मंगलवार, 31 मार्च 2026

314 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 28 मार्च , 2026

314 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 28 मार्च , 2026

एक‌ शे'र‌ अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित #डिजिटल_वीडियो_गोष्ठी का  314 वाँ तरही मुशायरा कार्यक्रम।

 आज का मुशायरा इन दो मिसरों पर आधारित था:

 627 वाँ मिसरा: 'सारे जहाँ दर्द हमारे जिगर में है' । 

~अमीर' मीनाई


628 वाँ मिसरा: 'इंकार के पर्दे में इकरार नज़र आए'।

~ महेश चंद्र नक़्श' । 


                                 *****^*****


 जायज़ा लीजिए अलग अलग ज़ावियों से इन मिसरों पर लगाई हुई गिरह का;

627۔वें मिसरे:  'सारे जहाँ दर्द हमारे जिगर में है'

पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:


बम फोड़ते हैं दुनिया में और बोलते हैं ये, 
'सारे जहां का दर्द हमारे जिगर में है'।
~डॉ. आदेश त्यागी, भारत


हर इक सितम को हँस के ही सहते रहे हैं हम,
‘सारे जहाँ का दर्द हमारे जिगर में है’।
~अक़बर शाद उदयपुरी, भारत 


जज़्बात की हदों के तो क़ाइल नहीं हैं हम,
‘सारे जहाँ का दर्द हमारे जिगर में है’।
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत


अपने ही ज़ख़्म का नहीं एहसास है कोई,
‘सारे जहाँ का दर्द हमारे जिगर में है’।
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत


आकर जरा करीब कभी देखिए यहां 
'सारे जहाँ का दर्द हमारे जिगर में है' ।
~नितीन उपाध्ये, दुबई


महसूस हो रहा है हमें हर किसी का ग़म,
‘सारे जहाँ का दर्द हमारे जिगर में है’।
~कौसर भुट्टो, दुबई


मअ'नी समझते दुनिया में यास-ओ-अलम के हम,
‘सारे जहाँ का दर्द हमारे जिगर में है’।
~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क 


*✨*☀️**✨**


 628 वें मिसरे: ‘इंकार के पर्दे में इक़रार नज़र आए'

 पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:


ये साफ़ इशारे हैं वो जंग को रोकेंगे 
‘इंकार के पर्दे में इक़रार नज़र आए’। 1 l
~लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


मायूसियां थीं बेहद फिर वो कुछ ऐसे बोला
‘इंकार के पर्दे में इक़रार नज़र आए’। 2 l
~लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


पूछो न कोई हम से दीवानगी का आलम 
‘इंकार के पर्दे में इक़रार नज़र आए’।
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत


उश्शाक़ दुआ गो हैं, माशूक़ करे कुछ यूँ 
'इंकार के पर्दे में इक़रार नज़र आये' ।
~डाॅ. आदेश त्यागी, भारत


ऐ मेरे ख़ुदा मुझको, इक ऐसी नज़र दे दे
‘इंकार के पर्दे में इक़रार नज़र आए’। 1 l
~सज्जाद अख्तर, भारत


ऐसा भी हुआ अक्सर, जब वक़्त ने करवट ली
‘इंकार के पर्दे में इक़रार नज़र आए’। 2 l
~सज्जाद अख्तर, भारत


इस दर्ज़ा भरोसा है उनपे हमे क्या कीजे
‘इंकार के पर्दे में इक़रार नज़र आए’।
~प्रज्ञा त्रिवेदी ,भारत


कुछ ऐसे तरीक़े से मुझको ये ख़बर देना 
‘इंकार के पर्दे में इक़रार नज़र आए’।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया


लब कुछ न कहें चाहे,आंखों की शरारत ही,
‘इंकार के पर्दे में इक़रार नज़र आए’।
~अनमोल प्रकाश शुक्ला, भारत 


उनको ही नवाज़ा है मौला ने हुनर ये भी!
‘इंकार के पर्दे में इक़रार नज़र आए’।
~के पी सक्सेना, भारत 


