सोमवार, 8 सितंबर 2025

285वाँ एक शे’र गिरह-नामा:.06 सितंबर, 2025

 

285वाँ एक शेर गिरह-नामा: 06 सितंबर, 2025

एक‌ शे'र‌ अर्ज़ किया हैमंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित #डिजिटल_वीडियो_गोष्ठी का 285वाँ तरही मुशायरा कार्यक्रम।

आज का मुशायरा इन दो मिसरों पर आधारित था:

569वाँ मिसरा: ‘ये कोई तरीक़ा है कहा और किया और’

- ज़हीर देहलवी

570वाँ मिसरा: ‘आज धरती पे उतरे तो जल हो गए’

~ विकल साकेती

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जायज़ा लीजिए अलग अलग ज़ावियों से इन मिसरों पर लगाई हुई गिरह का;

569 वें मिसरे:

ये कोई तरीक़ा है कहा और किया और

पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:


दिखला के हसीं ख्वाब मुकर जाते हो कैसे

‘ये कोई तरीक़ा है कहा और किया और’ |

~ ममता किरण, भारत


बस्ती को बना दूंगा मैं जन्नत ये कहा था

‘ये कोई तरीका है कहा और किया और’ |

~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


की उसने मुरव्वत भी दिल्लगी की तरह ही

‘ये कोई तरीका है कहा और किया और’ |

~रमणी थापर, कैलिफ़ोर्निया  


करनी जो फ़क़ीरी ही थी क्यों इश्क़ लड़ाया

‘ये कोई तरीक़ा है कहा और किया और’ |

~ दिगंबर नासवा, मलेशिया


देवी है ये कह ब्याह में चंडी  ही थमा दी

‘ये कोई तरीक़ा है कहा और किया और’ |

~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत


हमने तेरी बातों को ही समझा है लकीरें

‘ये कोई तरीक़ा है कहा और किया और

~ रेणु हुसैन, भारत


कुछ क़ौल--क़सम की भी तो वक़अत रखी होती,

ये कोई तरीक़ा है कहा और किया और

~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क


देखा है सियासत में हर इक बार ये मंज़र,

‘ये कोई तरीका है कहा और किया और’ |

~ कौसर भुट्टो, दुबई


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570 वें मिसरे: ‘आज धरती पे उतरे तो जल हो गए’

पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:


उड़ रहे थे गगन में हवाओं के साथ

आज धरती पे उतरे तो जल हो गये’ |

प्रेम बिहारी मिश्र, भारत 


वो जो शोले बरसते रहे रोज़ ही,

‘आज धरती पे उतरे तो जल हो गये’ |

~ अकबर शाद 'उदयपुरी', भारत


जो हवा में ही हरदम यूँ उड़ते रहे,

‘आज धरती पे उतरे तो जल हो गये’ |

~ अकबर शाद 'उदयपुरी', भारत


आग बरसाते थे जब थे कुर्सी पे वो

‘आज धरती पे उतरे तो जल हो गये’ |1|

~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


दर्द बरसों के दिल में जमा जो रहे

‘आज धरती पे उतरे तो जल हो गये’ |2|

~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


दुःख के बादल उड़ा आसमां में दिये

‘आज धरती पे उतरे तो जल हो गये’।

~ ममता किरण, भारत


थे निगहबां जो बादल मेरे अश्क़ के

‘आज धरती पे उतरे तो जल हो गए’ |

~ प्रज्ञा त्रिवेदी, भारत


साथ दल-बल के बादल चले झूम कर

‘आज धरती पे उतरे तो जल हो गये’ |

~ दिगंबर नासवा, मलेशिया

 

ठोस बनते थे थोड़ा तरल हो गए

‘आज धरती पे उतरे तो जल हो गए’ |

~ सज्जाद अख्तर ,भारत


जो गरज कर डराते रहे रात-भर

‘आज धरती पे उतरे तो जल हो गए’ |

~ मनोज अबोध, भारत


सजे थे बन के मोती ज़ुल्फ़ों में जो

‘आज धरती पे उतरे तो जल हो गए’ |

~रमणी थापर, कैलिफ़ोर्निया 

 

उनके ओलों के मानिंद तेवर भी तो

‘आज धरती पे उतरे तो जल हो गये’ |

~ अनमोल प्रकाश शुक्ला,  भारत 


ख़्वाब थे आसमाँ पर ही अच्छे बहुत

‘आज धरती पे उतरे तो जल हो गये’ |

~ रेणु हुसैन, भारत


रंग--गर्दिश थे बर्क़--तजल्ली थे जो,

आज धरती पे उतरे तो जल हो गये’ |

~ अशोक सिंह , न्यूयॉर्क

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इस कार्यक्रम का यू-ट्यूब वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करिये:

https://youtu.be/JnHn0Z_nIRE?si=iIAg5Vqoi_RMVfj8

©️सर्वाधिकार सुरक्षित। इस पोस्ट में साझा किए गए सभी गिरह के शे''एक शे'र अर्ज़ किया है' पटल पर शामिल शायरों के हैं। इनमें से कोई भी शे'र शायर की लिखित पूर्व सहमति के बग़ैर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।

संपादक

~ कौसर भुट्टो, दुबई


2 टिप्‍पणियां:

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