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 7 फरवरी, 2026

एक‌ शे'र‌ अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित #डिजिटल_वीडियो_गोष्ठी का 307 वाँ तरही मुशायरा कार्यक्रम।

 आज का मुशायरा इन दो मिसरों पर आधारित था:

613 वाँ मिसरा:  'अब क्या बताएँ कैसे हमारी नहीं बनी' । 

~ बिलकीस ज़फ़ीरुल हसन


614 वाँ मिसरा: 'हमने देखा है बेवफ़ा हो के'।

~ आस मोहम्मद तुराज़


                                 *****^*****

 जायज़ा लीजिए अलग अलग ज़ावियों से इन मिसरों पर लगाई हुई गिरह का;

613 वें मिसरे:  'अब क्या बताएँ कैसे हमारी नहीं बनी' 

पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:

हमने तो ज़िंदगी से निभाई तमाम उम्र
'अब क्या बताएं कैसे हमारी नहीं बनी' । 1 l
~सज्जाद अख्तर भारत


सबकी गिरह तो बन गईं मिसरे पे चार पांच
'अब क्या बताएं कैसे हमारी नहीं बनी' l 2 l
~सज्जाद 'अख्तर', भारत


सच्चाई ढूँढते रहे हम उम्र भर 'दुआ'
'अब क्या बताएँ कैसे हमारी नहीं बनी' l
~संजीव दुआ, भारत


सबकी ही बन गई है यहाँ क़िस्मतें मगर
'अब क्या बताएँ कैसे हमारी नहीं बनी' l
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत


समझौते दोनों नहीं किए थे तमाम पर,
'अब क्या बताएँ कैसे हमारी नहीं बनी' l
~के पी सक्सेना, भारत


हमने तो साथ चलने की,कीं ख़ूब कोशिशें 
'अब क्या बताएँ कैसे हमारी नहीं बनी' l
~ममता 'किरण', भारत


हम भी जनाब आपकी कश्ती में थे मगर 
'अब क्या बताएँ कैसे हमारी नहीं बनी' l 1 l
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया


हाँ फ़ैंसला तो ठोक बजा कर ही था किया 
'अब क्या बताएँ कैसे हमारी नहीं बनी' l 2 l
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया


क़द शक्ल नौकरी तो सभी थे पसंद के, 
'अब क्या बताएँ कैसे हमारी नहीं बनी' l
~सुषमा मल्होत्रा, न्यू जर्सी


हमसे छुड़ा के ले गयी दौलत की उसको भूख
'अब क्या बताएँ कैसे हमारी नहीं बनी' l 1 l
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


मुजरिम ही जैसे सारे सियासत में थे भरे
'अब क्या बताएँ कैसे हमारी नहीं बनी' l 2 l
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


कोशिश तो हर मक़ाम रही दोनों ओर से 
'अब क्या बताएँ कैसे हमारी नहीं बनी' l
~मनोज 'अबोध' भारत


वादा तो उम्रभर के लिए था निभाव का 
'अब क्या बताएँ कैसे हमारी नहीं बनी' l
~रूबी मोहंती, भारत


गिन गिन के गुण मिलान सभी हमने थे किए,
‘अब क्या बताएँ कैसे हमारी नहीं बनी’।
~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क 


*✨*☀️**✨**


 614 वें मिसरे: 'हमने देखा है बेवफ़ा हो के'

 पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:


बा वफ़ा लोग कैसे होते है: 
'हमने देखा है बेवफा हो के' ।
~ महबूब सोनालिया, भारत 


अब वो पहले सी गुफ़्तगू न रही
'हमने देखा है बेवफा हो के' । 1 ।
~संजीव दुआ,  भारत


आँख में शर्म भर के है आई
'हमने देखा है बेवफा हो के' । 2 ।
~संजीव दुआ, भारत


कितना मुश्किल है बेवफ़ा होना
'हमने देखा है बेवफा हो के' ।
~सज्जाद 'अख्तर' , भारत


चैन आता नहीं है ख़ुद को भी 
'हमने देखा है बेवफा हो के' ।
~अकबर 'शाद' उदयपुरी, भारत