वो बात ही करते हैं कुछ ऐसे इशारों में 
‘इंकार के पर्दे में इक़रार नज़र आए’।
~मनोज 'अबोध', भारत 


इस दौर में भी “रूबी” हैं लोग बहुत जिनको 
‘इंकार के पर्दे में इक़रार नज़र आए’।
~रूबी मोहंती, भारत


ख़ुशफ़हमियों की हद है, इन प्यार में अंधों को,
‘इंकार के पर्दे में इक़रार नज़र आए’।
~खुर्रम नूर भारत


होंठों पे तबस्सुम है, रुख़सार पे है लाली
 ‘इंकार के पर्दे में इक़रार नज़र आए’।
~रेनू हुसैन, भारत 


ख़ुशफ़हमियों की हद है,हम प्यार में डूबों को- 
‘इंकार के पर्दे में इक़रार नज़र आए’।
~खुर्रम नूर, भारत 


देखो तो अदा उसकी देखे है हमें कैसे
‘इंकार के पर्दे में इक़रार नज़र आए’।
~आलोक अविरल, भारत


देख जो पलट कर वो हल्की सी हया करना,
‘इंकार के पर्दे में इक़रार नज़र आए’।
~कौसर भुट्टो, दुबई 


सच हो कि ग़लतफ़हमी ख़ुश हैं वो इसी में ही,
‘इंकार के पर्दे में इक़रार नज़र आए’।
~ अशोक सिंह , न्यू यॉर्क 


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इस कार्यक्रम का यू-ट्यूब वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करिये:


©️सर्वाधिकार सुरक्षित। इस पोस्ट में साझा किए गए सभी गिरह के शे'र 'एक शे'र अर्ज़ किया है' पटल पर शामिल शायरों के हैं। इनमें से कोई भी शे'र शायर की लिखित पूर्व सहमति के बग़ैर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।

संपादक

~ कौसर भुट्टो, दुबई


 


रविवार, 22 मार्च 2026

313 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 21 मार्च , 2026

313 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 21 मार्च , 2026

एक‌ शे'र‌ अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित #डिजिटल_वीडियो_गोष्ठी का  313 वाँ तरही मुशायरा कार्यक्रम।

 आज का मुशायरा इन दो मिसरों पर आधारित था:

 625 वाँ मिसरा: 'मेरी आँखों में कई गुज़रे ज़माने आए' । 

~ गोविंद गुलशन' 


626 वाँ मिसरा: 'मैं भी अपने ज़ख़्म छुपाने वाला था'। 

~ परवीन कुमार अश्क़। 


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 जायज़ा लीजिए अलग अलग ज़ावियों से इन मिसरों पर लगाई हुई गिरह का;

625 वें मिसरे:  'मेरी आँखों में कई गुज़रे ज़माने आए ' 

पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:


फिल्म हो जैसे कोई.. तेरी पुरानी चिठ्ठी..!
‘मेरी आँखों में कई गुज़रे ज़माने आए’।
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


उसने पूछा मुझे तुम कौन मेरे लगते हो
‘मेरी आँखों में कई गुज़रे ज़माने आए’।
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत


उस हवेली पे पड़े ज्यों ही क़दम थे मेरे
‘मेरी आँखों में कई गुज़रे ज़माने आए’।
~ममता 'किरण', भारत


पार्क से प्यार में डूबा हुआ जोङा निकला, 
‘मेरी आँखों में कई गुज़रे ज़माने आए’।
~अनमोल प्रकाश शुक्ला, भारत 


लौट परदेस से छूते ही वतन की सरहद।  
‘मेरी आँखों में कई गुज़रे ज़माने आए’।
~के पी सक्सेना, भारत 


जब भी आया है तेरा ज़िक्र किसी महफ़िल में 
‘मेरी आँखों में कई गुज़रे ज़माने आए’।
~सज्जाद अख्तर, भारत


एक यादों का बवण्डर मेरे दिल से गुज़रा 
'मेरी आँखों में कई गुज़रे ज़माने आये' ।
~डाॅ. आदेश त्यागी, भारत


