एक शे'र अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित #डिजिटल_वीडियो_गोष्ठी का 299 वाँ तरही मुशायरा कार्यक्रम।
आज का मुशायरा इन दो मिसरों पर आधारित था:
597 वाँ मिसरा: ''क़ैद-ए-सय्याद से कैसे कोई पछी निकले" l
~विभा जैन 'ख्वाब'
598 वाँ मिसरा: "सिकंदरों के सामने गुलाम बोलने लगे"।
~ शफ़क़ तनवीर
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जायज़ा लीजिए अलग अलग ज़ावियों से इन मिसरों पर लगाई हुई गिरह का;
597 वें मिसरे: '''क़ैद-ए-सय्याद से कैसे कोई पछी निकले"
पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:
एक ही वार से पर काट दिए हों जिनके,
‘क़ैद-ए-सय्याद से कैसे कोई पंछी निकले’।
अनमोल शुक्ल ' अनमोल' , भारत
रख पकड़ ढीली मुहब्बत में ,उसे ये न लगे,
‘क़ैद-ए-सय्याद से कैसे कोई पंछी निकले’। 1।
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत
एक पूरी जो हुई दूजी मुरादें हैं खड़ी
‘क़ैद-ए-सय्याद से कैसे कोई पंछी निकले’। 2 ।
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत
सोचने देगी जो बीवी, न तभी सोचेगा!
‘क़ैद-ए-सय्याद से कैसे कोई पंछी निकले’। 3 ।
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत
ज़हनो दिल से न तेरी याद पुरानी निकले,
‘क़ैद-ए-सय्याद से कैसे कोई पंछी निकले’।
~सज्जाद अख्तर, भारत
उसने जकड़ा है उन्हें दे के सुनहरे मोती ,
‘क़ैद-ए-सय्याद से कैसे कोई पंछी निकले’।
ममता 'किरण', भारत
अब तो आराम-तलब जैसे कफ़स में ही सभी,
‘क़ैद-ए-सय्याद से कैसे कोई पंछी निकले’।
~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क
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598 वें मिसरे: ‘'सिकंदरों के सामने गुलाम बोलने लगे"।
पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:
मेरी ग़ज़ल के चंद शेर सुन के ये असर हुआ,
‘सिकंदरों के सामने ग़ुलाम बोलने लगे’।
~ आलोक 'अविरल', भारत
जो दे दी दफ़्तरों में बॉस ने ज़रा सी छूट क्या,
‘सिकंदरों के सामने ग़ुलाम बोलने लगे’।
~प्रज्ञा त्रिवेदी ,भारत
समय-समय की बात है समय-समय का फेर है,
‘सिकंदरों के सामने ग़ुलाम बोलने लगे’।
~मनोज अबोध, भारत
हुआ है जुल्म उनपे, अपने हक़ की जब तलब जगी,
‘सिकंदरों के सामने ग़ुलाम बोलने लगे’।
~अनमोल शुक्ल ' अनमोल' , भारत
बचाव मार का विरोध सा लगा तो यूँ कहा,
‘सिकंदरों के सामने ग़ुलाम बोलने लगे’। 1 ।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया
कफ़न लपेट कर सरों पे आ गए तो यूँ कहा
‘सिकंदरों के सामने ग़ुलाम बोलने लगे’। 2 ।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया
मिरे ही फ़ैसलों से शाद अवाम बोलने लगे,
‘सिकंदरों के सामने ग़ुलाम बोलने लगे’।
~ अकबर शाद 'उदयपुरी', भारत
हदें उबूर हो गईं अवाम बोलने लगे
‘सिकंदरों के सामने ग़ुलाम बोलने लगे’। ।1।
~ सज्जाद अख्तर ,भारत
इक ऐसा वक़्त आ गया कि चीख़ उठीं ख़मोशियां,
‘सिकंदरों के सामने ग़ुलाम बोलने लगे’। । 2 ।
~ सज्जाद अख्तर ,भारत
सिपाही ने उगल दिया, है घूंस आई जी ने ली
‘सिकंदरों के सामने ग़ुलाम बोलने लगे’।
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत
हदें भी पार हो गयीं तो यूं हुआ जनाब फिर
‘सिकंदरों के सामने ग़ुलाम बोलने लगे’।
~ममता किरण, भारत
कुएं के मेंढ़कों को भी जुकाम हो चला है क्या!
‘सिकंदरों के सामने ग़ुलाम बोलने लगे’।
~के पी सक्सेना, भारत
निज़ाम की समझ नहीं, न सूझ बूझ राज की,
‘सिकंदरों के सामने ग़ुलाम बोलने लगे’। 1 ।
~खुर्रम 'नूर', भारत
अनाड़ियों को हक़ मिला है किस क़दर अजीब सा,
‘सिकंदरों के सामने ग़ुलाम बोलने लगे’। 2 ।
~खुर्रम 'नूर', भारत
सियासती मु’आमलों से छूट इतनी मिल गई,
‘सिकंदरों के सामने ग़ुलाम बोलने लगे’।
~ अशोक सिंह , न्यू यॉर्क
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इस कार्यक्रम का यू-ट्यूब वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करिये:
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संपादक
~ कौसर भुट्टो, दुबई
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