सोमवार, 3 नवंबर 2025

293 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 1 नवंबर , 2025

 

293 वाँ एक शेर गिरह-नामा: 1 नवंबर , 2025

एक‌ शे'र‌ अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित #डिजिटल_वीडियो_गोष्ठी का 293 वाँ तरही मुशायरा कार्यक्रम।

 आज का मुशायरा इन दो मिसरों पर आधारित था:


 585 वाँ मिसरा: ‘जिसको देखा ही न जाए, उसे देखा कैसे’।

~ अहमद नदीम क़ासमी 


586 वाँ मिसरा: 'दो जिस्मों के बीच भले ही चाहे जितनी दूरी हो'।

~ अनुज अब्र

                                 *****^*****

 जायज़ा लीजिए अलग अलग ज़ावियों से इन मिसरों पर लगाई हुई गिरह का;


 585 वें मिसरे‘जिसको देखा ही न जाए, उसे देखा कैसे’

पर 'एक शे'र अर्ज़ किया हैके शायरों की लगाई गईं गिरह:

 

हूबहू उनको बताया तो सभी ने पूछा,

‘जिसको देखा ही न जाए, उसे देखा कैसे’ l 1 ।

~ दिगंबर नासवामलेशिया

 

खा क़सम तू न बताने की बता दूँगा मैं,

‘जिसको देखा ही न जाए, उसे देखा कैसे’ l 2 ।

~ दिगंबर नासवामलेशिया


रोज़ सपनों में वो आ जाता है, यूँ ही अब तो,

‘जिसको देखा ही न जाए, उसे देखा कैसे’ l

~ अकबर शाद 'उदयपुरी',  भारत

 

मुझको इदराक ही हो जाता तेरे होने का,

‘जिसको देखा ही न जाए, उसे देखा कैसे’ l

~ प्रज्ञा त्रिवेदी भारत

 

क्या कहूँ, मैं तो सराबोर हूँ इक ख़ुशबू में,

‘जिसको देखा ही न जाए, उसे देखा कैसे’ l

-रेणु हुसैनभारत


तुमने बीमारे मुहब्बत की अयादत की है!

‘जिसको देखा ही न जाए, उसे देखा कैसे’ l

~ सज्जाद अख्तर ,भारत 


बाल लीलाएं लिखीं सूर ने उस कान्हा की,

‘जिसको देखा ही न जाए, उसे देखा कैसे’ l

~ लक्ष्मी शंकर बाजपेईभारत


पूछो हर ज़र्रे से ताबिंद अभी तक है जो,

जिसको देखा ही न जाए, उसे देखा कैसे’। 1 ।

~ अशोक सिंहन्यूयॉर्क 


सेर भर ख़ून जले उसका ख़याल आते ही,

‘जिसको देखा ही न जाए उसे देखा कैसे’। 2 ।

~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क 


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 584 वें मिसरे:

 'दो जिस्मों के बीच भले ही चाहे जितनी दूरी हो'

पर 'एक शे'र अर्ज़ किया हैके शायरों की लगाई गईं गिरह:

 

दिल से दिल का रिश्ता ही अब हम दोनों को बाँधेगा

'दो जिस्मों के बीच भले ही चाहे जितनी दूरी हो' ।

-रेणु हुसैनभारत

 

दिल से दिल का तार न टूटा बस इतना ही काफी है

'दो जिस्मों के बीच भले ही चाहे जितनी दूरी हो’ ।

~ के पी सक्सेनाभारत

 

रूहों का मिलना ही सच में असली मिलना होता है 

'दो जिस्मों के बीच भले ही चाहे जितनी दूरी हो' ।

~ लक्ष्मी शंकर बाजपेईभारत

 

दिल के तारों से दिल का सन्देसा पा ही जाते हैं,

'दो जिस्मों के बीच भले ही चाहे जितनी दूरी हो' ।

-प्रज्ञा त्रिवेदी ,भारत


 ख़त, चिट्ठी, ई-मेल, ख़बर, छुप कर कुछ भी हो सकता है,

'दो जिस्मों के बीच भले ही चाहे जितनी दूरी हो' ।

~ दिगंबर नासवा, मलेशिया


मीठी यादों की गरमाहट उनको ज़िंदा रखती है 

'दो जिस्मों के बीच भले ही चाहे जितनी दूरी हो' ।

~ मनोज अबोधभारत


 प्यार मोहब्बत करने वाले रूह से बातें करते हैं,

 'दो जिस्मों के बीच भले ही चाहे जितनी दूरी हो'।

~आलोक अविरल 


कोई शग़्ल शायरी जैसा बन जाए मश्गला तो फिर, 

‘दो जिस्मों के बीच भले ही चाहे जितनी दूरी हो’। 1।

~ अशोक सिंह न्यूयॉर्क


खिलते रहें चमेली चम्पा इक दूजे की कुर्बत के,

‘दो जिस्मों के बीच भले ही चाहे जितनी दूरी हो’। 2 ।

~ अशोक सिंह , न्यूयॉर्क


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इस कार्यक्रम का यू-ट्यूब वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करिये:

 293 वाँ मुशायरा

©️सर्वाधिकार सुरक्षित। इस पोस्ट में साझा किए गए सभी गिरह के शे'र 'एक शे'र अर्ज़ किया हैपटल पर शामिल शायरों के हैं। इनमें से कोई भी शे'र शायर की लिखित पूर्व सहमति के बग़ैर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।

संपादक

~ कौसर भुट्टो, दुबई


 


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