294 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 8 नवंबर , 2025
एक शे'र अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित #डिजिटल_वीडियो_गोष्ठी का 294 वाँ तरही मुशायरा कार्यक्रम।
आज का मुशायरा इन दो मिसरों पर आधारित था:
587 वाँ मिसरा: ‘काँटों से निकलना आसाँ था फूलों से निकलना मुश्किल है’।
~ इक़बाल सफ़ी पूरी
588 वाँ मिसरा: 'सामने मेरे आ के खड़ा हो गया’।
~ ज्ञान प्रकाश विवेक
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जायज़ा लीजिए अलग अलग ज़ावियों से इन मिसरों पर लगाई हुई गिरह का;
587 वें मिसरे: ‘काँटों से निकलना आसाँ था फूलों से निकलना मुश्किल है’
पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:
जीवन में मिला सुख दुख जो भी उसने ही हमें यह समझाया
'काँटों से निकलना आसाँ था फूलों से निकलना मुश्किल है' ।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया
अब हिज्र की राहों में मैंने मुस्कान का दामन थामा है,
'काँटों से निकलना आसाँ था फूलों से निकलना मुश्किल है' ।
~ अकबर शाद 'उदयपुरी', भारत
तुम जिस्म से दूरी कर बैठे पर रूह से निकलो तो जानें,
'काँटों से निकलना आसाँ था फूलों से निकलना मुश्किल है' ।
~ आलोक अविरल
कैसा है सफर ये कैसा छल मंज़र ने किसी रोकी राहें,
'काँटों से निकलना आसाँ था फूलों से निकलना मुश्किल है'।
कौसर भुट्टो, दुबई
जानोगे जो ख़ुद पर गुज़रेगी ख़ुशबू की हिरासत क्या होती,
‘काँटों से निकलना आसाँ था फूलों से निकलना मुश्किल है’।
~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क
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588 वें मिसरे:
'सामने मेरे आ के खड़ा हो गया’
पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:
जिससे बचने की माँगी दुआ रातभर,
'सामने मेरे आ के खड़ा हो गया' | 1 ।
~ अकबर शाद 'उदयपुरी', भारत
मैंने सोचा जिसे भूल जाऊँ वही
'सामने मेरे आ के खड़ा हो गया' | 2 ।
~ अकबर शाद 'उदयपुरी', भारत
जिसको चलना सिखाया था उंगली पकड़
'सामने मेरे आकर खड़ा हो गया' । 1l
-रेणु हुसैन, भारत
उसको नज़रें मिलानी थीं मुझसे तो फिर
'सामने मेरे आकर खड़ा हो गया' । 2 l
-रेणु हुसैन, भारत
मेरा माज़ी लिए गठरी यादों की ..कल
'सामने मेरे आ के खड़ा हो गया' |
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत
जितना चाहा सुकूँ फिर कोई मस'अला
'सामने मेरे आके खड़ा हो गया' । 1 ।
-प्रज्ञा त्रिवेदी ,भारत
जब भी की बन्द आँखें औ सोचा उसे
'सामने मेरे आके खड़ा हो गया' । 2 ।
-प्रज्ञा त्रिवेदी ,भारत
ढल के बच्चों में बचपन मेरा एक दिन
'सामने मेरे आ के खड़ा हो गया' ।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया
फिर हुआ ये कि हरइक मेरा कर्म भी
‘सामने मेरे आके खड़ा हो गया’ ।
~ मनोज अबोध, भारत
दर्प लड़ने को मुझसे मुझी से निकल,
'सामने मेरे आ के खड़ा हो गया' ।
~आलोक अविरल
मन जो विचलित हुआ,मेरा अंतःकरण,
सामने मेरे आके खड़ा हो गया। 1।
~खुर्रम नूर , भारत
ख़ौफ़ पाला था जो बेवजह दिल में वो,
सामने मेरे आके खड़ा हो गया। 2 ।
~खुर्रम नूर , भारत
वो जुदाई की साअ'त भरे आँखों में,
’सामने मेरे आ कर खड़ा हो गया’।
~ अशोक सिंह , न्यूयॉर्क
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इस कार्यक्रम का यू-ट्यूब वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करिये:
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संपादक
~ कौसर भुट्टो, दुबई
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