मंगलवार, 3 मार्च 2026

310 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 28 फरवरी, 2026

310 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 28 फरवरी, 2026

एक‌ शे'र‌ अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित #डिजिटल_वीडियो_गोष्ठी का 310 वाँ तरही मुशायरा कार्यक्रम।

 आज का मुशायरा इन दो मिसरों पर आधारित था:

619 वाँ मिसरा: 'मुझसे पहले उस गली में मेरे अफ़साने गए'।

 ~'खातिर' गज़नवी

620 वाँ मिसरा: 'मिलूँगा उस से तो गुस्सा ज़रूर उतरेगा'।

~ पवन कुमार

                                 *****^*****

 जायज़ा लीजिए अलग अलग ज़ावियों से इन मिसरों पर लगाई हुई गिरह का;

619 वें मिसरे: 'मुझसे पहले उस गली में मेरे अफ़साने गए' 

पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:


उस नगर में पोस्टिंग की न्यूज से थी खलबली 
‘मुझसे पहले उस गली में मेरे अफ़साने गए’। 1 ।
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


उसके सब भाई खड़े थे हाथ में ले हॉकियां
‘मुझसे पहले उस गली में मेरे अफ़साने गए’। 2 ।
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


खु़शबुओं के सिलसिले थे मेरी खातिर मुंतजिर 
‘मुझसे पहले उस गली में मेरे अफ़साने गए’। 3 ।
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


कुछ नहीं ये की चुहल है फेसबुक ने दोस्तो!
‘मुझसे पहले उस गली में मेरे अफ़साने गए’।
~के पी सक्सेना भारत


यार मैं तो वक़्त से पहले ही पहचाना गया
‘मुझसे पहले उस गली में मेरे अफ़साने गए’। 1 ।
~सज्जाद अख्तर भारत


हर किसी के बदले तेवर देखकर ऐसा लगा
‘मुझसे पहले उस गली में मेरे अफ़साने गए’। 2 ।
~सज्जाद अख्तर भारत


अजनबी थे हम मगर पहचान यूँ सबने लिया,
‘मुझसे पहले उस गली में मेरे अफ़साने गए’।
~अनमोल प्रकाश शुक्ला भारत 


कह रहा था वो- सगाई छह दफ़ा टूटी मेरी
‘मुझसे पहले उस गली में मेरे अफ़साने गए’। 1 ।
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत


मुझको बाद-ए-मर्ग भी छोड़ा ज़माने ने कहाँ
‘मुझसे पहले उस गली में मेरे अफ़साने गए’। 2 ।
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत


फूल मालाएँ लिए गुंडे खड़े थे सब वहाँ 
‘मुझसे पहले उस गली में मेरे अफ़साने गए’।
~मनोज अबोध भारत


शुक्रिया ! ऐ चाहने वालों, तुम्हारा शुक्रिया !
‘मुझसे पहले उस गली में मेरे अफ़साने गए’।
~मनोज अबोध भारत


वो थी रंजिश या मुहब्बत क्या बताऊँ अब तुम्हें
‘मुझसे पहले उस गली में मेरे अफ़साने गए’।
~रेनू हुसैन भारत


शायरी के सदक़े ग़ैरों ने भी पहचाना मुझे 
'मुझ से पहले उस गली में मेरे अफ़साने गये' । 1 ।
~डाॅ. आदेश त्यागी भारत


शायरी के सदक़े ग़ैरों ने भी पहचाना मुझे 
'मुझ से पहले उस गली में मेरे अफ़साने गये' । 2 ।
~डाॅ. आदेश त्यागी भारत


काम कुछ ऐसे किए हैं इसलिए ही दोस्तों 
‘मुझसे पहले उस गली में मेरे अफ़साने गए’।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया


सिर्फ़ मैं गुज़रा वहाँ से, हर कोई मुझसे मिला
‘मुझसे पहले उस गली में मेरे अफ़साने गए’।
~प्रेम बिहारी मिश्रा भारत


सोच कर हैरान हूं, हैं इतने दीवाने वहां 
‘मुझसे पहले उस गली में मेरे अफ़साने गए’।
~ममता 'किरण' भारत


