बुधवार, 4 फ़रवरी 2026

306 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 31 जनवरी, 2026

306 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 31 जनवरी, 2026

एक‌ शे'र‌ अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित #डिजिटल_वीडियो_गोष्ठी का 306 वाँ तरही मुशायरा कार्यक्रम।

 आज का मुशायरा इन दो मिसरों पर आधारित था:

611 वाँ मिसरा: 'ये जुर्म है तो फिर इस जुर्म की सज़ा रखना'।

~ ज़फ़र इक़बाल


612 वाँ मिसरा: 'चारा-साज़ी एक तरफ़ है उस का छूना एक तरफ़' ।

~ वरुण आनंद

                                 *****^*****

 जायज़ा लीजिए अलग अलग ज़ावियों से इन मिसरों पर लगाई हुई गिरह का;

611 वें मिसरे: 'ये जुर्म है तो फिर इस जुर्म की सज़ा रखना'

पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:


तुम्हीं से प्यार किया जब भी कुछ किया हमने
'ये जुर्म है तो फिर इस जुर्म की सज़ा रखना' l
~अकबर 'शाद' उदयपुरी, भारत


मैं मुफलिसी में भी जीने का शौक रखता हूं 
'ये जुर्म है तो फिर इस जुर्म की सज़ा रखना' ।
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


कभी न झूठ को सच कह सकूंगा कुछ कर लो
'ये जुर्म है तो फिर इस जुर्म की सज़ा रखना' ।
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


भुला न पाया तुम्हें कर के तुम से वादा भी 
'ये जुर्म है तो फिर इस जुर्म की सज़ा रखना' ।
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


सिवा तेरे कोई साथी कभी जँचा ही नहीं
'ये जुर्म है तो फिर इस जुर्म की सज़ा रखना'।
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत


चले जो आए हो बे-पर्दा लोग देखेंगे 
'ये जुर्म है तो फिर इस जुर्म की सज़ा रखना' ।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया


मैं तोड़ बेड़ियां निकली हूं आसमॉं छूने,
'ये जुर्म है तो फिर इस जुर्म की सज़ा रखना'।
~ममता 'किरण' भारत


ख़ता यही है कि उससे नज़र मिलाई है ,
'ये जुर्म है तो फिर इस जुर्म की सज़ा रखना' ।
~रेनू हुसैन भारत


सनम को चाहना बढ़ कर ख़ुदा की क़ुदरत से, 
‘ये जुर्म है तो फिर इस जुर्म की सज़ा रखना’।
~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क 


*✨*☀️**✨**


 612 वें मिसरे: 'चारा-साज़ी एक तरफ़ है उस का छूना एक तरफ़' ।

 पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:


मुद्दत से बीमार पड़ा हूँ कोई उसको बुलवाए 
'चारा-साज़ी एक तरफ़ है उस का छूना एक तरफ़’।
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत


मुस्काकर उसका मेरे होठों पर उँगली रख देना,
'चारा साज़ी एक तरफ है उसका छूना एक तरफ' ।
~अनमोल प्रकाश शुक्ला, भारत 


उसको छू कर मुझे छुआ झोंके ने मुझको फ़र्क़ लगा 
'चारा-साज़ी एक तरफ़ है उस का छूना एक तरफ़' ।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया


हट जाओ सब चारागर अब उनकी आमद होनी है
'चारा-साज़ी एक तरफ़ है उस का छूना एक तरफ़' ।
~प्रज्ञा त्रिवेदी ,भारत


हार गए सब वैद-नजूमी, एक उसी से आशा है 
'चारा-साज़ी एक तरफ़ है उस का छूना एक तरफ़' ।
~मनोज 'अबोध', भारत


जाने कैसा रोग लगा है जब से देखा है उसको!
'चारा-साज़ी एक तरफ़ है उस का छूना एक तरफ़' ।
~के पी सक्सेना , भारत 


उसकी सेवा करते रहना मुझको अच्छा लगता है
'चारा-साज़ी एक तरफ़ है उस का छूना एक तरफ़' ।
~रेनू हुसैन, भारत 


वो आ जाये तो पक्का मैं, मरते-मरते जी जाऊँ,
'चारा-साज़ी एक तरफ़ है उस का छूना एक तरफ़' ।
~रूबी मोहंती, भारत


जादू है उसके हाथों में, मॉं को बुलवा दे कोई 
'चारा-साज़ी एक तरफ़ है उस का छूना एक तरफ़' ।
~ममता किरण भारत


ज़ख़्म-ए-ला-दवा मिले जहॉं से शिफ़ा उन्हीं हाथों में है,
'चारा-साज़ी एक तरफ़ है उस का छूना एक तरफ़’।
~ अशोक सिंह , न्यू यॉर्क 


****^*****


इस कार्यक्रम का यू-ट्यूब वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करिये:


©️सर्वाधिकार सुरक्षित। इस पोस्ट में साझा किए गए सभी गिरह के शे'र 'एक शे'र अर्ज़ किया है' पटल पर शामिल शायरों के हैं। इनमें से कोई भी शे'र शायर की लिखित पूर्व सहमति के बग़ैर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।

संपादक

~ कौसर भुट्टो, दुबई


 


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

332 वाँ सप्ताह एक शे’र गिरह-नामा: 1 अगस्त, 2026

 332 वाँ सप्ताह एक शे’र गिरह-नामा: 1 अगस्त, 2026 एक‌ शे'र‌ अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित  332 वाँ सप्ताहिक गिरह...