तुझको देखा जो अचानक मैंने तस्वीरों में
‘मेरी आँखों में कई गुज़रे ज़माने आए’।
~रेनू हुसैन, भारत


तेरी यादों ने जो दिल पर कभी दस्तक दी तो
‘मेरी आँखों में कई गुज़रे ज़माने आए’।
~अकबर शाद, भारत


बादलों को उड़ा कर ले गई जब कोई हवा
मेरी आँखों में कई गुज़रे ज़माने आए’।
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत


हूबहू तुझसी नज़र आई थी कल सड़कों पर
मेरी आँखों में कई गुज़रे ज़माने आए’।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया 


मुद्दतों बाद दिखा फ़ोन में उसका नम्बर 
मेरी आँखों में कई गुज़रे ज़माने आए’।
~मनोज 'अबोध', भारत


एक तूफ़ान उठा, धूल उड़ी चौतरफ़ा 
मेरी आँखों में कई गुज़रे ज़माने आए’।
~रूबी मोहंती, भारत


उसकी तस्वीर पुरानी मिली संदूक में तो,
मेरी आँखों में कई गुज़रे ज़माने आए’।
~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क 


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 626 वें मिसरे: 'मैं भी अपने ज़ख़्म छुपाने वाला था'।  

 पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह 


उससे मिलकर बांध ज़ब्त का टूट गया 
'मैं भी अपने ज़ख़्म छुपाने वाला था'। 
~लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


क्या करता दिखलाकर आखिर दुनिया को,
'मैं भी अपने ज़ख़्म छुपाने वाला था'। 
~अनमोल प्रकाश शुक्ला, भारत 


तुमने भी तो ज़ब्त किये थे अपने ग़म
'मैं भी अपने ज़ख़्म छुपाने वाला था'। 
~के पी सक्सेना, भारत 


उस ने भी ख़ुद दुख की पर्दादारी की 
'मैं भी अपने ज़ख़्म छुपाने वाला था' l
~डाॅ. आदेश त्यागी, भारत


वह अपना दर्द बताते झिझक रही थी 
'मैं भी अपने ज़ख़्म छुपाने वाला था'। 
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत


उससे मिलने की चाहत में मुद्दत बाद 
'मैं भी अपने ज़ख़्म छुपाने वाला थी  '। 
~ममता किरण, भारत


पगली अपना प्रेम छुपाने वाली थी,.
'मैं भी अपने ज़ख़्म छुपाने वाला था'। 
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया


वह अपना दर्द बताते झिझक रही थी
'मैं भी अपने ज़ख़्म छुपाने वाला था'। 
प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत


वो ही क्या चिंतित था अपनी चोटों से 
'मैं भी अपने ज़ख़्म छुपाने वाला था'। 
~मनोज 'अबोध', भारत 


वो तो ख़ुशी छुपाए बैठा था अपनी,
‘मैं भी अपने ज़ख़्म छुपाने वाला था’।
~ अशोक सिंह , न्यू यॉर्क 


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संपादक

~ कौसर भुट्टो, दुबई


 


बुधवार, 18 मार्च 2026

312 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 14 मार्च, 2026

312 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 14 मार्च, 2026

एक‌ शे'र‌ अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित #डिजिटल_वीडियो_गोष्ठी का 312 वाँ तरही मुशायरा कार्यक्रम।

 आज का मुशायरा इन दो मिसरों पर आधारित था:

623 वाँ मिसरा: 'तुमको आता ही नहीं पास बुलाने का हुनर'।

~नौशीन फ़ातिमा' । 


624 वाँ मिसरा: 'चमन से ले के हमीं हसरत-ए-बहार चले'।

 ~ शमीम जयपुरी' 


                                 *****^*****

 जायज़ा लीजिए अलग अलग ज़ावियों से इन मिसरों पर लगाई हुई गिरह का;

623 वें मिसरे: 'तुमको आता ही नहीं पास बुलाने का हुनर' 

पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:


उड़ के आ जाते अगर एक इशारा मिलता
'तुमको आता ही नहीं पास बुलाने का हुनर' l
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत


