रविवार, 28 सितंबर 2025

288 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 27 सितंबर, 2025

 

288 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 27 सितंबर, 2025
एक‌ शे'र‌ अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित #डिजिटल_वीडियो_गोष्ठी का 288 वाँ तरही मुशायरा कार्यक्रम।


आज का मुशायरा इन दो मिसरों पर आधारित था:

575 वाँ मिसरा: 'थोड़ा बहुत ख़राब तो होना भी चाहिए' |
~ जव्वाद  शेख


576 वाँ मिसरा: ‘गुफ़्तुगू कर के कोई हल तो निकाला होता’।
~ मधु मधुमन



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जायज़ा लीजिए अलग अलग ज़ावियों से इन मिसरों पर लगाई हुई गिरह का;

573 वें मिसरे: 'थोड़ा बहुत ख़राब तो होना भी चाहिए' 

पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:


अच्छे बहुत रहे तो न जी पाएंगे यहाँ,
'थोड़ा बहुत ख़राब तो होना भी चाहिए' ।
~मनोज 'अबोध' , भारत


हां है खराबी देता हूं चोरों को गालियां,
'थोड़ा बहुत ख़राब तो होना भी चाहिए' |
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


मुश्किल है दौर-ए-आज में अच्छा बनें रहें,
'थोड़ा बहुत ख़राब तो होना भी चाहिए' |
~ममता किरण ,  भारत


दो चार ऐब और है एकाध नुक़्स ही,
'थोड़ा बहुत ख़राब तो होना भी चाहिए' |
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया


एकाध ही तो मुझमें बुराई है आज कल
'थोड़ा बहुत ख़राब तो होना भी चाहिए' |
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया


दुनिया के सिलसिले में तमाशा भी चाहिए,
'थोड़ा बहुत ख़राब तो होना भी चाहिए' ।
~ अकबर शाद 'उदयपुरी', भारत


कर दी हैं माफ़ उनकी जफाएँ ये सोचकर
'थोड़ा बहुत ख़राब तो होना भी चाहिए' |
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत

 
इंसान हूं मैं कोई फ़रिश्ता नहीं.... मुझे
'थोड़ा बहुत ख़राब तो होना भी चाहिए' | 1|
~ सज्जाद अख़्तर, भारत 


जो बाप की कमाई पे करता हो ऐश उसे
'थोड़ा बहुत ख़राब तो होना भी चाहिए' | 2|
~ सज्जाद अख़्तर, भारत 


आती नहीं है काम शराफ़त सभी जगह
'थोड़ा बहुत ख़राब तो होना भी चाहिए' |
के पी सक्सेना, भारत 


ख़ाना ख़राब इश्क़ को चढ़ते शबाब को 
थोड़ा बहुत  ख़राब तो  होना भी चाहिए
~ अनिमेष शर्मा, भारत 


अच्छे को अच्छा जान के सब लेंगे फ़ायदा,
'थोड़ा बहुत ख़राब तो होना भी चाहिए' |
~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क


*✨*☀️**✨**


576 वें मिसरे:  ‘गुफ़्तुगू कर के कोई हल तो निकाला होता’

पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:


बेरुख़ी ठीक है आँखों की लबों से लेकिन 
‘गुफ़्तुगू कर के कोई हल तो निकाला होता’ ।
~दिगंबर नासवा, मलेशिया


कहने-सुनने से सुलझ जाते हैं कितने मुद्दे!
‘गुफ़्तुगू कर के कोई हल तो निकाला होता’ ।
~के पी सक्सेना, भारत 


सच की आवाज़ को क्यों मौन बना डाला है
‘गुफ़्तुगू कर के कोई हल तो निकाला होता’ |
~ अकबर शाद 'उदयपुरी', भारत


वो ही  होगा जो रचा 'उसने' तो फिर क्यों सोचें!
‘गुफ़्तुगू कर के कोई हल तो निकाला होता’ |
~ प्रज्ञा त्रिवेदी, भारत


दूर जाने की भला  जल्दी  थी क्यों  दोनों को
‘गुफ़्तुगू कर के कोई हल तो निकाला होता’ | 2 ।
~ प्रज्ञा त्रिवेदी, भारत


आप भी ऐंठ गए अपनी अकड़ में इतने,
‘गुफ़्तुगू कर के कोई हल तो निकाला होता’ |
~ मनोज अबोध, भारत


