मंगलवार, 31 मार्च 2026

314 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 28 मार्च , 2026

314 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 28 मार्च , 2026

एक‌ शे'र‌ अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित #डिजिटल_वीडियो_गोष्ठी का  314 वाँ तरही मुशायरा कार्यक्रम।

 आज का मुशायरा इन दो मिसरों पर आधारित था:

 627 वाँ मिसरा: 'सारे जहाँ दर्द हमारे जिगर में है' । 

~अमीर' मीनाई


628 वाँ मिसरा: 'इंकार के पर्दे में इकरार नज़र आए'।

~ महेश चंद्र नक़्श' । 


                                 *****^*****


 जायज़ा लीजिए अलग अलग ज़ावियों से इन मिसरों पर लगाई हुई गिरह का;

627۔वें मिसरे:  'सारे जहाँ दर्द हमारे जिगर में है'

पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:


बम फोड़ते हैं दुनिया में और बोलते हैं ये, 
'सारे जहां का दर्द हमारे जिगर में है'।
~डॉ. आदेश त्यागी, भारत


हर इक सितम को हँस के ही सहते रहे हैं हम,
‘सारे जहाँ का दर्द हमारे जिगर में है’।
~अक़बर शाद उदयपुरी, भारत 


जज़्बात की हदों के तो क़ाइल नहीं हैं हम,
‘सारे जहाँ का दर्द हमारे जिगर में है’।
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत


अपने ही ज़ख़्म का नहीं एहसास है कोई,
‘सारे जहाँ का दर्द हमारे जिगर में है’।
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत


आकर जरा करीब कभी देखिए यहां 
'सारे जहाँ का दर्द हमारे जिगर में है' ।
~नितीन उपाध्ये, दुबई


महसूस हो रहा है हमें हर किसी का ग़म,
‘सारे जहाँ का दर्द हमारे जिगर में है’।
~कौसर भुट्टो, दुबई


मअ'नी समझते दुनिया में यास-ओ-अलम के हम,
‘सारे जहाँ का दर्द हमारे जिगर में है’।
~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क 


*✨*☀️**✨**


 628 वें मिसरे: ‘इंकार के पर्दे में इक़रार नज़र आए'

 पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:


ये साफ़ इशारे हैं वो जंग को रोकेंगे 
‘इंकार के पर्दे में इक़रार नज़र आए’। 1 l
~लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


मायूसियां थीं बेहद फिर वो कुछ ऐसे बोला
‘इंकार के पर्दे में इक़रार नज़र आए’। 2 l
~लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


पूछो न कोई हम से दीवानगी का आलम 
‘इंकार के पर्दे में इक़रार नज़र आए’।
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत


उश्शाक़ दुआ गो हैं, माशूक़ करे कुछ यूँ 
'इंकार के पर्दे में इक़रार नज़र आये' ।
~डाॅ. आदेश त्यागी, भारत


ऐ मेरे ख़ुदा मुझको, इक ऐसी नज़र दे दे
‘इंकार के पर्दे में इक़रार नज़र आए’। 1 l
~सज्जाद अख्तर, भारत


ऐसा भी हुआ अक्सर, जब वक़्त ने करवट ली
‘इंकार के पर्दे में इक़रार नज़र आए’। 2 l
~सज्जाद अख्तर, भारत


इस दर्ज़ा भरोसा है उनपे हमे क्या कीजे
‘इंकार के पर्दे में इक़रार नज़र आए’।
~प्रज्ञा त्रिवेदी ,भारत


कुछ ऐसे तरीक़े से मुझको ये ख़बर देना 
‘इंकार के पर्दे में इक़रार नज़र आए’।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया


लब कुछ न कहें चाहे,आंखों की शरारत ही,
‘इंकार के पर्दे में इक़रार नज़र आए’।
~अनमोल प्रकाश शुक्ला, भारत 


उनको ही नवाज़ा है मौला ने हुनर ये भी!
‘इंकार के पर्दे में इक़रार नज़र आए’।
~के पी सक्सेना, भारत 


वो बात ही करते हैं कुछ ऐसे इशारों में 
‘इंकार के पर्दे में इक़रार नज़र आए’।
~मनोज 'अबोध', भारत 


इस दौर में भी “रूबी” हैं लोग बहुत जिनको 
‘इंकार के पर्दे में इक़रार नज़र आए’।
~रूबी मोहंती, भारत


ख़ुशफ़हमियों की हद है, इन प्यार में अंधों को,
‘इंकार के पर्दे में इक़रार नज़र आए’।
~खुर्रम नूर भारत


होंठों पे तबस्सुम है, रुख़सार पे है लाली
 ‘इंकार के पर्दे में इक़रार नज़र आए’।
~रेनू हुसैन, भारत 


ख़ुशफ़हमियों की हद है,हम प्यार में डूबों को- 
‘इंकार के पर्दे में इक़रार नज़र आए’।
~खुर्रम नूर, भारत 


देखो तो अदा उसकी देखे है हमें कैसे
‘इंकार के पर्दे में इक़रार नज़र आए’।
~आलोक अविरल, भारत


देख जो पलट कर वो हल्की सी हया करना,
‘इंकार के पर्दे में इक़रार नज़र आए’।
~कौसर भुट्टो, दुबई 


सच हो कि ग़लतफ़हमी ख़ुश हैं वो इसी में ही,
‘इंकार के पर्दे में इक़रार नज़र आए’।
~ अशोक सिंह , न्यू यॉर्क 


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इस कार्यक्रम का यू-ट्यूब वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करिये:


©️सर्वाधिकार सुरक्षित। इस पोस्ट में साझा किए गए सभी गिरह के शे'र 'एक शे'र अर्ज़ किया है' पटल पर शामिल शायरों के हैं। इनमें से कोई भी शे'र शायर की लिखित पूर्व सहमति के बग़ैर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।

संपादक

~ कौसर भुट्टो, दुबई


 


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