बुधवार, 18 मार्च 2026

312 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 14 मार्च, 2026

312 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 14 मार्च, 2026

एक‌ शे'र‌ अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित #डिजिटल_वीडियो_गोष्ठी का 312 वाँ तरही मुशायरा कार्यक्रम।

 आज का मुशायरा इन दो मिसरों पर आधारित था:

623 वाँ मिसरा: 'तुमको आता ही नहीं पास बुलाने का हुनर'।

~नौशीन फ़ातिमा' । 


624 वाँ मिसरा: 'चमन से ले के हमीं हसरत-ए-बहार चले'।

 ~ शमीम जयपुरी' 


                                 *****^*****

 जायज़ा लीजिए अलग अलग ज़ावियों से इन मिसरों पर लगाई हुई गिरह का;

623 वें मिसरे: 'तुमको आता ही नहीं पास बुलाने का हुनर' 

पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:


उड़ के आ जाते अगर एक इशारा मिलता
'तुमको आता ही नहीं पास बुलाने का हुनर' l
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत


कैसे आते न अगर दिल से बुलाया होता!
'तुमको आता ही नहीं पास बुलाने का हुनर' l
~के पी सक्सेना, भारत 


कॉफी पीने या कभी फिल्म का ऑफर देते ..! 
'तुमको आता ही नहीं पास बुलाने का हुनर' l 1 l
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


एक "खोखे" में तेरे दल में चला आऊंगा 
'तुमको आता ही नहीं पास बुलाने का हुनर' l 2 l
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


रूह बेचैन है कब दुनिया का छूटे बंधन..!
'तुमको आता ही नहीं पास बुलाने का हुनर' l 3 l
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


तुमने सीखा ही नहीं तौर तरीका कोई 
'तुमको आता ही नहीं पास बुलाने का हुनर' l 1 l
~रेनू हुसैन, भारत


इक नज़र प्यार से देखा ही कहाँ तुमने मुझे, 
'तुमको आता ही नहीं पास बुलाने का हुनर' l 2 l
~रेनू हुसैन, भारत


सब किया याद ही बस कर न सके हो दिल से 
'तुमको आता ही नहीं पास बुलाने का हुनर' l 1 l
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया


कहते चिश्मिश ने बुलाया है खिंचे आते हम 
'तुमको आता ही नहीं पास बुलाने का हुनर' l 2 l
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया


न निहारा, न पुकारा, न इशारा ही किया 
'तुमको आता ही नहीं पास बुलाने का हुनर' l
~डाॅ. आदेश त्यागी, भारत


है तुम्हारी शहे रग से भी ज़्यादा वो क़रीब 
'तुमको आता ही नहीं पास बुलाने का हुनर' l
~सज्जाद अख्तर, भारत


कम नहीं खुशियाँ यहाँ रंगी ज़माना है बहुत 
'तुमको आता ही नहीं पास बुलाने का हुनर' l
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत


कोरे वादों पे चला आता निकट कैसे वो 
'तुमको आता ही नहीं पास बुलाने का हुनर' l
~रूबी मोहंती, भारत


बोली चिड़िया यहां कुछ दाने तो डाले होते
'तुमको आता ही नहीं पास बुलाने का हुनर' l
~ममता 'किरण', भारत


जो भी आता है करीब आके पलट जाता है
'तुमको आता ही नहीं पास बुलाने का हुनर' l
~नितिन उपाध्ये,  यूएई


दूर ही दूर से उकसाना भले सीख लिया, 
‘तुमको आता ही नहीं पास बुलाने का हुनर’।
~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क 


*✨*☀️**✨**


 624 वें मिसरे: 'चमन से ले के हमीं हसरत-ए-बहार चले' 

 पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:


था वक़्त, हम से ही जश्न-ए-बहारां होता था 
'चमन से ले के हमीं हसरत-ए-बहार चले' ।
~डाॅ. आदेश त्यागी, भारत


हमीं रहे हैं दुआगो ख़िज़ाँ के मौसम में 
‘चमन से ले के हमीं हसरत-ए-बहार चले’।
~सज्जाद अख्तर, भारत


हज़ार ख़्वाब लिए हम चमन में उतरे थे,
‘चमन से ले के हमीं हसरत-ए-बहार चले’।
~अकबर शाद, भारत 


कहाँ मिलेगी भला अब बहार-ए-ताज़ा-चमन
‘चमन से ले के हमीं हसरत-ए-बहार चले’।
~संजीव दुआ, भारत


न अब हमीं से ये पतझड़ फुदक के दे दस्तक 
‘चमन से ले के हमीं हसरत-ए-बहार चले’।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया


चमन सजाया हमीं ने था हुस्न का, फिर भी 
‘चमन से ले के हमीं हसरत-ए-बहार चले’।
~मनोज 'अबोध', भारत 


था उसका आरिज़ ए गुलरंग हमसे ही लेक़िन
‘चमन से ले के हमीं हसरत-ए-बहार चले’।
~प्रज्ञा त्रिवेदी ,भारत


हमीं थे आगे इसी बाग़बॉ को लाने में 
‘चमन से ले के हमीं हसरत-ए-बहार चले’।
~ममता किरण, भारत


हमीं ने जान लुटा दी बहार लाने में और
‘चमन से ले के हमीं हसरत-ए-बहार चले’।
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत


हमीं थे बाग़बाँ हम से ही था फ़रोग़े चमन,
‘चमन से ले के हमीं हसरत-ए-बहार चले’।
~खुर्रम नूर, भारत


तमाम उम्र लगा दी चमन सजाने में
'चमन से ले के हमीं हसरत-ए-बहार चले' ।
~नितिन उपाध्ये, यूएई


हमीं में बा'इस-ए-हैजान जब रहा न कोई,
‘चमन से ले के हमीं हसरत-ए-बहार चले’।
*बा'इस-ए-हैजान =जोश, उबाल का कारण
~ अशोक सिंह , न्यू यॉर्क 


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इस कार्यक्रम का यू-ट्यूब वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करिये:


©️सर्वाधिकार सुरक्षित। इस पोस्ट में साझा किए गए सभी गिरह के शे'र 'एक शे'र अर्ज़ किया है' पटल पर शामिल शायरों के हैं। इनमें से कोई भी शे'र शायर की लिखित पूर्व सहमति के बग़ैर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।

संपादक

~ कौसर भुट्टो, दुबई


 


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