दर्द रह रह के दिल में उठता है,
'हमने देखा है बेवफा हो के' ।
~अनमोल प्रकाश शुक्ला, भारत 


ज़ख़्म यादों के रिसते रहते हैं 
'हमने देखा है बेवफा हो के' । 1 ।
~लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत 


वो भी औरों के हो लिए फट से 
'हमने देखा है बेवफा हो के' । 2 ।
~लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत 


आइना भी हमें डराता है,
‘हमने देखा है बेवफ़ा हो के’।
~मधु शर्मा, न्यूयॉर्क


फ़र्क़ उनको नहीं पड़ा कुछ भी,
'हमने देखा है बेवफा हो के' ।
~मनोज 'अबोध', भारत


फ़र्क़ पड़ता नहीं उसे अब भी,
'हमने देखा है बेवफा हो के' ।
~रेनू हुसैन, भारत 


संगदिल वो, बदल नहीं पाया,
'हमने देखा है बेवफा हो के' ।
~रेनू हुसैन, भारत 


होना उतना भी है नहीं मुश्किल,
'हमने देखा है बेवफा हो के' ।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया


आदमी फिर कहीं का भी न रहे 
‘हमने देखा है बेवफ़ा हो के’।
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत


नींद भी रूठ जाए फिर अपनी,
‘हमने देखा है बेवफ़ा हो के’।
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत


दिल ज़िगर चाक करना पड़ता है,
‘हमने देखा है बेवफ़ा हो के’।
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत


माफ़ ख़ुद को ही करना होता कठिन,
‘हमने देखा है बेवफ़ा हो के’।
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत


ज़िन्दगी भार लगने लगती है,
‘हमने देखा है बेवफ़ा हो के’।
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत


ख़ाक ख़ुद को ही कर लिया हमने,
‘हमने देखा है बेवफ़ा हो के’।
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत


यूँ ही बेकार कर लिया ख़ुद को,
‘हमने देखा है बेवफ़ा हो के’।
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत


कुछ नहीं फिर हमें हुआ हासिल,
'हमने देखा है बेवफा हो के' ।
~ममता किरण भारत


ख़ूब मंहगा पड़ा है वो नाटक,
'हमने देखा है बेवफा हो के' ।
~ममता किरण भारत


ज़िंदगी भर कचोटता है दिल, 
'हमने देखा है बेवफा हो के' ।
~खुर्रम नूर भारत

कुछ दिनों तक तो मौज रहती है,
'हमने देखा है बेवफा हो के' ।
~ अशोक सिंह , न्यू यॉर्क 


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©️सर्वाधिकार सुरक्षित। इस पोस्ट में साझा किए गए सभी गिरह के शे'र 'एक शे'र अर्ज़ किया है' पटल पर शामिल शायरों के हैं। इनमें से कोई भी शे'र शायर की लिखित पूर्व सहमति के बग़ैर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।

संपादक

~ कौसर भुट्टो, दुबई


 


बुधवार, 4 फ़रवरी 2026

306 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 31 जनवरी, 2026

306 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 31 जनवरी, 2026

एक‌ शे'र‌ अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित #डिजिटल_वीडियो_गोष्ठी का 306 वाँ तरही मुशायरा कार्यक्रम।

 आज का मुशायरा इन दो मिसरों पर आधारित था:

611 वाँ मिसरा: 'ये जुर्म है तो फिर इस जुर्म की सज़ा रखना'।

~ ज़फ़र इक़बाल


612 वाँ मिसरा: 'चारा-साज़ी एक तरफ़ है उस का छूना एक तरफ़' ।

~ वरुण आनंद

                                 *****^*****

 जायज़ा लीजिए अलग अलग ज़ावियों से इन मिसरों पर लगाई हुई गिरह का;

611 वें मिसरे: 'ये जुर्म है तो फिर इस जुर्म की सज़ा रखना'

पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:


तुम्हीं से प्यार किया जब भी कुछ किया हमने
'ये जुर्म है तो फिर इस जुर्म की सज़ा रखना' l
~अकबर 'शाद' उदयपुरी, भारत