कैसे आते न अगर दिल से बुलाया होता!
'तुमको आता ही नहीं पास बुलाने का हुनर' l
~के पी सक्सेना, भारत 


कॉफी पीने या कभी फिल्म का ऑफर देते ..! 
'तुमको आता ही नहीं पास बुलाने का हुनर' l 1 l
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


एक "खोखे" में तेरे दल में चला आऊंगा 
'तुमको आता ही नहीं पास बुलाने का हुनर' l 2 l
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


रूह बेचैन है कब दुनिया का छूटे बंधन..!
'तुमको आता ही नहीं पास बुलाने का हुनर' l 3 l
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


तुमने सीखा ही नहीं तौर तरीका कोई 
'तुमको आता ही नहीं पास बुलाने का हुनर' l 1 l
~रेनू हुसैन, भारत


इक नज़र प्यार से देखा ही कहाँ तुमने मुझे, 
'तुमको आता ही नहीं पास बुलाने का हुनर' l 2 l
~रेनू हुसैन, भारत


सब किया याद ही बस कर न सके हो दिल से 
'तुमको आता ही नहीं पास बुलाने का हुनर' l 1 l
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया


कहते चिश्मिश ने बुलाया है खिंचे आते हम 
'तुमको आता ही नहीं पास बुलाने का हुनर' l 2 l
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया


न निहारा, न पुकारा, न इशारा ही किया 
'तुमको आता ही नहीं पास बुलाने का हुनर' l
~डाॅ. आदेश त्यागी, भारत


है तुम्हारी शहे रग से भी ज़्यादा वो क़रीब 
'तुमको आता ही नहीं पास बुलाने का हुनर' l
~सज्जाद अख्तर, भारत


कम नहीं खुशियाँ यहाँ रंगी ज़माना है बहुत 
'तुमको आता ही नहीं पास बुलाने का हुनर' l
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत


कोरे वादों पे चला आता निकट कैसे वो 
'तुमको आता ही नहीं पास बुलाने का हुनर' l
~रूबी मोहंती, भारत


बोली चिड़िया यहां कुछ दाने तो डाले होते
'तुमको आता ही नहीं पास बुलाने का हुनर' l
~ममता 'किरण', भारत


जो भी आता है करीब आके पलट जाता है
'तुमको आता ही नहीं पास बुलाने का हुनर' l
~नितिन उपाध्ये,  यूएई


दूर ही दूर से उकसाना भले सीख लिया, 
‘तुमको आता ही नहीं पास बुलाने का हुनर’।
~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क 


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 624 वें मिसरे: 'चमन से ले के हमीं हसरत-ए-बहार चले' 

 पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:


था वक़्त, हम से ही जश्न-ए-बहारां होता था 
'चमन से ले के हमीं हसरत-ए-बहार चले' ।
~डाॅ. आदेश त्यागी, भारत


हमीं रहे हैं दुआगो ख़िज़ाँ के मौसम में 
‘चमन से ले के हमीं हसरत-ए-बहार चले’।
~सज्जाद अख्तर, भारत


हज़ार ख़्वाब लिए हम चमन में उतरे थे,
‘चमन से ले के हमीं हसरत-ए-बहार चले’।
~अकबर शाद, भारत 


कहाँ मिलेगी भला अब बहार-ए-ताज़ा-चमन
‘चमन से ले के हमीं हसरत-ए-बहार चले’।
~संजीव दुआ, भारत


न अब हमीं से ये पतझड़ फुदक के दे दस्तक 
‘चमन से ले के हमीं हसरत-ए-बहार चले’।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया


चमन सजाया हमीं ने था हुस्न का, फिर भी 
‘चमन से ले के हमीं हसरत-ए-बहार चले’।
~मनोज 'अबोध', भारत 


था उसका आरिज़ ए गुलरंग हमसे ही लेक़िन
‘चमन से ले के हमीं हसरत-ए-बहार चले’।
~प्रज्ञा त्रिवेदी ,भारत


