एक शे'र अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित #डिजिटल_वीडियो_गोष्ठी का 315 वाँ तरही मुशायरा कार्यक्रम।
आज का मुशायरा इन दो मिसरों पर आधारित था:
629 वाँ मिसरा: 'देखने वाले अगर बाज़ार से आगे बढ़ें'।
~ मधुवेश' ।
630 वाँ मिसरा: 'खुशबू तुम्हारी जुल्फ़ की फूलों से कम नहीं ।
~ अज्ञात' ।
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जायज़ा लीजिए अलग अलग ज़ावियों से इन मिसरों पर लगाई हुई गिरह का;
629 वें मिसरे: 'देखने वाले अगर बाज़ार से आगे बढ़ें'
पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:
दृश्य मेरे मुल्क में भी हैं ग़रीबी से इतर
'देखने वाले अगर बाज़ार से आगे बढ़ें'।
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत
ऑन लाइन से बहुत सामान सस्ता मिल रहा,
'देखने वाले अगर बाज़ार से आगे बढ़ें'।
~अनमोल प्रकाश शुक्ला, भारत
हम भी दिख जाएँगे जिसको भूल पाएँगे नहीं
'देखने वाले अगर बाज़ार से आगे बढ़ें'।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया
सामने नुक्कड़ पे दिख जाएँगे ईमां बेचते
'देखने वाले अगर बाज़ार से आगे बढ़ें'।
~मनोज 'अबोध', भारत
पटरियों पर इस से बेहतर, इस से सस्ता माल है
'देखने वाले अगर बाज़ार से आगे बढ़ें'।
~डाॅ. आदेश त्यागी, भारत
हट के अब बाजार से भी हैं सुलभ चीजें बहुत!
'देखने वाले अगर बाज़ार से आगे बढ़ें'।
~के पी सक्सेना, भारत
ख़ूब गहरे रिश्ते भी ज़िंदा हैं बिन उपहार के
'देखने वाले अगर बाज़ार से आगे बढ़ें'।
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत
सिर्फ़ सौदे ही नहीं है ज़िंदगी की राह में
'देखने वाले अगर बाज़ार से आगे बढ़ें'।
~डॉ० भावना कुँअर, ऑस्ट्रेलिया
फूल, तितली, पेड़, चिड़िया, चांद, तारे कितना कुछ
'देखने वाले अगर बाज़ार से आगे बढ़ें'।
~ममता 'किरण', भारत
क़ीमतें बाज़ारू आ जाएँ ठिकाने पर अभी,
‘देखने वाले अगर बाज़ार से आगे बढ़ें’।
~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क
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630 वें मिसरे: 'ख़ुशबू तुम्हारी जुल्फ़ की फूलों से कम नहीं ।'
पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:
आलम हुआ है खुशनुमां गुज़रे इधर से तुम
'ख़ुशबू तुम्हारी जुल्फ़ की फूलों से कम नहीं । 1 l
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत
तितली हर इक चमन से आई है दौड़ कर
'ख़ुशबू तुम्हारी जुल्फ़ की फूलों से कम नहीं । 2 l
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत
मदहोश कर दिया हमें आए जो पास तुम
'ख़ुशबू तुम्हारी जुल्फ़ की फूलों से कम नहीं । 3 l
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत
महका है रेशा-रेशा गुज़रे जिधर से तुम
'ख़ुशबू तुम्हारी जुल्फ़ की फूलों से कम नहीं । 4 l
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत
ये विग हमें उतार के गर हो सके तो दें,
'ख़ुशबू तुम्हारी जुल्फ़ की फूलों से कम नहीं । 1 l
~अनमोल प्रकाश शुक्ला, भारत
इस तेल का तो नाम बताओ मुझे डियर,
'ख़ुशबू तुम्हारी जुल्फ़ की फूलों से कम नहीं । 2 l