हो गई हैं नाज़नीं सब यक ब यक पर्दा नशीं, 
‘मुझसे पहले उस गली में मेरे अफ़साने गए’।
~खुर्रम नूर भारत


जैसे सरगोशी हवा ने जा के चुपके से हो की,
‘मुझसे पहले उस गली में मेरे अफ़साने गए’।
~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क 


*✨*☀️**✨**


 620 वें मिसरे: 'मिलूँगा उस से तो गुस्सा ज़रूर उतरेगा'

 पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:


लिया जो वीडियो मेरा न आज तक भेजा 
‘मिलूँगा उस से तो ग़ुस्सा ज़रूर उतरेगा’। 1 ।
~लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


करूं कमेंट न लाइक मैं पोस्ट पर उसकी 
‘मिलूँगा उस से तो ग़ुस्सा ज़रूर उतरेगा’। 2 ।
~लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


बड़ी सी लिस्ट थी शॉपिंग की कुछ न ले पाया 
‘मिलूँगा उस से तो ग़ुस्सा ज़रूर उतरेगा’। 3 ।
~लक्ष्मी शंकर बाजपेई,  भारत


मैं वादा कर के भी अब तक नहीं हूं मिल पाया 
‘मिलूँगा उस से तो ग़ुस्सा ज़रूर उतरेगा’। 4 ।
~लक्ष्मी शंकर बाजपेई,  भारत


खुशी में मेरी न आया, तो रंज क्या करना
‘मिलूँगा उस से तो ग़ुस्सा ज़रूर उतरेगा’ ।
संजीव दुआ, भारत


रक़ीब ने चली है चाल जो ख़फा है वो
‘मिलूँगा उस से तो ग़ुस्सा ज़रूर उतरेगा’।
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत


यही सनम का मेरे प्यार का तरीका है 
‘मिलूँगा उस से तो ग़ुस्सा ज़रूर उतरेगा’।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया


यही तो प्यार का अंदाज़ है सनम का मेरे 
‘मिलूँगा उस से तो ग़ुस्सा ज़रूर उतरेगा’।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया


अभी तलक तो रहा दूरियों का इक पर्दा
‘मिलूँगा उस से तो ग़ुस्सा ज़रूर उतरेगा’।
~प्रज्ञा त्रिवेदी ,भारत


मैं सबके सामने रुसवा तो क्या करूं उसको
‘मिलूँगा उस से तो ग़ुस्सा ज़रूर उतरेगा’।
सज्जाद अख्तर, भारत


उसे है प्यार तो ख़फ़गी भी उस की जायज़ है 
'मिलूँगा उस से तो ग़ुस्सा ज़रूर उतरेगा' ।
आदेश त्यागी, भारत


जो दिल में है उसे दिल में ही रहने दो अब तो
‘मिलूँगा उस से तो ग़ुस्सा ज़रूर उतरेगा’।
~अकबर 'शाद' उदयपुरी, भारत


मुझे पता है ख़फ़ा है अभी वो मुझसे पर 
‘मिलूँगा उस से तो ग़ुस्सा ज़रूर उतरेगा’।
~रेनू हुसैन, भारत 


पता है फ़ोन पे देगा वो गालियॉं मुझको 
‘मिलूँगा उस से तो ग़ुस्सा ज़रूर उतरेगा’।
~ममता 'किरण', भारत


बिना बताये मुझे वो कहाँ रहा अब तक,
‘मिलूँगा उस से तो ग़ुस्सा ज़रूर उतरेगा’।
मनोज 'अबोध', भारत


सुनायेगा वो भले चिढ़ के पहले दस बातें, 
‘मिलूँगा उस से तो ग़ुस्सा ज़रूर उतरेगा’।
~ अशोक सिंह , न्यू यॉर्क 


****^*****


इस कार्यक्रम का यू-ट्यूब वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करिये:


©️सर्वाधिकार सुरक्षित। इस पोस्ट में साझा किए गए सभी गिरह के शे'र 'एक शे'र अर्ज़ किया है' पटल पर शामिल शायरों के हैं। इनमें से कोई भी शे'र शायर की लिखित पूर्व सहमति के बग़ैर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।

संपादक

~ कौसर भुट्टो, दुबई


 


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