हमीं थे आगे इसी बाग़बॉ को लाने में 
‘चमन से ले के हमीं हसरत-ए-बहार चले’।
~ममता किरण, भारत


हमीं ने जान लुटा दी बहार लाने में और
‘चमन से ले के हमीं हसरत-ए-बहार चले’।
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत


हमीं थे बाग़बाँ हम से ही था फ़रोग़े चमन,
‘चमन से ले के हमीं हसरत-ए-बहार चले’।
~खुर्रम नूर, भारत


तमाम उम्र लगा दी चमन सजाने में
'चमन से ले के हमीं हसरत-ए-बहार चले' ।
~नितिन उपाध्ये, यूएई


हमीं में बा'इस-ए-हैजान जब रहा न कोई,
‘चमन से ले के हमीं हसरत-ए-बहार चले’।
*बा'इस-ए-हैजान =जोश, उबाल का कारण
~ अशोक सिंह , न्यू यॉर्क 


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©️सर्वाधिकार सुरक्षित। इस पोस्ट में साझा किए गए सभी गिरह के शे'र 'एक शे'र अर्ज़ किया है' पटल पर शामिल शायरों के हैं। इनमें से कोई भी शे'र शायर की लिखित पूर्व सहमति के बग़ैर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।

संपादक

~ कौसर भुट्टो, दुबई


 


मंगलवार, 10 मार्च 2026

311 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 7 मार्च, 2026

311 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 7 मार्च, 2026

एक‌ शे'र‌ अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित #डिजिटल_वीडियो_गोष्ठी का 311 वाँ तरही मुशायरा कार्यक्रम।

 आज का मुशायरा इन दो मिसरों पर आधारित था:

621 वाँ मिसरा: 'नाम ऐसे आपको ढेरों गिना सकता हूं मैं' । 

~ अशोक रावत


622 वाँ मिसरा: 'उसने हर बार हँस के टाल दिया' । 

~ रहमान रब्बानी

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 जायज़ा लीजिए अलग अलग ज़ावियों से इन मिसरों पर लगाई हुई गिरह का;

621 वें मिसरे:  'नाम ऐसे आपको ढेरों गिना सकता हूं मैं' 

पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:


ज़िन्दगी भर दूसरों के वास्ते जीते रहे 
'नाम ऐसे आपको ढेरों गिना सकता हूं मैं' ।
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


जिनको चिश्मिश ने अभी तक आँख भर देखा नहीं 
'नाम ऐसे आपको ढेरों गिना सकता हूं मैं' ।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया


ख़ुद से कुछ करके न खाया उम्र सारी दी बिता
'नाम ऐसे आपको ढेरों गिना सकता हूं मैं' ।
~अनमोल प्रकाश शुक्ला, भारत 


आप कहते हैं सियासत में नहीं अब दाग़दार 
'नाम ऐसे आपको ढेरों गिना सकता हूं मैं' ।
~ममता 'किरण', भारत


अच्छे-अच्छे नामवर गुमनामियों में मर गये 
'नाम ऐसे आपको ढेरों गिना सकता हूँ मैं' ।
`डा आदेश त्यागी, भारत


साथ में रहता है कोई और दिल में और है 
'नाम ऐसे आपको ढेरों गिना सकता हूं मैं' ।
~रमणी थापर, कैलिफोर्निया


पंख आए ही नहीं और दम भरें परवाज़ का
'नाम ऐसे आपको ढेरों गिना सकता हूं मैं' ।
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत


घर भरा पूरा हो फिर भी शुक्र वो करते नहीं 
'नाम ऐसे आपको ढेरों गिना सकता हूं मैं' ।
~रेनू हुसैन, भारत


हैं ख़ुदा दिखते मगर भीतर से इंसां भी नहीं
'नाम ऐसे आपको ढेरों गिना सकता हूं मैं' । 1 ।
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत


फ़ीस देंगे बाद में, ये कह दिखा दी कुंडली
'नाम ऐसे आपको ढेरों गिना सकता हूं मैं' । 2 ।
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत


जो जरा सी बात पर पाला बदल देते यहां
'नाम ऐसे आपको ढेरों गिना सकता हूँ मैं’।
~के पी सक्सेना, भारत 


जो शिखर पा कर भुला दें सीढ़ियों की भूमिका 
'नाम ऐसे आपको ढेरों गिना सकता हूं मैं' ।
~मनोज 'अबोध', भारत


छेद करते हैं उसी थाली में, जिसमें खा रहे 
'नाम ऐसे आपको ढेरों गिना सकता हूं मैं' ।
~रूबी मोहंती, भारत


दूसरों से छीन कर हक़ बन गए हैं जो ख़ुदा,
'नाम ऐसे आपको ढेरों गिना सकता हूं मैं' ।
~ आलोक अविरल


किरची किरची हो गए पर टूट कर बिखरे नहीं
'नाम ऐसे आपको ढेरों गिना सकता हूं मैं' ।
~सज्जाद अख्तर, भारत


जो बने फिरते हैं अच्छे पर हक़ीक़त में नहीं,
‘नाम ऐसे आपको ढेरों गिना सकता हूँ मैं’।
~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क 


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 622 वें मिसरे: 'उसने हर बार हँस के टाल दिया' 

 पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:


मैंने जब भी उधार मांगा है 
'उसने हर बार हँस के टाल दिया' । 1 ।
~सज्जाद अख्तर, भारत


जब भी वापस उधार मांगा है 
'उसने हर बार हँस के टाल दिया' । 2 ।
~सज्जाद अख्तर, भारत


जब भी शिकवा किया तगाफुल का
'उसने हर बार हँस के टाल दिया' । 3 ।
~सज्जाद अख्तर, भारत


जब कहा घर कभी तो आ जाओ
'उसने हर बार हँस के टाल दिया' । 1 ।
~लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


छोड़ दूं घर पे अपनी गाड़ी से ..! 
'उसने हर बार हँस के टाल दिया' । 2 ।
~लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


जब भी पूछा उदासियों  का सबब
'उसने हर बार हँस के टाल दिया' । 1 ।
~प्रज्ञा त्रिवेदी ,भारत


सच्ची बत्तीसी है कि है डेन्चर?
'उसने हर बार हँस के टाल दिया' । 2 ।
~प्रज्ञा त्रिवेदी ,भारत


जब भी पूछा कि कौन है दिल में,
'उसने हर बार हँस के टाल दिया' । 
~अनमोल प्रकाश शुक्ला, भारत 


जब भी करते हैं गुजारिश, रुक जा!
'उसने हर बार हँस के टाल दिया' । 
~के पी सक्सेना, भारत 


जब भी पूछा, कहीं मिलें हम-तुम 
'उसने हर बार हँस के टाल दिया' । 
~डाॅ. आदेश त्यागी, भारत


जब भी दिल में ज़रा जगह माँगी 
‘उसने हर बार हँस के टाल दिया’।
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत


मैंने जब भी कहा कि कर लो ब्याह
'उसने हर बार हँस के टाल दिया' । 
~ममता किरण, भारत


प्रेम था फिर भी मेरे तोहफ़े को 
'उसने हर बार हँस के टाल दिया' । 
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया


ग़म भी उससे तो लाजवाब हुए 
'उसने हर बार हँस के टाल दिया' । 
~रेनू हुसैन, भारत 



मौत से जब किया सवाल कभी 
'उसने हर बार हँस के टाल दिया' । 
~मनोज 'अबोध', भारत 


हाल-चाल उसका जब भी पूछा तो,
‘उसने हर बार हँस के टाल दिया’।
~ अशोक सिंह , न्यू यॉर्क 


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इस कार्यक्रम का यू-ट्यूब वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करिये:


©️सर्वाधिकार सुरक्षित। इस पोस्ट में साझा किए गए सभी गिरह के शे'र 'एक शे'र अर्ज़ किया है' पटल पर शामिल शायरों के हैं। इनमें से कोई भी शे'र शायर की लिखित पूर्व सहमति के बग़ैर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।

