सोमवार, 15 दिसंबर 2025

299 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 13 दिसंबर , 2025

299 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 13 दिसंबर , 2025

एक‌ शे'र‌ अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित #डिजिटल_वीडियो_गोष्ठी का 299 वाँ तरही मुशायरा कार्यक्रम।

 आज का मुशायरा इन दो मिसरों पर आधारित था:

597 वाँ मिसरा: ''क़ैद-ए-सय्याद से कैसे कोई पछी निकले" l

~विभा जैन 'ख्वाब'


598 वाँ मिसरा: "सिकंदरों के सामने गुलाम बोलने लगे"। 

~ शफ़क़ तनवीर
                                 *****^*****

 जायज़ा लीजिए अलग अलग ज़ावियों से इन मिसरों पर लगाई हुई गिरह का;

597 वें मिसरे: '''क़ैद-ए-सय्याद से कैसे कोई पछी निकले"

पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:


एक ही वार से पर काट दिए हों जिनके,
‘क़ैद-ए-सय्याद से कैसे कोई पंछी निकले’।
अनमोल शुक्ल ' अनमोल' , भारत


रख पकड़ ढीली मुहब्बत में ,उसे ये न लगे,
‘क़ैद-ए-सय्याद से कैसे कोई पंछी निकले’। 1।
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत


एक पूरी जो हुई दूजी मुरादें हैं खड़ी
‘क़ैद-ए-सय्याद से कैसे कोई पंछी निकले’। 2 ।
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत


 सोचने देगी जो बीवी, न तभी सोचेगा!
‘क़ैद-ए-सय्याद से कैसे कोई पंछी निकले’। 3 ।
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत


ज़हनो दिल से न तेरी याद पुरानी निकले,
‘क़ैद-ए-सय्याद से कैसे कोई पंछी निकले’।
~सज्जाद अख्तर, भारत


उसने जकड़ा है उन्हें दे के सुनहरे मोती ,
‘क़ैद-ए-सय्याद से कैसे कोई पंछी निकले’।
ममता 'किरण', भारत


अब तो आराम-तलब जैसे कफ़स में ही सभी,
‘क़ैद-ए-सय्याद से कैसे कोई पंछी निकले’।
~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क 


*✨*☀️**✨**


 598 वें मिसरे: ‘'सिकंदरों के सामने गुलाम बोलने लगे"।

 पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:


मेरी ग़ज़ल के चंद शेर सुन के ये असर हुआ,
‘सिकंदरों के सामने ग़ुलाम बोलने लगे’।
~ आलोक 'अविरल', भारत


जो दे दी दफ़्तरों में बॉस ने ज़रा सी छूट क्या,
‘सिकंदरों के सामने ग़ुलाम बोलने लगे’।
~प्रज्ञा त्रिवेदी ,भारत


समय-समय की बात है समय-समय का फेर है,
‘सिकंदरों के सामने ग़ुलाम बोलने लगे’।
~मनोज अबोध, भारत 


हुआ है जुल्म उनपे, अपने हक़ की जब तलब जगी,
‘सिकंदरों के सामने ग़ुलाम बोलने लगे’।
~अनमोल शुक्ल ' अनमोल' , भारत


बचाव मार का विरोध सा लगा तो यूँ कहा,
‘सिकंदरों के सामने ग़ुलाम बोलने लगे’। 1 ।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया


कफ़न लपेट कर सरों पे आ गए तो यूँ कहा 
‘सिकंदरों के सामने ग़ुलाम बोलने लगे’। 2 ।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया


मिरे ही फ़ैसलों से शाद अवाम बोलने लगे,
‘सिकंदरों के सामने ग़ुलाम बोलने लगे’।
~ अकबर शाद 'उदयपुरी', भारत  


हदें उबूर हो गईं अवाम बोलने लगे
‘सिकंदरों के सामने ग़ुलाम बोलने लगे’। ।1।
~ सज्जाद अख्तर ,भारत 


इक ऐसा वक़्त आ गया कि चीख़ उठीं ख़मोशियां,
 ‘सिकंदरों के सामने ग़ुलाम बोलने लगे’। । 2 ।
~ सज्जाद अख्तर ,भारत 


सिपाही ने उगल दिया, है घूंस आई जी ने ली 
‘सिकंदरों के सामने ग़ुलाम बोलने लगे’।
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


हदें भी पार हो गयीं तो यूं हुआ जनाब फिर 
‘सिकंदरों के सामने ग़ुलाम बोलने लगे’।
~ममता किरण, भारत 


कुएं के मेंढ़कों को भी जुकाम हो चला है क्या!
‘सिकंदरों के सामने ग़ुलाम बोलने लगे’।
~के पी सक्सेना, भारत


निज़ाम की समझ नहीं, न सूझ बूझ राज की,
‘सिकंदरों के सामने ग़ुलाम बोलने लगे’। 1 ।
~खुर्रम 'नूर', भारत


 अनाड़ियों को हक़ मिला है किस क़दर अजीब सा,
‘सिकंदरों के सामने ग़ुलाम बोलने लगे’। 2 ।
~खुर्रम 'नूर', भारत


 सियासती मु’आमलों से छूट इतनी मिल गई,
‘सिकंदरों के सामने ग़ुलाम बोलने लगे’।
~ अशोक सिंह , न्यू यॉर्क 


****^*****


इस कार्यक्रम का यू-ट्यूब वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करिये:


©️सर्वाधिकार सुरक्षित। इस पोस्ट में साझा किए गए सभी गिरह के शे'र 'एक शे'र अर्ज़ किया है' पटल पर शामिल शायरों के हैं। इनमें से कोई भी शे'र शायर की लिखित पूर्व सहमति के बग़ैर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।

संपादक

~ कौसर भुट्टो, दुबई


 


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

319 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 2 मई , 2026

319 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 2 मई , 2026 एक‌ शे'र‌ अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित #डिजिटल_वीडियो_गोष्ठी का  319 वा...