285वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 06 सितंबर, 2025
एक शे'र अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित #डिजिटल_वीडियो_गोष्ठी का 285वाँ तरही मुशायरा कार्यक्रम।
आज का मुशायरा इन दो मिसरों पर आधारित था:
569वाँ मिसरा: ‘ये कोई तरीक़ा है कहा और किया और’
- ज़हीर देहलवी
570वाँ मिसरा: ‘आज धरती पे उतरे तो जल हो गए’
~ विकल साकेती
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जायज़ा लीजिए अलग अलग ज़ावियों से इन मिसरों पर लगाई हुई गिरह का;
569 वें मिसरे:
‘ये कोई तरीक़ा है कहा और किया और
पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:
दिखला के हसीं ख्वाब मुकर जाते हो कैसे
‘ये कोई तरीक़ा है कहा और किया और’ |
~ ममता किरण, भारत
बस्ती को बना दूंगा मैं जन्नत ये कहा था
‘ये कोई तरीका है कहा और किया और’ |
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत
की उसने मुरव्वत भी दिल्लगी की तरह ही
‘ये कोई तरीका है कहा और किया और’ |
~रमणी थापर, कैलिफ़ोर्निया
करनी जो फ़क़ीरी ही थी क्यों इश्क़ लड़ाया
‘ये कोई तरीक़ा है कहा और किया और’ |
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया
देवी है ये कह ब्याह में चंडी ही थमा दी
‘ये कोई तरीक़ा है कहा और किया और’ |
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत
हमने तेरी बातों को ही समझा है लकीरें
‘ये कोई तरीक़ा है कहा और किया और’।
~ रेणु हुसैन, भारत
कुछ क़ौल-ओ-क़सम की भी तो वक़’अत रखी होती,
‘ये कोई तरीक़ा है कहा और किया और’।
~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क
देखा है सियासत में हर इक बार ये मंज़र,
‘ये कोई तरीका है कहा और किया और’ |
~ कौसर भुट्टो, दुबई
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570 वें मिसरे: ‘आज धरती पे उतरे तो जल हो गए’
पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:
उड़ रहे थे गगन में हवाओं के साथ
‘आज धरती पे उतरे तो जल हो गये’ |
प्रेम बिहारी मिश्र, भारत
वो जो शोले बरसते रहे रोज़ ही,
‘आज धरती पे उतरे तो जल हो गये’ |
~ अकबर शाद 'उदयपुरी', भारत
जो हवा में ही हरदम यूँ उड़ते रहे,
‘आज धरती पे उतरे तो जल हो गये’ |
~ अकबर शाद 'उदयपुरी', भारत
आग बरसाते थे जब थे कुर्सी पे वो
‘आज धरती पे उतरे तो जल हो गये’ |1|
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत
दर्द बरसों के दिल में जमा जो रहे
‘आज धरती पे उतरे तो जल हो गये’ |2|
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत
दुःख के बादल उड़ा आसमां में दिये
‘आज धरती पे उतरे तो जल हो गये’।
~ ममता किरण, भारत
थे निगहबां जो बादल मेरे अश्क़ के
‘आज धरती पे उतरे तो जल हो गए’ |
~ प्रज्ञा त्रिवेदी, भारत
साथ दल-बल के बादल चले झूम कर
‘आज धरती पे उतरे तो जल हो गये’ |
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया
ठोस बनते थे थोड़ा तरल हो गए
‘आज धरती पे उतरे तो जल हो गए’ |
~ सज्जाद अख्तर ,भारत
जो गरज कर डराते रहे रात-भर
‘आज धरती पे उतरे तो जल हो गए’ |
~ मनोज अबोध, भारत
सजे थे बन के मोती ज़ुल्फ़ों में जो
‘आज धरती पे उतरे तो जल हो गए’ |
~रमणी थापर, कैलिफ़ोर्निया
उनके ओलों के मानिंद तेवर भी तो
‘आज धरती पे उतरे तो जल हो गये’ |
~ अनमोल प्रकाश शुक्ला, भारत
ख़्वाब थे आसमाँ पर ही अच्छे बहुत
‘आज धरती पे उतरे तो जल हो गये’ |
~ रेणु हुसैन, भारत
रंग-ए-गर्दिश थे बर्क़-ए-तजल्ली थे जो,
‘आज धरती पे उतरे तो जल हो गये’ |
~ अशोक सिंह , न्यूयॉर्क
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इस कार्यक्रम का यू-ट्यूब वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करिये:
https://youtu.be/JnHn0Z_nIRE?si=iIAg5Vqoi_RMVfj8
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संपादक
~ कौसर भुट्टो, दुबई
वाह, बेह्तरीन
जवाब देंहटाएंबेहतरीन कलेक्शन है … एक कमाल की शुरुआत है
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