मंगलवार, 9 दिसंबर 2025

298 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 6 दिसंबर , 2025

298 वाँ एक शे’र गिरह-नामा:  6 दिसंबर , 2025

एक‌ शे'र‌ अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित #डिजिटल_वीडियो_गोष्ठी का 298 वाँ तरही मुशायरा कार्यक्रम।

 आज का मुशायरा इन दो मिसरों पर आधारित था:

595 वाँ मिसरा: ''हम तो डूबे हैं ख़ुदाओं पे भरोसा करके''। 

~ इशरत किरतपुरी


596 वाँ मिसरा: ‘'जब ये लगता है कि वो देखने.वाला है मुझे'। 

~ सुदेश कुमार मेहर

                                 *****^*****

 जायज़ा लीजिए अलग अलग ज़ावियों से इन मिसरों पर लगाई हुई गिरह का;

595 वें मिसरे: ''हम तो डूबे हैं ख़ुदाओं पे भरोसा करके''

पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:


मस्त बैठे थे किनारे पे थे बेफिक्र बहुत, 
‘हम तो डूबे हैं ख़ुदाओं पे भरोसा करके’।
अनमोल शुक्ल ' अनमोल' , भारत


सबको तिनकों के सहारे ही मिला है साहिल
‘हम तो डूबे हैं ख़ुदाओं पे भरोसा करके’।
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत


न तो हसरत ही थी ऐसी न कोई मज़बूरी
‘हम तो डूबे हैं ख़ुदाओं पे भरोसा करके’।
अनिमेष शर्मा, भारत


बद से बदतर हैं जो हालात मेरी बस्ती के
‘हम तो डूबे हैं ख़ुदाओं पे भरोसा करके’।
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


हमको तूफ़ां से निकलने का हुनर आता था 
‘हम तो डूबे हैं ख़ुदाओं पे भरोसा करके’।
सज्जाद अख्तर, भारत


इक ख़ुदा रखते तो हर हाल बचा लेता हमें 
‘हम तो डूबे हैं ख़ुदाओं पे भरोसा करके’।
मनोज अबोध, भारत


मुझ पे विश्वास है तो आप न करना हरगिज़ 
‘हम तो डूबे हैं ख़ुदाओं पे भरोसा करके’।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया


हमसे बेहतर हैं वही लोग, भले! काफ़िर हैं!
‘हम तो डूबे हैं ख़ुदाओं पे भरोसा करके’।
के पी सक्सेना, भारत


तुझको किसने है डुबाया ये तो तू ही जाने,
‘हम तो डूबे हैं ख़ुदाओं पे भरोसा करके’।
ममता किरण, भारत 


जब तलक था न यकीं उसपे हमें क्या ग़म था,
 ‘हम तो डूबे हैं ख़ुदाओं पे भरोसा करके’।
रेनू हुसैन, भारत


मर भी जाएँगे तो अफ़सोस नहीं होगा कोई, 
‘हम तो डूबे हैं ख़ुदाओं पे भरोसा करके’।
~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क 


*✨*☀️**✨**


 596 वें मिसरे: ‘'जब ये लगता है कि वो देखने.वाला है मुझे' 

 पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:


मैं उसी वक़्त बन लेता हूँ रोनी सूरत 
‘जब ये लगता है कि वो देखने वाला है मुझे’।
~मनोज अबोध, भारत 


एक मुस्कान चढा लेता हू मै चेहरे पर
‘जब ये लगता है कि वो देखने वाला है मुझे’।
अनमोल शुक्ल ' अनमोल' , भारत


कर लिया करती हूँ पलकों को ही चिलमन अपनी
‘जब ये लगता है कि वो देखने वाला है मुझे’। 1 l
~प्रज्ञा त्रिवेदी ,भारत


दे दूँ गच्चा मैं परीक्षा में निरीक्षक को भी
‘जब ये लगता है कि वो देखने वाला है मुझे’। 2 l
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत


गोलगप्पों को निगल प्लेट छुपा देती हूँ
‘जब ये लगता है कि वो देखने वाला है मुझे’। 3 l
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत


हर बुरे काम से डर जाता हूं तन्हाई में
‘जब ये लगता है कि वो देखने वाला है मुझे’। 1 l
~ सज्जाद अख्तर ,भारत 


हाथ चुपके से मैं पॉकेट से हटा लेता हूं
‘जब ये लगता है कि वो देखने वाला है मुझे’। 2 l
~ सज्जाद अख्तर ,भारत 


मैं समोसे को भी पॉकेट में छिपा लेता हूं
‘जब ये लगता है कि वो देखने वाला है मुझे’। 3 l
~ सज्जाद अख्तर ,भारत 


झेल जाता हूं मेरी ज़ीस्त का हर ज़ेरो ज़बर 
‘जब ये लगता है कि वो देखने वाला है मुझे’। 4 l
~ सज्जाद अख्तर ,भारत 


झेंपता हूं कि नहीं उसका कहा कर पाया 
‘जब ये लगता है कि वो देखने वाला है मुझे’।
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


फट से चैनल को बदल देता हूं मैं चुपके से 
‘जब ये लगता है कि वो देखने वाला है मुझे’। 2 l
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


फिर से अखबार पड़ोसी का वहीं रख देता 
‘जब ये लगता है कि वो देखने वाला है मुझे’। 3 l
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


एक इन्सान का चेहरा में चढ़ा लेता हूँ 
‘जब ये लगता है कि वो देखने वाला है मुझे’।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया


मुस्कुरा देता हूँ मैं अश्क छुपा कर अपने
‘जब ये लगता है कि वो देखने वाला है मुझे’ l
प्रेम बिहारी मिश्र, भारत


फुर से उड़ जाती हूँ मैं चोंच में भर के दाना 
‘जब ये लगता है कि वो देखने वाला है मुझे’।
रमनी थापर, कैलिफोर्निया


उसकी महफ़िल से मैं ख़ामोश गुज़र जाता हूँ
‘जब ये लगता है कि वो देखने वाला है मुझे’।
~ अकबर शाद 'उदयपुरी', भारत  


बस उसी पल में ही छा जाती है रंगत मुझमें 
‘जब ये लगता है कि वो देखने वाला है मुझे’।
ममता किरण, भारत


ख़ुद को अपनी ही नज़र से छिपा लेती हूँ
‘जब ये लगता है कि वो देखने वाला है मुझे’।
-रेणु हुसैन, भारत


उसको अपना मैं तो आईना बना लेती हूँ
‘जब ये लगता है कि वो देखने वाला है मुझे’। 1 l
मधु शर्मा, अमेरिका


देखती रहती गिरा मुख पे हया की चिलमन
‘जब ये लगता है कि वो देखने वाला है मुझे’। 2 l
मधु शर्मा, अमेरिका


ख़ुद ब ख़ुद चेहरे पे आ जाती है रौनक सी कोई, 
‘जब ये लगता है कि वो देखने वाला है मुझे’।
~ अशोक सिंह , न्यू यॉर्क 


****^*****


इस कार्यक्रम का यू-ट्यूब वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करिये:


©️सर्वाधिकार सुरक्षित। इस पोस्ट में साझा किए गए सभी गिरह के शे'र 'एक शे'र अर्ज़ किया है' पटल पर शामिल शायरों के हैं। इनमें से कोई भी शे'र शायर की लिखित पूर्व सहमति के बग़ैर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।

संपादक

~ कौसर भुट्टो, दुबई


 


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

319 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 2 मई , 2026

319 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 2 मई , 2026 एक‌ शे'र‌ अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित #डिजिटल_वीडियो_गोष्ठी का  319 वा...