खोल तो लेते बँधीं अपने दिलों की गांठें,
'गुफ्तगू करके कोई हल तो निकाला होता' | 
~ अनमोल प्रकाश शुक्ला, भारत 


बेवजह बात बढ़ा कर न हुआ कुछ हासिल 
'गुफ्तगू करके कोई हल तो निकाला होता' | 
~ रेणु हुसैन, भारत 


पेश क़दमी से ये माहौल बदल सकता था 
'गुफ्तगू करके कोई हल तो निकाला होता' ।
~ सज्जाद अख़्तर, भारत


क्यों पुलिस वाले से भिड़ कर ये मुसीबत ले ली 
'गुफ्तगू करके कोई हल तो निकाला होता' | 1 |
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


अपनी इक ज़िद से ही माहौल बिगाड़ा तुमने
'गुफ्तगू करके कोई हल तो निकाला होता' | 2 |
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


दर्द बच्चों का बिना सोचे अलग हो बैठे 
'गुफ्तगू करके कोई हल तो निकाला होता' | 3 |
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


पांच सौ रुपयों पे बस छोड़ा है कवि सम्मेलन 
'गुफ्तगू करके कोई हल तो निकाला होता' | 4 |
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


ये अहंकार तुम्हारा न कहीं ले डूबे,
'गुफ़्तगू करके कोई हल तो निकाला होता'।
~ममता किरण ,  भारत


ढाक के तीन वही पात थे हरदम जो कहें,
‘गुफ़्तुगू कर के कोई हल तो निकाला होता’। 1 |
~ अशोक सिंह , न्यूयॉर्क


कोई मफ़रूज़ा बना रक्खा था मन ही मन में, 
‘गुफ़्तुगू कर के कोई हल तो निकाला होता’। 2 |
*मफ़रूज़ा=काल्पनिक बात, भ्रम
~ अशोक सिंह , न्यूयॉर्क

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https://youtu.be/3pfbLsPio8Uyoutube link



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संपादक

~ कौसर भुट्टो, दुबई


रविवार, 14 सितंबर 2025

287 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 20 सितंबर, 2025

 

287 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 20 सितंबर, 2025
एक‌ शे'र‌ अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित #डिजिटल_वीडियो_गोष्ठी का 287 वाँ तरही मुशायरा कार्यक्रम।


आज का मुशायरा इन दो मिसरों पर आधारित था:

573 वाँ मिसरा: 'और प्यार में थोड़ी सी कमी कम नहीं होती'। 
~ अकील नोमानी

574 वाँ मिसरा: ‘अकेला रह गया है रास्ता अब’।
~ प्रदीप चौबे


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जायज़ा लीजिए अलग अलग ज़ावियों से इन मिसरों पर लगाई हुई गिरह का;

573 वें मिसरे: 'और प्यार में थोड़ी सी कमी कम नहीं होती'

पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:



ये बीच की दीवानगी थोड़ी सी हुई कम
*और प्यार में थोड़ी सी कमी कम नहीं होती*
~मनोज 'अबोध' , भारत


जीवन में कहीं हो कमी स्वीकार है मुझको 
'और प्यार में थोड़ी सी कमी कम नहीं होती' ।
~ममता किरण ,  भारत


जीवन की उलझनों में कहीं प्यार भी उलझा
'और प्यार में थोड़ी सी कमी कम नहीं होती' ।
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


यह प्यार खुले-आम न जतलाना कमी है 
'और प्यार में थोड़ी सी कमी कम नहीं होती' |
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया


कुछ ख़्वाब तेरी आँखों में पूरे नहीं होते
'और प्यार में थोड़ी सी कमी कम नहीं होती' |
~ अकबर शाद 'उदयपुरी', भारत


कुछ तो है वजह बातें मुलाक़ातें हुईं कम
'और प्यार में थोड़ी सी कमी कम नहीं होती' | 1|
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत


जो आँच शरर जैसी थी अब होने लगी कम
'और प्यार में थोड़ी सी कमी कम नहीं होती' | 2|
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत


 है प्यार मगर प्यार की शिद्दत में कमी है, 
'और प्यार में थोड़ी सी कमी कम नहीं होती' ।
~ सज्जाद अख़्तर, भारत 


बढ़ जाए अगर हद से ज़ियादा तो भी कम है, 
'और प्यार में थोड़ी सी कमी कम नहीं होती'।
~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क




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574 वें मिसरे:  ‘अकेला रह गया है रास्ता अब’

पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:


न सिगरेट, चाय, भँवरे, तुम, न तितली 
'अकेला रह गया है रास्ता अब' |
~दिगंबर नासवा, मलेशिया


सितम तूफ़ान ने ढाया है ऐसा
‘अकेला रह गया है रास्ता अब’।
~प्रेम बिहारी मिश्र, भारत


सभी पहुँचे हैं मंज़िल उस पे चल के,
‘अकेला रह गया है रास्ता अब’।
खुर्रम नूर , भारत 


चले थे साथ जो सब खो गए हैं
'अकेला रह गया है रास्ता अब' |
~ अकबर शाद 'उदयपुरी', भारत


जिन्हें जाना था वे सब जा चुके हैं
'अकेला रह गया है रास्ता अब' |
~ प्रज्ञा त्रिवेदी, भारत


लगे जब लोग उड़ने, हैं हवा में 
'अकेला रह गया है रास्ता अब' ।
के पी सक्सेना, भारत 


छुटा है साथ कुछ यूँ रहनुमा का
'अकेला रह गया है रास्ता अब' |
~ मनोज अबोध, भारत


किनारे  के  कटे  हैं  पेड़   सारे 
'अकेला रह गया है रास्ता अब' |
 ~रूबी  मोहंती , भारत 


किनारों पर उग आयीं नागफनियाँ 
'अकेला रह गया है रास्ता अब' |
~ अनमोल प्रकाश शुक्ला, भारत 


मुसाफ़िर तक नहीं मेरा है कोई 
'अकेला रह गया है रास्ता अब' |
~ रेणु हुसैन, भारत 


न मंज़िल है न मंज़िल के निशाँ हैं 
'अकेला रह गया है रास्ता अब' | 1|
~ सज्जाद अख़्तर, भारत


मुझे मंज़िल पे जाकर याद आया
'अकेला रह गया है रास्ता अब' | 2|
~ सज्जाद अख़्तर, भारत


हमारे दम से थी रौनक़ वहां पर
'अकेला रह गया है रास्ता अब' | 3|
~ सज्जाद अख़्तर, भारत


मुझे तो मिल गई है अपनी मंज़िल 
'अकेला रह गया है रास्ता अब' |
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


 बिछुड़ते ही गये जो हमसफ़र थे
'अकेला रह गया है रास्ता अब' |
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


 शजर थोड़े से हैं कहने को साथी
'अकेला रह गया है रास्ता अब' |
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


बदल ली राह मैंने अपनी इक दिन 
'अकेला रह गया है रास्ता अब' |
~ममता किरण ,  भारत


न  तितली है  न  भँवरे हैं  न  पंछी
'अकेला रह गया है रास्ता अब' |
~ अनिमेष शर्मा, भारत 


चले थे साथ फिर लौटे न उस पर 
'अकेला रह गया है रास्ता अब' |
~रमणी थापर ,कैलिफ़ोर्निया 


चला बच कर ज़माने से जो कल तक,
‘अकेला रह गया है रास्ता अब’।
~ अशोक सिंह , न्यूयॉर्क


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संपादक

~ कौसर भुट्टो, दुबई


286वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 13 सितंबर, 2025

 

286वाँ एक शेर गिरह-नामा: 13 सितंबर, 2025

एक‌ शे'र‌ अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित #डिजिटल_वीडियो_गोष्ठी का 286 वाँ तरही मुशायरा कार्यक्रम।

आज का मुशायरा इन दो मिसरों पर आधारित था:

571 वाँ मिसरा: ‘ख़ुद को तबाह कर लिया और कुछ मलाल भी नहीं'

~ जॉन एलिया

572 वाँ मिसरा: 'हर कहानी मिरी कहानी है'

~ फ़िराक़ गोरखपुरी

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जायज़ा लीजिए अलग अलग ज़ावियों से इन मिसरों पर लगाई हुई गिरह का;

571 वें मिसरे:  'ख़ुद को तबाह कर लिया और कुछ मलाल भी नहीं'

पर 'एक शे'र अर्ज़ किया हैके शायरों की लगाई गईं गिरह:


