सोमवार, 17 नवंबर 2025

295 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 15 नवंबर , 2025

295 वाँ एक शेर गिरह-नामा: 15 नवंबर , 2025

एक‌ शे'र‌ अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित #डिजिटल_वीडियो_गोष्ठी का 295 वाँ तरही मुशायरा कार्यक्रम।

 आज का मुशायरा इन दो मिसरों पर आधारित था:


 589 वाँ मिसरा: 'रहने दो अभी सागरो मीना मेरे आगे' ।

~मिर्ज़ा ग़ालिब


590 वाँ मिसरा: 'गुर्बत नसीब तेरे इरादे कहाँ के हैं। 

~ बिसमिल देहलवी

                                 *****^*****

 जायज़ा लीजिए अलग अलग ज़ावियों से इन मिसरों पर लगाई हुई गिरह का;


 589 वें मिसरे: ‘रहने दो अभी सागरो मीना मेरे आगे'

पर 'एक शे'र अर्ज़ किया हैके शायरों की लगाई गईं गिरह:

 

सूफी हूँ भले पर ये पिलानी है सभी को 

'रहने दो अभी साग़रो मीना मेरे आगे' ।

~ दिगंबर नासवामलेशिया


है तिश्नगी सदियों की  ये आहिस्ता बुझेगी

'रहने दो अभी साग़रो मीना मेरे आगे' ।

~ प्रज्ञा त्रिवेदी भारत

 

मुझको पता है बात ये अच्छी नहीं है पर،

 'रहने दो अभी सागर-ओ-मीना मेरे आगे' ।

-रेणु हुसैनभारत


ये सच है कि मयख़्वार नहीं हूं मैं मगर तुम,

'रहने दो अभी साग़र-ओ-मीना मेरे आगे'। 1 ।

~ सज्जाद अख्तर ,भारत 


इतनी भी नहीं पी कभी तौबा भी नहीं की

रहने दो अभी साग़र-ओ-मीना मेरे आगे'। 2 ।

~ सज्जाद अख्तर ,भारत 


बाल लीलाएं लिखीं सूर ने उस कान्हा की,

‘जिसको देखा ही न जाए, उसे देखा कैसे’ l

~ लक्ष्मी शंकर बाजपेईभारत


सदियों की मिरी प्यास ये ऐसे न बुझेगी 

'रहने दो अभी साग़रो मीना मेरे आगे' ।

~ मनोज अबोध, भारत


शायद यूँ ही हो जाय किसी शे’र की आमद,

'रहने दो अभी साग़रो मीना मेरे आगे' ।

रूबी मोहंती, भारत 


है प्यास भी इतनी कि ये बुझती ही नहीं है,

' रहने दो अभी सागरो मीना मेरे आगे' ।

आलोक अविरल,.भारत 


तौबा में अभी वक़्त है दो एक पहर का, 

‘रहने दो अभी साग़र-ओ-मीना मीना मेरे आगे’।

~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क 


**☀️****


 590 वें मिसरे: 'गुर्बत नसीब तेरे इरादे कहाँ के हैं।

~ बिसमिल देहलवी

 पर 'एक शे'र अर्ज़ किया हैके शायरों की लगाई गईं गिरह:

 

रिश्ते चढ़े हैं भेंट सियासत की आज सब,

‘ग़ुर्बत-नसीब तेरे इरादे कहाँ के हैं’।

~प्रेम बिहारी मिश्र,  भारत 


राहों में ख़ाक छानते क्या कुछ नहीं किया,

'ग़ुर्बत-नसीब तेरे इरादे कहाँ के हैं' l 1 ।

~ अकबर शाद 'उदयपुरी',  भारत


दीवार बन के रह गए अपने ही हौसले,

'ग़ुर्बत-नसीब तेरे इरादे कहाँ के हैं'। 2 ।

~ अकबर शाद 'उदयपुरी', भारत


मस्जिद से कुछ ग़रज़ न शिवाले की आरज़ू, 

'ग़ुर्बत नसीब तेरे इरादे कहां के हैं' l

~ सज्जाद अख्तर ,भारत 


बाज़ार से क्यों लाया है रस्सी ख़रीद के 

'ग़ुर्बत -नसीब तेरे इरादे कहां के हैं' ।

~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


लाया तू ब्याह एक पुलिसवाली क्यूँ भला

'ग़ुर्बत नसीब तेरे इरादे कहाँ के हैं' ।

~प्रज्ञा त्रिवेदी ,भारत


 क्यूँ रुक गया है राह में तू लक्ष्य छोड़ के 

'ग़ुर्बत-नसीब तेरे इरादे कहाँ के हैं' ।

~ दिगंबर नासवा, मलेशिया


तुम चल दिए हो छोड़ मुहब्बत की राह को,

 'गुर्बत नसीब तेरे इरादे कहाँ के हैं।

-रेणु हुसैनभारत


कब तक मुझे सफ़र में ही रहना है ये बता,

 'गुर्बत नसीब तेरे इरादे कहाँ के हैं'।

~आलोक अविरल 


जो पास था उसे भी सफ़र में लुटा दिया 

'ग़ुरबत नसीब तेरे इरादे कहाँ के हैं' ।

मनोज अबोध, भारत 


ठोकर पे रख के चल रहा तक़दीर का लिखा,

‘ग़ुर्बत-नसीब तेरे इरादे कहाँ के हैं’। 1 ।

~ अशोक सिंह , न्यू यॉर्क


फैलाए रायता पड़ा हर एक ठौर पर,

‘ग़ुर्बत-नसीब तेरे इरादे कहाँ के हैं’। 2 ।

~ अशोक सिंह , न्यू यॉर्क

****^*****


इस कार्यक्रम का यू-ट्यूब वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करिये:

295th youtube link

©️सर्वाधिकार सुरक्षित। इस पोस्ट में साझा किए गए सभी गिरह के शे'र 'एक शे'र अर्ज़ किया हैपटल पर शामिल शायरों के हैं। इनमें से कोई भी शे'र शायर की लिखित पूर्व सहमति के बग़ैर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।

संपादक

~ कौसर भुट्टो, दुबई


 


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

319 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 2 मई , 2026

319 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 2 मई , 2026 एक‌ शे'र‌ अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित #डिजिटल_वीडियो_गोष्ठी का  319 वा...