एक शे'र अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित #डिजिटल_वीडियो_गोष्ठी का 314 वाँ तरही मुशायरा कार्यक्रम।
आज का मुशायरा इन दो मिसरों पर आधारित था:
627 वाँ मिसरा: 'सारे जहाँ दर्द हमारे जिगर में है' ।
~अमीर' मीनाई
628 वाँ मिसरा: 'इंकार के पर्दे में इकरार नज़र आए'।
~ महेश चंद्र नक़्श' ।
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जायज़ा लीजिए अलग अलग ज़ावियों से इन मिसरों पर लगाई हुई गिरह का;
627۔वें मिसरे: 'सारे जहाँ दर्द हमारे जिगर में है'
पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:
बम फोड़ते हैं दुनिया में और बोलते हैं ये,
'सारे जहां का दर्द हमारे जिगर में है'।
~डॉ. आदेश त्यागी, भारत
हर इक सितम को हँस के ही सहते रहे हैं हम,
‘सारे जहाँ का दर्द हमारे जिगर में है’।
~अक़बर शाद उदयपुरी, भारत
जज़्बात की हदों के तो क़ाइल नहीं हैं हम,
‘सारे जहाँ का दर्द हमारे जिगर में है’।
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत
अपने ही ज़ख़्म का नहीं एहसास है कोई,
‘सारे जहाँ का दर्द हमारे जिगर में है’।
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत
आकर जरा करीब कभी देखिए यहां
'सारे जहाँ का दर्द हमारे जिगर में है' ।
~नितीन उपाध्ये, दुबई
महसूस हो रहा है हमें हर किसी का ग़म,
‘सारे जहाँ का दर्द हमारे जिगर में है’।
~कौसर भुट्टो, दुबई
मअ'नी समझते दुनिया में यास-ओ-अलम के हम,
‘सारे जहाँ का दर्द हमारे जिगर में है’।
~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क
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628 वें मिसरे: ‘इंकार के पर्दे में इक़रार नज़र आए'
पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:
ये साफ़ इशारे हैं वो जंग को रोकेंगे
‘इंकार के पर्दे में इक़रार नज़र आए’। 1 l
~लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत
मायूसियां थीं बेहद फिर वो कुछ ऐसे बोला
‘इंकार के पर्दे में इक़रार नज़र आए’। 2 l
~लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत
पूछो न कोई हम से दीवानगी का आलम
‘इंकार के पर्दे में इक़रार नज़र आए’।
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत
उश्शाक़ दुआ गो हैं, माशूक़ करे कुछ यूँ
'इंकार के पर्दे में इक़रार नज़र आये' ।
~डाॅ. आदेश त्यागी, भारत
ऐ मेरे ख़ुदा मुझको, इक ऐसी नज़र दे दे
‘इंकार के पर्दे में इक़रार नज़र आए’। 1 l
~सज्जाद अख्तर, भारत
ऐसा भी हुआ अक्सर, जब वक़्त ने करवट ली
‘इंकार के पर्दे में इक़रार नज़र आए’। 2 l
~सज्जाद अख्तर, भारत
इस दर्ज़ा भरोसा है उनपे हमे क्या कीजे
‘इंकार के पर्दे में इक़रार नज़र आए’।
~प्रज्ञा त्रिवेदी ,भारत
कुछ ऐसे तरीक़े से मुझको ये ख़बर देना
‘इंकार के पर्दे में इक़रार नज़र आए’।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया
लब कुछ न कहें चाहे,आंखों की शरारत ही,
‘इंकार के पर्दे में इक़रार नज़र आए’।
~अनमोल प्रकाश शुक्ला, भारत
उनको ही नवाज़ा है मौला ने हुनर ये भी!
‘इंकार के पर्दे में इक़रार नज़र आए’।
~के पी सक्सेना, भारत
वो बात ही करते हैं कुछ ऐसे इशारों में
‘इंकार के पर्दे में इक़रार नज़र आए’।
~मनोज 'अबोध', भारत
इस दौर में भी “रूबी” हैं लोग बहुत जिनको
‘इंकार के पर्दे में इक़रार नज़र आए’।
~रूबी मोहंती, भारत
ख़ुशफ़हमियों की हद है, इन प्यार में अंधों को,
‘इंकार के पर्दे में इक़रार नज़र आए’।
~खुर्रम नूर भारत
होंठों पे तबस्सुम है, रुख़सार पे है लाली
‘इंकार के पर्दे में इक़रार नज़र आए’।
~रेनू हुसैन, भारत
ख़ुशफ़हमियों की हद है,हम प्यार में डूबों को-
‘इंकार के पर्दे में इक़रार नज़र आए’।
~खुर्रम नूर, भारत
देखो तो अदा उसकी देखे है हमें कैसे
‘इंकार के पर्दे में इक़रार नज़र आए’।
~आलोक अविरल, भारत
देख जो पलट कर वो हल्की सी हया करना,
‘इंकार के पर्दे में इक़रार नज़र आए’।
~कौसर भुट्टो, दुबई
सच हो कि ग़लतफ़हमी ख़ुश हैं वो इसी में ही,
‘इंकार के पर्दे में इक़रार नज़र आए’।
~ अशोक सिंह , न्यू यॉर्क
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संपादक
~ कौसर भुट्टो, दुबई
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