मैं मुफलिसी में भी जीने का शौक रखता हूं 
'ये जुर्म है तो फिर इस जुर्म की सज़ा रखना' ।
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


कभी न झूठ को सच कह सकूंगा कुछ कर लो
'ये जुर्म है तो फिर इस जुर्म की सज़ा रखना' ।
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


भुला न पाया तुम्हें कर के तुम से वादा भी 
'ये जुर्म है तो फिर इस जुर्म की सज़ा रखना' ।
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


सिवा तेरे कोई साथी कभी जँचा ही नहीं
'ये जुर्म है तो फिर इस जुर्म की सज़ा रखना'।
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत


चले जो आए हो बे-पर्दा लोग देखेंगे 
'ये जुर्म है तो फिर इस जुर्म की सज़ा रखना' ।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया


मैं तोड़ बेड़ियां निकली हूं आसमॉं छूने,
'ये जुर्म है तो फिर इस जुर्म की सज़ा रखना'।
~ममता 'किरण' भारत


ख़ता यही है कि उससे नज़र मिलाई है ,
'ये जुर्म है तो फिर इस जुर्म की सज़ा रखना' ।
~रेनू हुसैन भारत


सनम को चाहना बढ़ कर ख़ुदा की क़ुदरत से, 
‘ये जुर्म है तो फिर इस जुर्म की सज़ा रखना’।
~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क 


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 612 वें मिसरे: 'चारा-साज़ी एक तरफ़ है उस का छूना एक तरफ़' ।

 पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:


मुद्दत से बीमार पड़ा हूँ कोई उसको बुलवाए 
'चारा-साज़ी एक तरफ़ है उस का छूना एक तरफ़’।
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत


मुस्काकर उसका मेरे होठों पर उँगली रख देना,
'चारा साज़ी एक तरफ है उसका छूना एक तरफ' ।
~अनमोल प्रकाश शुक्ला, भारत 


उसको छू कर मुझे छुआ झोंके ने मुझको फ़र्क़ लगा 
'चारा-साज़ी एक तरफ़ है उस का छूना एक तरफ़' ।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया


हट जाओ सब चारागर अब उनकी आमद होनी है
'चारा-साज़ी एक तरफ़ है उस का छूना एक तरफ़' ।
~प्रज्ञा त्रिवेदी ,भारत


हार गए सब वैद-नजूमी, एक उसी से आशा है 
'चारा-साज़ी एक तरफ़ है उस का छूना एक तरफ़' ।
~मनोज 'अबोध', भारत


जाने कैसा रोग लगा है जब से देखा है उसको!
'चारा-साज़ी एक तरफ़ है उस का छूना एक तरफ़' ।
~के पी सक्सेना , भारत 


उसकी सेवा करते रहना मुझको अच्छा लगता है
'चारा-साज़ी एक तरफ़ है उस का छूना एक तरफ़' ।
~रेनू हुसैन, भारत 


वो आ जाये तो पक्का मैं, मरते-मरते जी जाऊँ,
'चारा-साज़ी एक तरफ़ है उस का छूना एक तरफ़' ।
~रूबी मोहंती, भारत


जादू है उसके हाथों में, मॉं को बुलवा दे कोई 
'चारा-साज़ी एक तरफ़ है उस का छूना एक तरफ़' ।
~ममता किरण भारत


ज़ख़्म-ए-ला-दवा मिले जहॉं से शिफ़ा उन्हीं हाथों में है,
'चारा-साज़ी एक तरफ़ है उस का छूना एक तरफ़’।
~ अशोक सिंह , न्यू यॉर्क 


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इस कार्यक्रम का यू-ट्यूब वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करिये:


©️सर्वाधिकार सुरक्षित। इस पोस्ट में साझा किए गए सभी गिरह के शे'र 'एक शे'र अर्ज़ किया है' पटल पर शामिल शायरों के हैं। इनमें से कोई भी शे'र शायर की लिखित पूर्व सहमति के बग़ैर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।

संपादक

~ कौसर भुट्टो, दुबई


 


319 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 2 मई , 2026

319 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 2 मई , 2026 एक‌ शे'र‌ अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित #डिजिटल_वीडियो_गोष्ठी का  319 वा...