297 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 29 नवंबर , 2025
एक शे'र अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित #डिजिटल_वीडियो_गोष्ठी का 297 वाँ तरही मुशायरा कार्यक्रम।
आज का मुशायरा इन दो मिसरों पर आधारित था:
593 वाँ मिसरा: 'मगर वो क्या करे जिस का भरोसा टूट जाता है' |
~ हसीब सोज़
594 वाँ मिसरा: ‘हम से नादानी हुई या तुम से नादानी हुई’।
~ दाग़ देहलवी
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जायज़ा लीजिए अलग अलग ज़ावियों से इन मिसरों पर लगाई हुई गिरह का;
593 वें मिसरे: 'मगर वो क्या करे जिस का भरोसा टूट जाता है'
पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:
भरोसे की इमारत पर खड़ा होता है हर रिश्ता,
'मगर वो क्या करे जिसका भरोसा टूट जाता है' |
~ अकबर शाद 'उदयपुरी', भारत
न सोचो खुदकुशी, ये पाप है, समझाता हूं उसको,
'मगर वो क्या करे जिसका भरोसा टूट जाता है' |
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत
है मुमकिन कि दिखा आँखों सुना कानों ग़लत होगा
'मगर वो क्या करे जिसका भरोसा टूट जाता है' | 1 ।
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत
कहा माँ ने न पीटूंगी तो पीटेगी नहीं तय है,
'मगर वो क्या करे जिसका भरोसा टूट जाता है' | 2 ।
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत
फ़िज़ूली है तजस्सुस बाकियों में तो न हो हैरत,
'मगर वो क्या करे जिस का भरोसा टूट जाता है।
* तजस्सुस जिज्ञासा
~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क
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594 वें मिसरे: ‘हम से नादानी हुई या तुम से नादानी हुई’
पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:
भाग कर शादी रचा ली हमने आकर जोश में,
‘हम से नादानी हुई या तुम से नादानी हुई’।
अनमोल प्रकाश शुक्ला, भारत
अब भला सर पीटने का रह गया क्या ही सबब!
‘हम से नादानी हुई या तुम से नादानी हुई’।
के पी सक्सेना , भारत
होगा दोनों को भुगतना जो भी अब अंजाम हो
‘हम से नादानी हुई या तुम से नादानी हुई’। 1 |
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत
एक अपराधी विधायक बन गया है शान से
‘हम से नादानी हुई या तुम से नादानी हुई’। 2 |
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत
हमको खारा क्यों किया सागर से बोली इक नदी
‘हम से नादानी हुई या तुम से नादानी हुई’। 3 |
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत
सोचने दो आने वाली इस सदी की ज़ात को,
‘हम से नादानी हुई या तुम से नादानी हुई’।
-रेणु हुसैन, भारत
तुम मुकर जाओगे वादा करके ये सोचा न था,
‘हम से नादानी हुई या तुम से नादानी हुई’।
ममता किरण, भारत
लग़ज़िशों के बाद अब ये सोचना बेकार है,
‘हम से नादानी हुई या तुम से नादानी हुई’। 1 ।
~ सज्जाद अख्तर ,भारत
परवरिश दोनों करेंगे छोड़िए इस बात को
‘हम से नादानी हुई या तुम से नादानी हुई’। 2 ।
~ सज्जाद अख्तर ,भारत
एक नन्हीं जान का तो कुछ नहीं इसमें क़ुसूर,
‘हम से नादानी हुई या तुम से नादानी हुई’। 3 ।
~ सज्जाद अख्तर ,भारत
दो कदम भी चल न पाये ज़िन्दगी की राह पर
‘हम से नादानी हुई या तुम से नादानी हुई’।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया
फ़ैसले की रात में चुप थे मगर दोनों तरफ़,
‘हम से नादानी हुई या तुम से नादानी हुई’।
~ अकबर शाद 'उदयपुरी', भारत
उम्र के इस मोड़ पर, क्या फ़ायदा ये सोचकर
‘हम से नादानी हुई या तुम से नादानी हुई’ ।
~मनोज अबोध, भारत
हो गई तो हो गई अब क्या करोगे जानकर,
'हमसे नादानी हुई या तुमसे नादानी हुई' ।
~प्रज्ञा त्रिवेदी ,भारत
उस घड़ी को याद करके, झाँक कर दिल में कहो,
'हम से नादानी हुई? या तुम से नादानी हुई?'
~खुर्रम नूर, भारत
होना था जो हो गया, अब सोच कर क्या फायदा,
हम से नादानी हुई या तुमसे नादानी हुई ।
कौसर भुट्टो, दुबई
बॉंध दें सेहरा किसी नादान के सर पर चलो,
‘हम से नादानी हुई या तुम से नादानी हुई’। 1 |
~ अशोक सिंह , न्यू यॉर्क
अक़्ल वालों में कहॉं से खेल दिल का हो गया,
‘हम से नादानी हुई या तुम से नादानी हुई’। 2 |
~ अशोक सिंह , न्यू यॉर्क
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इस कार्यक्रम का यू-ट्यूब वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करिये:
©️सर्वाधिकार सुरक्षित। इस पोस्ट में साझा किए गए सभी गिरह के शे'र 'एक शे'र अर्ज़ किया है' पटल पर शामिल शायरों के हैं। इनमें से कोई भी शे'र शायर की लिखित पूर्व सहमति के बग़ैर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।
संपादक
~ कौसर भुट्टो, दुबई
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