एक शे'र अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित #डिजिटल_वीडियो_गोष्ठी का 296 वाँ तरही मुशायरा कार्यक्रम।
आज का मुशायरा इन दो मिसरों पर आधारित था:
591 वाँ मिसरा: 'लुत्फ़ ये है कि हमें याद न आया कोई ।
~ नासिर काज़मी
592 वाँ मिसरा: 'पर सभी का तो घर नहीं होता'।
~ रंजना वर्मा
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जायज़ा लीजिए अलग अलग ज़ावियों से इन मिसरों पर लगाई हुई गिरह का;
591 वें मिसरे: 'लुत्फ़ ये है कि हमें याद न आया कोई'
पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:
आठवीं बार किया इश्क़ तो कुछ गिल्ट तो था,
'लुत्फ़ ये है कि हमें याद न आया कोई' । 1।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया
खा लिए और किए ढेर सितम जीवन भर ,
'लुत्फ़ ये है कि हमें याद न आया कोई' । 2 ।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया
हमने खा के वो बड़ा केक जो सल्टाया था,
'लुत्फ़ ये है कि हमें याद न आया कोई' । 1 ।
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत
उसने पूछा रहा कैसा ये सफ़र , हमने कहा,
'लुत्फ़ ये है कि हमे याद न आया कोई' । 2 ।
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत
याद आ जाते सितम तेरे, दुखाते दिल को,
'लुत्फ़ ये है कि हमें याद न आया कोई'।
~खुर्रम नूर, भारत
पाप जब पूछे फ़रिश्ते ने रोज़ ए महशर,
'लुत्फ़ ये है कि हमें याद न आया कोई' ।
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत
याद के प्रेत डसेंगे था यही डर लेकिन
‘लुत्फ़ ये है कि हमें याद न आया कोई’ ।
~ मनोज अबोध, भारत
कौन हमसे भी बुरा है ये जो सोचा हमने,
'लुत्फ़ ये है कि हमें याद न आया कोई ।
~ आलोक अविरल, भारत
खुद-नशीनी का भी अपना ही मज़ा है यारो,
'लुत्फ ये है कि हमें याद न आया कोई' ।
कौसर भुट्टो, दुबई
तन्हा जीने में मिले दर्द हज़ारों लेकिन,
‘लुत्फ़ ये है कि हमें याद न आया कोई’।
~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क
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592 वें मिसरे: 'पर सभी का तो घर नहीं होता'
पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:
आ उतरती है बालों में चाँदी,
'पर सभी का तो घर नहीं होता' ।
~रूबी मोहंती, भारत
जिस्म के साथ रूह थकती है,
'पर सभी का तो घर नहीं होता' ।
~ अकबर शाद 'उदयपुरी', भारत
आसमाँ होता है जमीं होती,
'पर सभी का तो घर नहीं होता' ।
~शिव मोहन सिंह, कजाकिस्तान
है तलब उनको घर बुलाने की,
पर सभी का तो घर नहीं होता’ ।
~के पी सक्सेना, भारत
घर तो सबसे बड़ी ज़रूरत है
'पर सभी का तो घर नहीं होता' ।
~ सज्जाद अख्तर ,भारत
जिस्म है इक मकाँ किराये का
‘पर सभी का तो घर नहीं होता’।
~मधु शर्मा, अमेरिका
कब से बेघर हैं प्यार, नेकी, वफ़ा..!
'पर सभी का तो घर नहीं होता..!' 1 ।
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत
ढूंढें अशआर कितने ही मफ़हूम
'पर सभी का तो घर नहीं होता' । 2 ।
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत
है ये मुमकिन मकां बने सबका,
'पर सभी का तो 'घर' नहीं होता' ।
~प्रज्ञा त्रिवेदी ,भारत
यूँ ठिकाना सभी का होता है
'पर सभी का तो घर नहीं होता' ।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया
एक सपना है घर बनाना भी,
'पर सभी का तो घर नहीं होता'।
-रेणु हुसैन, भारत
यूँ हैं दुनिया में ख़ुशनसीब बहुत
'पर सभी का तो घर नहीं होता' ।
~मनोज अबोध, भारत
दिल की दहलीज़ पर कई आते,
'पर सभी का तो घर नहीं होता'।
~कौसर भुट्टो, दुबई
आते जाते मकीं हैं कितने ही,
‘पर सभी का तो घर नहीं होता’।
~ अशोक सिंह , न्यू यॉर्क
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संपादक
~ कौसर भुट्टो, दुबई
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