एक शे'र अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित #डिजिटल_वीडियो_गोष्ठी का 313 वाँ तरही मुशायरा कार्यक्रम।
आज का मुशायरा इन दो मिसरों पर आधारित था:
625 वाँ मिसरा: 'मेरी आँखों में कई गुज़रे ज़माने आए' ।
~ गोविंद गुलशन'
626 वाँ मिसरा: 'मैं भी अपने ज़ख़्म छुपाने वाला था'।
~ परवीन कुमार अश्क़।
*****^*****
जायज़ा लीजिए अलग अलग ज़ावियों से इन मिसरों पर लगाई हुई गिरह का;
625 वें मिसरे: 'मेरी आँखों में कई गुज़रे ज़माने आए '
पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:
फिल्म हो जैसे कोई.. तेरी पुरानी चिठ्ठी..!
‘मेरी आँखों में कई गुज़रे ज़माने आए’।
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत
उसने पूछा मुझे तुम कौन मेरे लगते हो
‘मेरी आँखों में कई गुज़रे ज़माने आए’।
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत
उस हवेली पे पड़े ज्यों ही क़दम थे मेरे
‘मेरी आँखों में कई गुज़रे ज़माने आए’।
~ममता 'किरण', भारत
पार्क से प्यार में डूबा हुआ जोङा निकला,
‘मेरी आँखों में कई गुज़रे ज़माने आए’।
~अनमोल प्रकाश शुक्ला, भारत
लौट परदेस से छूते ही वतन की सरहद।
‘मेरी आँखों में कई गुज़रे ज़माने आए’।
~के पी सक्सेना, भारत
जब भी आया है तेरा ज़िक्र किसी महफ़िल में
‘मेरी आँखों में कई गुज़रे ज़माने आए’।
~सज्जाद अख्तर, भारत
एक यादों का बवण्डर मेरे दिल से गुज़रा
'मेरी आँखों में कई गुज़रे ज़माने आये' ।
~डाॅ. आदेश त्यागी, भारत
तुझको देखा जो अचानक मैंने तस्वीरों में
‘मेरी आँखों में कई गुज़रे ज़माने आए’।
~रेनू हुसैन, भारत
तेरी यादों ने जो दिल पर कभी दस्तक दी तो
‘मेरी आँखों में कई गुज़रे ज़माने आए’।
~अकबर शाद, भारत
बादलों को उड़ा कर ले गई जब कोई हवा
मेरी आँखों में कई गुज़रे ज़माने आए’।
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत
हूबहू तुझसी नज़र आई थी कल सड़कों पर
मेरी आँखों में कई गुज़रे ज़माने आए’।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया
मुद्दतों बाद दिखा फ़ोन में उसका नम्बर
मेरी आँखों में कई गुज़रे ज़माने आए’।
~मनोज 'अबोध', भारत
एक तूफ़ान उठा, धूल उड़ी चौतरफ़ा
मेरी आँखों में कई गुज़रे ज़माने आए’।
~रूबी मोहंती, भारत
उसकी तस्वीर पुरानी मिली संदूक में तो,
मेरी आँखों में कई गुज़रे ज़माने आए’।
~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क
*✨*☀️**✨**
626 वें मिसरे: 'मैं भी अपने ज़ख़्म छुपाने वाला था'।
पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह
उससे मिलकर बांध ज़ब्त का टूट गया
'मैं भी अपने ज़ख़्म छुपाने वाला था'।
~लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत
क्या करता दिखलाकर आखिर दुनिया को,
'मैं भी अपने ज़ख़्म छुपाने वाला था'।
~अनमोल प्रकाश शुक्ला, भारत
तुमने भी तो ज़ब्त किये थे अपने ग़म
'मैं भी अपने ज़ख़्म छुपाने वाला था'।
~के पी सक्सेना, भारत
उस ने भी ख़ुद दुख की पर्दादारी की
'मैं भी अपने ज़ख़्म छुपाने वाला था' l
~डाॅ. आदेश त्यागी, भारत
वह अपना दर्द बताते झिझक रही थी
'मैं भी अपने ज़ख़्म छुपाने वाला था'।
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत
उससे मिलने की चाहत में मुद्दत बाद
'मैं भी अपने ज़ख़्म छुपाने वाला थी '।
~ममता किरण, भारत
पगली अपना प्रेम छुपाने वाली थी,.
'मैं भी अपने ज़ख़्म छुपाने वाला था'।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया
वह अपना दर्द बताते झिझक रही थी
'मैं भी अपने ज़ख़्म छुपाने वाला था'।
प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत
वो ही क्या चिंतित था अपनी चोटों से
'मैं भी अपने ज़ख़्म छुपाने वाला था'।
~मनोज 'अबोध', भारत
वो तो ख़ुशी छुपाए बैठा था अपनी,
‘मैं भी अपने ज़ख़्म छुपाने वाला था’।
~ अशोक सिंह , न्यू यॉर्क
****^*****
इस कार्यक्रम का यू-ट्यूब वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करिये:
©️सर्वाधिकार सुरक्षित। इस पोस्ट में साझा किए गए सभी गिरह के शे'र 'एक शे'र अर्ज़ किया है' पटल पर शामिल शायरों के हैं। इनमें से कोई भी शे'र शायर की लिखित पूर्व सहमति के बग़ैर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।
संपादक
~ कौसर भुट्टो, दुबई
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें