सोमवार, 9 फ़रवरी 2026

307 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 7 फरवरी, 2026

307 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 7 फरवरी, 2026

एक‌ शे'र‌ अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित #डिजिटल_वीडियो_गोष्ठी का 307 वाँ तरही मुशायरा कार्यक्रम।

 आज का मुशायरा इन दो मिसरों पर आधारित था:

613 वाँ मिसरा:  'अब क्या बताएँ कैसे हमारी नहीं बनी' । 

~ बिलकीस ज़फ़ीरुल हसन


614 वाँ मिसरा: 'हमने देखा है बेवफ़ा हो के'।

~ आस मोहम्मद तुराज़


                                 *****^*****

 जायज़ा लीजिए अलग अलग ज़ावियों से इन मिसरों पर लगाई हुई गिरह का;

613 वें मिसरे:  'अब क्या बताएँ कैसे हमारी नहीं बनी' 

पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:

हमने तो ज़िंदगी से निभाई तमाम उम्र
'अब क्या बताएं कैसे हमारी नहीं बनी' । 1 l
~सज्जाद अख्तर भारत


सबकी गिरह तो बन गईं मिसरे पे चार पांच
'अब क्या बताएं कैसे हमारी नहीं बनी' l 2 l
~सज्जाद 'अख्तर', भारत


सच्चाई ढूँढते रहे हम उम्र भर 'दुआ'
'अब क्या बताएँ कैसे हमारी नहीं बनी' l
~संजीव दुआ, भारत


सबकी ही बन गई है यहाँ क़िस्मतें मगर
'अब क्या बताएँ कैसे हमारी नहीं बनी' l
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत


समझौते दोनों नहीं किए थे तमाम पर,
'अब क्या बताएँ कैसे हमारी नहीं बनी' l
~के पी सक्सेना, भारत


हमने तो साथ चलने की,कीं ख़ूब कोशिशें 
'अब क्या बताएँ कैसे हमारी नहीं बनी' l
~ममता 'किरण', भारत


हम भी जनाब आपकी कश्ती में थे मगर 
'अब क्या बताएँ कैसे हमारी नहीं बनी' l 1 l
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया


हाँ फ़ैंसला तो ठोक बजा कर ही था किया 
'अब क्या बताएँ कैसे हमारी नहीं बनी' l 2 l
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया


क़द शक्ल नौकरी तो सभी थे पसंद के, 
'अब क्या बताएँ कैसे हमारी नहीं बनी' l
~सुषमा मल्होत्रा, न्यू जर्सी


हमसे छुड़ा के ले गयी दौलत की उसको भूख
'अब क्या बताएँ कैसे हमारी नहीं बनी' l 1 l
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


मुजरिम ही जैसे सारे सियासत में थे भरे
'अब क्या बताएँ कैसे हमारी नहीं बनी' l 2 l
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


कोशिश तो हर मक़ाम रही दोनों ओर से 
'अब क्या बताएँ कैसे हमारी नहीं बनी' l
~मनोज 'अबोध' भारत


वादा तो उम्रभर के लिए था निभाव का 
'अब क्या बताएँ कैसे हमारी नहीं बनी' l
~रूबी मोहंती, भारत


गिन गिन के गुण मिलान सभी हमने थे किए,
‘अब क्या बताएँ कैसे हमारी नहीं बनी’।
~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क 


*✨*☀️**✨**


 614 वें मिसरे: 'हमने देखा है बेवफ़ा हो के'

 पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:


बा वफ़ा लोग कैसे होते है: 
'हमने देखा है बेवफा हो के' ।
~ महबूब सोनालिया, भारत 


अब वो पहले सी गुफ़्तगू न रही
'हमने देखा है बेवफा हो के' । 1 ।
~संजीव दुआ,  भारत


आँख में शर्म भर के है आई
'हमने देखा है बेवफा हो के' । 2 ।
~संजीव दुआ, भारत


कितना मुश्किल है बेवफ़ा होना
'हमने देखा है बेवफा हो के' ।
~सज्जाद 'अख्तर' , भारत


चैन आता नहीं है ख़ुद को भी 
'हमने देखा है बेवफा हो के' ।
~अकबर 'शाद' उदयपुरी, भारत


दर्द रह रह के दिल में उठता है,
'हमने देखा है बेवफा हो के' ।
~अनमोल प्रकाश शुक्ला, भारत 


ज़ख़्म यादों के रिसते रहते हैं 
'हमने देखा है बेवफा हो के' । 1 ।
~लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत 


वो भी औरों के हो लिए फट से 
'हमने देखा है बेवफा हो के' । 2 ।
~लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत 


आइना भी हमें डराता है,
‘हमने देखा है बेवफ़ा हो के’।
~मधु शर्मा, न्यूयॉर्क


फ़र्क़ उनको नहीं पड़ा कुछ भी,
'हमने देखा है बेवफा हो के' ।
~मनोज 'अबोध', भारत


फ़र्क़ पड़ता नहीं उसे अब भी,
'हमने देखा है बेवफा हो के' ।
~रेनू हुसैन, भारत 


संगदिल वो, बदल नहीं पाया,
'हमने देखा है बेवफा हो के' ।
~रेनू हुसैन, भारत 


होना उतना भी है नहीं मुश्किल,
'हमने देखा है बेवफा हो के' ।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया


आदमी फिर कहीं का भी न रहे 
‘हमने देखा है बेवफ़ा हो के’।
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत


नींद भी रूठ जाए फिर अपनी,
‘हमने देखा है बेवफ़ा हो के’।
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत


दिल ज़िगर चाक करना पड़ता है,
‘हमने देखा है बेवफ़ा हो के’।
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत


माफ़ ख़ुद को ही करना होता कठिन,
‘हमने देखा है बेवफ़ा हो के’।
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत


ज़िन्दगी भार लगने लगती है,
‘हमने देखा है बेवफ़ा हो के’।
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत


ख़ाक ख़ुद को ही कर लिया हमने,
‘हमने देखा है बेवफ़ा हो के’।
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत


यूँ ही बेकार कर लिया ख़ुद को,
‘हमने देखा है बेवफ़ा हो के’।
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत


कुछ नहीं फिर हमें हुआ हासिल,
'हमने देखा है बेवफा हो के' ।
~ममता किरण भारत


ख़ूब मंहगा पड़ा है वो नाटक,
'हमने देखा है बेवफा हो के' ।
~ममता किरण भारत


ज़िंदगी भर कचोटता है दिल, 
'हमने देखा है बेवफा हो के' ।
~खुर्रम नूर भारत

कुछ दिनों तक तो मौज रहती है,
'हमने देखा है बेवफा हो के' ।
~ अशोक सिंह , न्यू यॉर्क 


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इस कार्यक्रम का यू-ट्यूब वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करिये:


©️सर्वाधिकार सुरक्षित। इस पोस्ट में साझा किए गए सभी गिरह के शे'र 'एक शे'र अर्ज़ किया है' पटल पर शामिल शायरों के हैं। इनमें से कोई भी शे'र शायर की लिखित पूर्व सहमति के बग़ैर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।

संपादक

~ कौसर भुट्टो, दुबई


 


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