संपादक

~ कौसर भुट्टो, दुबई


 


मंगलवार, 3 मार्च 2026

310 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 28 फरवरी, 2026

310 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 28 फरवरी, 2026

एक‌ शे'र‌ अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित #डिजिटल_वीडियो_गोष्ठी का 310 वाँ तरही मुशायरा कार्यक्रम।

 आज का मुशायरा इन दो मिसरों पर आधारित था:

619 वाँ मिसरा: 'मुझसे पहले उस गली में मेरे अफ़साने गए'।

 ~'खातिर' गज़नवी

620 वाँ मिसरा: 'मिलूँगा उस से तो गुस्सा ज़रूर उतरेगा'।

~ पवन कुमार

                                 *****^*****

 जायज़ा लीजिए अलग अलग ज़ावियों से इन मिसरों पर लगाई हुई गिरह का;

619 वें मिसरे: 'मुझसे पहले उस गली में मेरे अफ़साने गए' 

पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:


उस नगर में पोस्टिंग की न्यूज से थी खलबली 
‘मुझसे पहले उस गली में मेरे अफ़साने गए’। 1 ।
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


उसके सब भाई खड़े थे हाथ में ले हॉकियां
‘मुझसे पहले उस गली में मेरे अफ़साने गए’। 2 ।
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


खु़शबुओं के सिलसिले थे मेरी खातिर मुंतजिर 
‘मुझसे पहले उस गली में मेरे अफ़साने गए’। 3 ।
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


कुछ नहीं ये की चुहल है फेसबुक ने दोस्तो!
‘मुझसे पहले उस गली में मेरे अफ़साने गए’।
~के पी सक्सेना भारत


यार मैं तो वक़्त से पहले ही पहचाना गया
‘मुझसे पहले उस गली में मेरे अफ़साने गए’। 1 ।
~सज्जाद अख्तर भारत


हर किसी के बदले तेवर देखकर ऐसा लगा
‘मुझसे पहले उस गली में मेरे अफ़साने गए’। 2 ।
~सज्जाद अख्तर भारत


अजनबी थे हम मगर पहचान यूँ सबने लिया,
‘मुझसे पहले उस गली में मेरे अफ़साने गए’।
~अनमोल प्रकाश शुक्ला भारत 


कह रहा था वो- सगाई छह दफ़ा टूटी मेरी
‘मुझसे पहले उस गली में मेरे अफ़साने गए’। 1 ।
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत


मुझको बाद-ए-मर्ग भी छोड़ा ज़माने ने कहाँ
‘मुझसे पहले उस गली में मेरे अफ़साने गए’। 2 ।
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत


फूल मालाएँ लिए गुंडे खड़े थे सब वहाँ 
‘मुझसे पहले उस गली में मेरे अफ़साने गए’।
~मनोज अबोध भारत


शुक्रिया ! ऐ चाहने वालों, तुम्हारा शुक्रिया !
‘मुझसे पहले उस गली में मेरे अफ़साने गए’।
~मनोज अबोध भारत


वो थी रंजिश या मुहब्बत क्या बताऊँ अब तुम्हें
‘मुझसे पहले उस गली में मेरे अफ़साने गए’।
~रेनू हुसैन भारत


शायरी के सदक़े ग़ैरों ने भी पहचाना मुझे 
'मुझ से पहले उस गली में मेरे अफ़साने गये' । 1 ।
~डाॅ. आदेश त्यागी भारत


शायरी के सदक़े ग़ैरों ने भी पहचाना मुझे 
'मुझ से पहले उस गली में मेरे अफ़साने गये' । 2 ।
~डाॅ. आदेश त्यागी भारत


काम कुछ ऐसे किए हैं इसलिए ही दोस्तों 
‘मुझसे पहले उस गली में मेरे अफ़साने गए’।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया


सिर्फ़ मैं गुज़रा वहाँ से, हर कोई मुझसे मिला
‘मुझसे पहले उस गली में मेरे अफ़साने गए’।
~प्रेम बिहारी मिश्रा भारत