सच की लड़ाई मैं लड़ा तो साथ कोई भी न था

'ख़ुद को तबाह कर लिया और कुछ मलाल भी नहीं' l

मनोज 'अबोध' , भारत


ये हौसला है इश्क़ से ताक़त है इश्क़ की ग़ज़ब 

'ख़ुद को तबाह कर लिया और कुछ मलाल भी नहीं' l

प्रेम बिहारी मिश्र, भारत


मेरी ही ख़्वाहिशें थीं औ मेरा जुनूं था इसलिए 

'ख़ुद को तबाह कर लिया और कुछ मलाल भी नहीं’ |

लक्ष्मी शंकर बाजपेईभारत


हर चोट सह ली ज़िस्म पे शायद उन्हें भी दर्द हो 

'ख़ुद को तबाह कर लिया और कुछ मलाल भी नहीं' l

~ दिगंबर नासवामलेशिया


हमने वफ़ा की राह में सब कुछ लुटा दिया था जो

'ख़ुद को तबाह कर लिया और कुछ मलाल भी नहीं।’ |

~ अकबर शाद 'उदयपुरी', भारत


जलने से  इश्क़ में कभी परवाना वो नहीं डरा

'ख़ुद को तबाह कर लिया और कुछ मलाल भी नहीं' l

~ प्रज्ञा त्रिवेदी भारत

 

था इश्क़ का सुरूर मेरे सिर पे ऐसे चढ़ गया 

‘ख़ुद को तबाह कर लिया और कुछ मलाल भी नहीं’। 1 l

~ रेणु हुसैन, भारत


सर पर कफ़न को बाँध कर जब चल दिए थे नौजवाँ 

'ख़ुद को तबाह कर लिया और कुछ मलाल भी नहीं’ l 2 l

रेणु हुसैनभारत


बेसुध पड़े हुए हैं वो दुनिया जहां से बेख़बर

'ख़ुद को तबाह कर लिया और कुछ मलाल भी नहीं' |

~ सज्जाद अख़्तर, भारत 


छोड़ी किसी के वास्ते इस ज़िंदगी की हर ख़ुशी 

'ख़ुद को तबाह कर लिया और कुछ मलाल भी नहीं' l

~रूबी मोहंती, भारत


समझा न बात की कोई संजीदगी ये दिल कभी, 

‘ख़ुद को तबाह कर लिया और कुछ मलाल भी नहीं’ l

~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क


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572 वें मिसरे: 'हर कहानी मिरी कहानी है'

पर 'एक शे'र अर्ज़ किया हैके शायरों की लगाई गईं गिरह:


रो रहा कर के इश्क़ हर कोई,

 'हर कहानी मिरी कहानी है' ।

~दिगंबर नासवा, मलेशिया


दर्द ही ज़िंदगी रवानी है,

हर कहानी मिरी कहानी है।

अकबर शाद 'उदयपुरी', भारत


हर कहानी में ख़ूब रोती हूँ

'हर कहानी मेरी कहानी है' ।

प्रज्ञा त्रिवेदीभारत


क्या सुनाऊं मैं दास्तॉं तुमको

 हर कहानी मिरी कहानी है।

के पी सक्सेना, भारत 


सारे क़िरदार मेरे अपने हैं

'हर कहानी मेरी कहानी है' ।

~ मनोज अबोधभारत

 

प्यार में जिसका भी है दिल टूटा,

'हर कहानी मेरी कहानी है' ।

~ अनमोल प्रकाश शुक्ला,  भारत 


ज़ख़्म,आँसू कि दर्द कह लो तुम 

हर कहानी मिरी कहानी है

रेणु हुसैन, भारत


हर फ़साना मेरा फ़साना था,

 'हर कहानी मेरी कहानी है' ।

सज्जाद अख़्तर, भारत


रंग-आमेज़ जो मोहब्बत से, 

'हर कहानी मिरी कहानी है।

~ अशोक सिंह न्यूयॉर्क


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इस कार्यक्रम का यू-ट्यूब वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक कीजिए 

https://youtu.be/X1px6vRa51g?si=gh6EootIwH4DwmMP

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संपादक

~ कौसर भुट्टो, दुबई


सोमवार, 8 सितंबर 2025

285वाँ एक शे’र गिरह-नामा:.06 सितंबर, 2025

 

285वाँ एक शेर गिरह-नामा: 06 सितंबर, 2025

एक‌ शे'र‌ अर्ज़ किया हैमंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित #डिजिटल_वीडियो_गोष्ठी का 285वाँ तरही मुशायरा कार्यक्रम।

आज का मुशायरा इन दो मिसरों पर आधारित था:

