मंगलवार, 10 मार्च 2026

311 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 7 मार्च, 2026

311 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 7 मार्च, 2026

एक‌ शे'र‌ अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित #डिजिटल_वीडियो_गोष्ठी का 311 वाँ तरही मुशायरा कार्यक्रम।

 आज का मुशायरा इन दो मिसरों पर आधारित था:

621 वाँ मिसरा: 'नाम ऐसे आपको ढेरों गिना सकता हूं मैं' । 

~ अशोक रावत


622 वाँ मिसरा: 'उसने हर बार हँस के टाल दिया' । 

~ रहमान रब्बानी

                                 *****^*****

 जायज़ा लीजिए अलग अलग ज़ावियों से इन मिसरों पर लगाई हुई गिरह का;

621 वें मिसरे:  'नाम ऐसे आपको ढेरों गिना सकता हूं मैं' 

पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:


ज़िन्दगी भर दूसरों के वास्ते जीते रहे 
'नाम ऐसे आपको ढेरों गिना सकता हूं मैं' ।
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


जिनको चिश्मिश ने अभी तक आँख भर देखा नहीं 
'नाम ऐसे आपको ढेरों गिना सकता हूं मैं' ।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया


ख़ुद से कुछ करके न खाया उम्र सारी दी बिता
'नाम ऐसे आपको ढेरों गिना सकता हूं मैं' ।
~अनमोल प्रकाश शुक्ला, भारत 


आप कहते हैं सियासत में नहीं अब दाग़दार 
'नाम ऐसे आपको ढेरों गिना सकता हूं मैं' ।
~ममता 'किरण', भारत


अच्छे-अच्छे नामवर गुमनामियों में मर गये 
'नाम ऐसे आपको ढेरों गिना सकता हूँ मैं' ।
`डा आदेश त्यागी, भारत


साथ में रहता है कोई और दिल में और है 
'नाम ऐसे आपको ढेरों गिना सकता हूं मैं' ।
~रमणी थापर, कैलिफोर्निया


पंख आए ही नहीं और दम भरें परवाज़ का
'नाम ऐसे आपको ढेरों गिना सकता हूं मैं' ।
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत


घर भरा पूरा हो फिर भी शुक्र वो करते नहीं 
'नाम ऐसे आपको ढेरों गिना सकता हूं मैं' ।
~रेनू हुसैन, भारत


हैं ख़ुदा दिखते मगर भीतर से इंसां भी नहीं
'नाम ऐसे आपको ढेरों गिना सकता हूं मैं' । 1 ।
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत


फ़ीस देंगे बाद में, ये कह दिखा दी कुंडली
'नाम ऐसे आपको ढेरों गिना सकता हूं मैं' । 2 ।
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत


जो जरा सी बात पर पाला बदल देते यहां
'नाम ऐसे आपको ढेरों गिना सकता हूँ मैं’।
~के पी सक्सेना, भारत 


जो शिखर पा कर भुला दें सीढ़ियों की भूमिका 
'नाम ऐसे आपको ढेरों गिना सकता हूं मैं' ।
~मनोज 'अबोध', भारत


छेद करते हैं उसी थाली में, जिसमें खा रहे 
'नाम ऐसे आपको ढेरों गिना सकता हूं मैं' ।
~रूबी मोहंती, भारत


दूसरों से छीन कर हक़ बन गए हैं जो ख़ुदा,
'नाम ऐसे आपको ढेरों गिना सकता हूं मैं' ।
~ आलोक अविरल


किरची किरची हो गए पर टूट कर बिखरे नहीं
'नाम ऐसे आपको ढेरों गिना सकता हूं मैं' ।
~सज्जाद अख्तर, भारत


जो बने फिरते हैं अच्छे पर हक़ीक़त में नहीं,
‘नाम ऐसे आपको ढेरों गिना सकता हूँ मैं’।
~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क 


*✨*☀️**✨**


 622 वें मिसरे: 'उसने हर बार हँस के टाल दिया' 

 पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:


मैंने जब भी उधार मांगा है 
'उसने हर बार हँस के टाल दिया' । 1 ।
~सज्जाद अख्तर, भारत


जब भी वापस उधार मांगा है 
'उसने हर बार हँस के टाल दिया' । 2 ।
~सज्जाद अख्तर, भारत


जब भी शिकवा किया तगाफुल का
'उसने हर बार हँस के टाल दिया' । 3 ।
~सज्जाद अख्तर, भारत


जब कहा घर कभी तो आ जाओ
'उसने हर बार हँस के टाल दिया' । 1 ।
~लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


छोड़ दूं घर पे अपनी गाड़ी से ..! 
'उसने हर बार हँस के टाल दिया' । 2 ।
~लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


जब भी पूछा उदासियों  का सबब
'उसने हर बार हँस के टाल दिया' । 1 ।
~प्रज्ञा त्रिवेदी ,भारत


सच्ची बत्तीसी है कि है डेन्चर?
'उसने हर बार हँस के टाल दिया' । 2 ।
~प्रज्ञा त्रिवेदी ,भारत


जब भी पूछा कि कौन है दिल में,
'उसने हर बार हँस के टाल दिया' । 
~अनमोल प्रकाश शुक्ला, भारत 


जब भी करते हैं गुजारिश, रुक जा!
'उसने हर बार हँस के टाल दिया' । 
~के पी सक्सेना, भारत 


जब भी पूछा, कहीं मिलें हम-तुम 
'उसने हर बार हँस के टाल दिया' । 
~डाॅ. आदेश त्यागी, भारत


जब भी दिल में ज़रा जगह माँगी 
‘उसने हर बार हँस के टाल दिया’।
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत


मैंने जब भी कहा कि कर लो ब्याह
'उसने हर बार हँस के टाल दिया' । 
~ममता किरण, भारत


प्रेम था फिर भी मेरे तोहफ़े को 
'उसने हर बार हँस के टाल दिया' । 
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया


ग़म भी उससे तो लाजवाब हुए 
'उसने हर बार हँस के टाल दिया' । 
~रेनू हुसैन, भारत 



मौत से जब किया सवाल कभी 
'उसने हर बार हँस के टाल दिया' । 
~मनोज 'अबोध', भारत 


हाल-चाल उसका जब भी पूछा तो,
‘उसने हर बार हँस के टाल दिया’।
~ अशोक सिंह , न्यू यॉर्क 


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इस कार्यक्रम का यू-ट्यूब वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करिये:


©️सर्वाधिकार सुरक्षित। इस पोस्ट में साझा किए गए सभी गिरह के शे'र 'एक शे'र अर्ज़ किया है' पटल पर शामिल शायरों के हैं। इनमें से कोई भी शे'र शायर की लिखित पूर्व सहमति के बग़ैर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।

संपादक

~ कौसर भुट्टो, दुबई


 


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