सोच कर हैरान हूं, हैं इतने दीवाने वहां 
‘मुझसे पहले उस गली में मेरे अफ़साने गए’।
~ममता 'किरण' भारत


हो गई हैं नाज़नीं सब यक ब यक पर्दा नशीं, 
‘मुझसे पहले उस गली में मेरे अफ़साने गए’।
~खुर्रम नूर भारत


जैसे सरगोशी हवा ने जा के चुपके से हो की,
‘मुझसे पहले उस गली में मेरे अफ़साने गए’।
~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क 


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 620 वें मिसरे: 'मिलूँगा उस से तो गुस्सा ज़रूर उतरेगा'

 पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:


लिया जो वीडियो मेरा न आज तक भेजा 
‘मिलूँगा उस से तो ग़ुस्सा ज़रूर उतरेगा’। 1 ।
~लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


करूं कमेंट न लाइक मैं पोस्ट पर उसकी 
‘मिलूँगा उस से तो ग़ुस्सा ज़रूर उतरेगा’। 2 ।
~लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


बड़ी सी लिस्ट थी शॉपिंग की कुछ न ले पाया 
‘मिलूँगा उस से तो ग़ुस्सा ज़रूर उतरेगा’। 3 ।
~लक्ष्मी शंकर बाजपेई,  भारत


मैं वादा कर के भी अब तक नहीं हूं मिल पाया 
‘मिलूँगा उस से तो ग़ुस्सा ज़रूर उतरेगा’। 4 ।
~लक्ष्मी शंकर बाजपेई,  भारत


खुशी में मेरी न आया, तो रंज क्या करना
‘मिलूँगा उस से तो ग़ुस्सा ज़रूर उतरेगा’ ।
संजीव दुआ, भारत


रक़ीब ने चली है चाल जो ख़फा है वो
‘मिलूँगा उस से तो ग़ुस्सा ज़रूर उतरेगा’।
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत


यही सनम का मेरे प्यार का तरीका है 
‘मिलूँगा उस से तो ग़ुस्सा ज़रूर उतरेगा’।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया


यही तो प्यार का अंदाज़ है सनम का मेरे 
‘मिलूँगा उस से तो ग़ुस्सा ज़रूर उतरेगा’।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया


अभी तलक तो रहा दूरियों का इक पर्दा
‘मिलूँगा उस से तो ग़ुस्सा ज़रूर उतरेगा’।
~प्रज्ञा त्रिवेदी ,भारत


मैं सबके सामने रुसवा तो क्या करूं उसको
‘मिलूँगा उस से तो ग़ुस्सा ज़रूर उतरेगा’।
सज्जाद अख्तर, भारत


उसे है प्यार तो ख़फ़गी भी उस की जायज़ है 
'मिलूँगा उस से तो ग़ुस्सा ज़रूर उतरेगा' ।
आदेश त्यागी, भारत


जो दिल में है उसे दिल में ही रहने दो अब तो
‘मिलूँगा उस से तो ग़ुस्सा ज़रूर उतरेगा’।
~अकबर 'शाद' उदयपुरी, भारत


मुझे पता है ख़फ़ा है अभी वो मुझसे पर 
‘मिलूँगा उस से तो ग़ुस्सा ज़रूर उतरेगा’।
~रेनू हुसैन, भारत 


पता है फ़ोन पे देगा वो गालियॉं मुझको 
‘मिलूँगा उस से तो ग़ुस्सा ज़रूर उतरेगा’।
~ममता 'किरण', भारत


बिना बताये मुझे वो कहाँ रहा अब तक,
‘मिलूँगा उस से तो ग़ुस्सा ज़रूर उतरेगा’।
मनोज 'अबोध', भारत


सुनायेगा वो भले चिढ़ के पहले दस बातें, 
‘मिलूँगा उस से तो ग़ुस्सा ज़रूर उतरेगा’।
~ अशोक सिंह , न्यू यॉर्क 


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इस कार्यक्रम का यू-ट्यूब वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करिये:


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संपादक

~ कौसर भुट्टो, दुबई


 


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