~अनमोल प्रकाश शुक्ला, भारत
मधुमक्खियों का झुंड न ले घेर तुमको भी
'ख़ुशबू तुम्हारी जुल्फ़ की फूलों से कम नहीं । 3 l
~अनमोल प्रकाश शुक्ला, भारत
तुम आये तो ये पूरी ही महफ़िल महक गयी
'ख़ुशबू तुम्हारी जुल्फ़ की फूलों से कम नहीं । 1 l
~ममता किरण, भारत
तुम आये तो ये पूरी फ़ज़ा ही महक गयी
'ख़ुशबू तुम्हारी जुल्फ़ की फूलों से कम नहीं । 2 l
~ममता किरण, भारत
कहीं ये न हो, तलाश में भँवरे निकल पड़ें
'ख़ुशबू तुम्हारी जुल्फ़ की फूलों से कम नहीं ।
~डाॅ. आदेश त्यागी, भारत
माना कि फूल फूल है, है उसकी अहमियत
'ख़ुशबू तुम्हारी जुल्फ़ की फूलों से कम नहीं ।
~के पी सक्सेना, भारत
खा जाएँ एकबारगी धोखा ही तितलियाँ
'ख़ुशबू तुम्हारी जुल्फ़ की फूलों से कम नहीं ।
~प्रज्ञा त्रिवेदी ,भारत
तुमको कहाँ है इत्र की दरकार जान-ए-जां
'ख़ुशबू तुम्हारी जुल्फ़ की फूलों से कम नहीं ।
~प्रज्ञा त्रिवेदी ,भारत
महके हैं रुख़ हवाओं के भी साथ में तभी
'ख़ुशबू तुम्हारी जुल्फ़ की फूलों से कम नहीं ।
~डॉ० भावना कुँअर
इक बार मुस्कुरा के इधर तुम जो देख लो,
'ख़ुशबू तुम्हारी जुल्फ़ की फूलों से कम नहीं ।
~अकबर शाद, भारत
इस बार की तो भँवरे भी तस्दीक़ कर रहे
'ख़ुशबू तुम्हारी जुल्फ़ की फूलों से कम नहीं । 1 l
~दिगंबर नासवा, मलेशिया
जूड़े को तुमने किस से सजाया था कल सनम
'ख़ुशबू तुम्हारी जुल्फ़ की फूलों से कम नहीं । 2 l
~दिगंबर नासवा, मलेशिया
बाँहों में भर के मुझको,कहा उसने प्यार से
'ख़ुशबू तुम्हारी जुल्फ़ की फूलों से कम नहीं ।
~ रूबी मोहंती, भारत
मंडरा रहे हैं भंवरे शहद की तलाश में
'ख़ुशबू तुम्हारी जुल्फ़ की फूलों से कम नहीं ।
~सज्जाद अख्तर, भारत
बिस्मिल है ये फ़िज़ा भी तुम्हारे जमाल से
‘ख़ुशबू तुम्हारी ज़ुल्फ़ की फूलों से कम नहीं’। 1 l
~रेनू हुसैन, भारत
क्या ही लगाओ फूल अपने गेसुओं में तुम
‘ख़ुशबू तुम्हारी ज़ुल्फ़ की फूलों से कम नहीं’। 2 l
~रेनू हुसैन, भारत
छाईं जो मेरे रुख़ पे तो महसूस यूँ हुआ-
'ख़ुशबू तुम्हारी जुल्फ़ की फूलों से कम नहीं ।
~खुर्रम नूर भारत
आँसुओं के फ़्रेम भी रक्खे दिखेंगे कुछ वहाँ
'ख़ुशबू तुम्हारी जुल्फ़ की फूलों से कम नहीं ।
~मनोज 'अबोध', भारत
रुखसार का ये रंग है कुदरत का मोज़िज़ा
‘ख़ुशबू तुम्हारी ज़ुल्फ़ की फूलों से कम नहीं’।
~कौसर भुट्टो, दुबई
गजरा चमेली बेला लगाओ भी किसलिए,
‘ख़ुशबू तुम्हारी ज़ुल्फ़ की फूलों से कम नहीं’। 1 l
~ अशोक सिंह , न्यू यॉर्क
होंठों पे जैसे कलियों की मुस्कान खिल रही,
‘ख़ुशबू तुम्हारी ज़ुल्फ़ की फूलों से कम नहीं’। 2 l
~ अशोक सिंह , न्यू यॉर्क
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इस कार्यक्रम का यू-ट्यूब वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करिये:
©️सर्वाधिकार सुरक्षित। इस पोस्ट में साझा किए गए सभी गिरह के शे'र 'एक शे'र अर्ज़ किया है' पटल पर शामिल शायरों के हैं। इनमें से कोई भी शे'र शायर की लिखित पूर्व सहमति के बग़ैर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।
संपादक
~ कौसर भुट्टो, दुबई
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