569वाँ मिसरा: ‘ये कोई तरीक़ा है कहा और किया और’

- ज़हीर देहलवी

570वाँ मिसरा: ‘आज धरती पे उतरे तो जल हो गए’

~ विकल साकेती

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जायज़ा लीजिए अलग अलग ज़ावियों से इन मिसरों पर लगाई हुई गिरह का;

569 वें मिसरे:

ये कोई तरीक़ा है कहा और किया और

पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:


दिखला के हसीं ख्वाब मुकर जाते हो कैसे

‘ये कोई तरीक़ा है कहा और किया और’ |

~ ममता किरण, भारत


बस्ती को बना दूंगा मैं जन्नत ये कहा था

‘ये कोई तरीका है कहा और किया और’ |

~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


की उसने मुरव्वत भी दिल्लगी की तरह ही

‘ये कोई तरीका है कहा और किया और’ |

~रमणी थापर, कैलिफ़ोर्निया  


करनी जो फ़क़ीरी ही थी क्यों इश्क़ लड़ाया

‘ये कोई तरीक़ा है कहा और किया और’ |

~ दिगंबर नासवा, मलेशिया


देवी है ये कह ब्याह में चंडी  ही थमा दी

‘ये कोई तरीक़ा है कहा और किया और’ |

~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत


हमने तेरी बातों को ही समझा है लकीरें

‘ये कोई तरीक़ा है कहा और किया और

~ रेणु हुसैन, भारत


कुछ क़ौल--क़सम की भी तो वक़अत रखी होती,

ये कोई तरीक़ा है कहा और किया और

~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क


देखा है सियासत में हर इक बार ये मंज़र,

‘ये कोई तरीका है कहा और किया और’ |

~ कौसर भुट्टो, दुबई


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570 वें मिसरे: ‘आज धरती पे उतरे तो जल हो गए’

पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:


उड़ रहे थे गगन में हवाओं के साथ

आज धरती पे उतरे तो जल हो गये’ |

प्रेम बिहारी मिश्र, भारत 


वो जो शोले बरसते रहे रोज़ ही,

‘आज धरती पे उतरे तो जल हो गये’ |

~ अकबर शाद 'उदयपुरी', भारत


जो हवा में ही हरदम यूँ उड़ते रहे,

‘आज धरती पे उतरे तो जल हो गये’ |

~ अकबर शाद 'उदयपुरी', भारत


आग बरसाते थे जब थे कुर्सी पे वो

‘आज धरती पे उतरे तो जल हो गये’ |1|

~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


दर्द बरसों के दिल में जमा जो रहे

‘आज धरती पे उतरे तो जल हो गये’ |2|

~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


दुःख के बादल उड़ा आसमां में दिये

‘आज धरती पे उतरे तो जल हो गये’।

~ ममता किरण, भारत


थे निगहबां जो बादल मेरे अश्क़ के

‘आज धरती पे उतरे तो जल हो गए’ |

~ प्रज्ञा त्रिवेदी, भारत


साथ दल-बल के बादल चले झूम कर

‘आज धरती पे उतरे तो जल हो गये’ |

~ दिगंबर नासवा, मलेशिया

 

ठोस बनते थे थोड़ा तरल हो गए

‘आज धरती पे उतरे तो जल हो गए’ |

~ सज्जाद अख्तर ,भारत


जो गरज कर डराते रहे रात-भर

‘आज धरती पे उतरे तो जल हो गए’ |

~ मनोज अबोध, भारत


सजे थे बन के मोती ज़ुल्फ़ों में जो

‘आज धरती पे उतरे तो जल हो गए’ |

~रमणी थापर, कैलिफ़ोर्निया 

 

उनके ओलों के मानिंद तेवर भी तो

‘आज धरती पे उतरे तो जल हो गये’ |

~ अनमोल प्रकाश शुक्ला,  भारत 


ख़्वाब थे आसमाँ पर ही अच्छे बहुत

‘आज धरती पे उतरे तो जल हो गये’ |

~ रेणु हुसैन, भारत


रंग--गर्दिश थे बर्क़--तजल्ली थे जो,

आज धरती पे उतरे तो जल हो गये’ |

~ अशोक सिंह , न्यूयॉर्क

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संपादक

~ कौसर भुट्टो, दुबई


319 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 2 मई , 2026

319 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 2 मई , 2026 एक‌ शे'र‌ अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित #डिजिटल_वीडियो_गोष्ठी का  319 वा...