एक शे'र अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित #डिजिटल_वीडियो_गोष्ठी का 312 वाँ तरही मुशायरा कार्यक्रम।
आज का मुशायरा इन दो मिसरों पर आधारित था:
623 वाँ मिसरा: 'तुमको आता ही नहीं पास बुलाने का हुनर'।
~नौशीन फ़ातिमा' ।
624 वाँ मिसरा: 'चमन से ले के हमीं हसरत-ए-बहार चले'।
~ शमीम जयपुरी'
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जायज़ा लीजिए अलग अलग ज़ावियों से इन मिसरों पर लगाई हुई गिरह का;
623 वें मिसरे: 'तुमको आता ही नहीं पास बुलाने का हुनर'
पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:
उड़ के आ जाते अगर एक इशारा मिलता
'तुमको आता ही नहीं पास बुलाने का हुनर' l
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत
कैसे आते न अगर दिल से बुलाया होता!
'तुमको आता ही नहीं पास बुलाने का हुनर' l
~के पी सक्सेना, भारत
कॉफी पीने या कभी फिल्म का ऑफर देते ..!
'तुमको आता ही नहीं पास बुलाने का हुनर' l 1 l
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत
एक "खोखे" में तेरे दल में चला आऊंगा
'तुमको आता ही नहीं पास बुलाने का हुनर' l 2 l
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत
रूह बेचैन है कब दुनिया का छूटे बंधन..!
'तुमको आता ही नहीं पास बुलाने का हुनर' l 3 l
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत
तुमने सीखा ही नहीं तौर तरीका कोई
'तुमको आता ही नहीं पास बुलाने का हुनर' l 1 l
~रेनू हुसैन, भारत
इक नज़र प्यार से देखा ही कहाँ तुमने मुझे,
'तुमको आता ही नहीं पास बुलाने का हुनर' l 2 l
~रेनू हुसैन, भारत
सब किया याद ही बस कर न सके हो दिल से
'तुमको आता ही नहीं पास बुलाने का हुनर' l 1 l
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया
कहते चिश्मिश ने बुलाया है खिंचे आते हम
'तुमको आता ही नहीं पास बुलाने का हुनर' l 2 l
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया
न निहारा, न पुकारा, न इशारा ही किया
'तुमको आता ही नहीं पास बुलाने का हुनर' l
~डाॅ. आदेश त्यागी, भारत
है तुम्हारी शहे रग से भी ज़्यादा वो क़रीब
'तुमको आता ही नहीं पास बुलाने का हुनर' l
~सज्जाद अख्तर, भारत
कम नहीं खुशियाँ यहाँ रंगी ज़माना है बहुत
'तुमको आता ही नहीं पास बुलाने का हुनर' l
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत
कोरे वादों पे चला आता निकट कैसे वो
'तुमको आता ही नहीं पास बुलाने का हुनर' l
~रूबी मोहंती, भारत
बोली चिड़िया यहां कुछ दाने तो डाले होते
'तुमको आता ही नहीं पास बुलाने का हुनर' l
~ममता 'किरण', भारत
जो भी आता है करीब आके पलट जाता है
'तुमको आता ही नहीं पास बुलाने का हुनर' l
~नितिन उपाध्ये, यूएई
दूर ही दूर से उकसाना भले सीख लिया,
‘तुमको आता ही नहीं पास बुलाने का हुनर’।
~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क
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624 वें मिसरे: 'चमन से ले के हमीं हसरत-ए-बहार चले'
पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:
था वक़्त, हम से ही जश्न-ए-बहारां होता था
'चमन से ले के हमीं हसरत-ए-बहार चले' ।
~डाॅ. आदेश त्यागी, भारत
हमीं रहे हैं दुआगो ख़िज़ाँ के मौसम में
‘चमन से ले के हमीं हसरत-ए-बहार चले’।
~सज्जाद अख्तर, भारत
हज़ार ख़्वाब लिए हम चमन में उतरे थे,
‘चमन से ले के हमीं हसरत-ए-बहार चले’।
~अकबर शाद, भारत
कहाँ मिलेगी भला अब बहार-ए-ताज़ा-चमन
‘चमन से ले के हमीं हसरत-ए-बहार चले’।
~संजीव दुआ, भारत
न अब हमीं से ये पतझड़ फुदक के दे दस्तक
‘चमन से ले के हमीं हसरत-ए-बहार चले’।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया
चमन सजाया हमीं ने था हुस्न का, फिर भी
‘चमन से ले के हमीं हसरत-ए-बहार चले’।
~मनोज 'अबोध', भारत
था उसका आरिज़ ए गुलरंग हमसे ही लेक़िन
‘चमन से ले के हमीं हसरत-ए-बहार चले’।
~प्रज्ञा त्रिवेदी ,भारत
हमीं थे आगे इसी बाग़बॉ को लाने में
‘चमन से ले के हमीं हसरत-ए-बहार चले’।
~ममता किरण, भारत
हमीं ने जान लुटा दी बहार लाने में और
‘चमन से ले के हमीं हसरत-ए-बहार चले’।
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत
हमीं थे बाग़बाँ हम से ही था फ़रोग़े चमन,
‘चमन से ले के हमीं हसरत-ए-बहार चले’।
~खुर्रम नूर, भारत
तमाम उम्र लगा दी चमन सजाने में
'चमन से ले के हमीं हसरत-ए-बहार चले' ।
~नितिन उपाध्ये, यूएई
हमीं में बा'इस-ए-हैजान जब रहा न कोई,
‘चमन से ले के हमीं हसरत-ए-बहार चले’।
*बा'इस-ए-हैजान =जोश, उबाल का कारण
~ अशोक सिंह , न्यू यॉर्क
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इस कार्यक्रम का यू-ट्यूब वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करिये:
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संपादक
~ कौसर भुट्टो, दुबई
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