एक शे'र अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित 332 वाँ सप्ताहिक गिरह-नामा।
आज का मुशायरा इन दो मिसरों पर आधारित था:
663 वाँ मिसरा: 'क़रीब आए तो चेहरे बदल गए कैसे' ।
~ आल ए अहमद सुरुर
664 वाँ मिसरा: 'मेरे लबों पर तेरा फ़साना पहले भी था आज भी है'।
~ हस्तीमल हस्ती
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जायज़ा लीजिए अलग अलग ज़ावियों से इन मिसरों पर लगाई हुई गिरह का;
663 वें मिसरे: 'क़रीब आए तो चेहरे बदल गए कैसे'
पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:
वो जो ख़ुलूस में सब देवता से लगते थे,
‘क़रीब आए तो चेहरे बदल गए कैसे’।
~अनमोल प्रकाश शुक्ला, भारत
हम आफ़ताब समझते थे, निकले जुगनू वो
'क़रीब आये तो चेहरे बदल गये कैसे'।
~डाॅ. आदेश त्यागी, भारत
न आओ पास भी इतना कभी ये कहना पड़े
‘क़रीब आए तो चेहरे बदल गए कैसे’। 1 ।
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत
रखो न राब्ता इतना कभी ये कहना पड़े
‘क़रीब आए तो चेहरे बदल गए कैसे’। 2 ।
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत
करो न कुछ भी तुम ऐसा की लोग कहने लगें
‘क़रीब आए तो चेहरे बदल गए कैसे’।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया
मुझे लगा था कि वो लोग हैं मेरे अपने
‘क़रीब आए तो चेहरे बदल गए कैसे’।
~रेनू हुसैन, भारत
हमें तो चाँद सितारों से दिख रहे थे सब,
‘क़रीब आए तो चेहरे बदल गए कैसे’।
~रामप्रकाश यति, भारत
वो जब थे दूर तो समझी थी देवता उनको
‘क़रीब आए तो चेहरे बदल गए कैसे’।
~ममता 'किरण', भारत
सँभाले रक्खा था जिनको हसीं ख़यालों में
‘क़रीब आए तो चेहरे बदल गए कैसे’।
~कौसर भुट्टो, दुबई
सुहाने ढोल से जो दूर के लगे थे वो
‘क़रीब आए तो चेहरे बदल गए कैसे’।
~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क
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664 वें मिसरे: 'मेरे लबों पर तेरा फ़साना पहले भी था आज भी है'
पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:
तुम भी वही हो मैं भी वही हूँ मौसम भी है पहले सा
'मेरे लबों पर तेरा फ़साना पहले भी था आज भी है'।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया
मुद्दत गुज़री बदल गई दुनिया दोनों की ही लेकिन
'मेरे लबों पर तेरा फ़साना पहले भी था आज भी है'।
~लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत
चाहे तब था प्यार का क़िस्सा चाहे अब है रंजिश का
'मेरे लबों पर तेरा फ़साना पहले भी था आज भी है'।
~प्रज्ञा त्रिवेदी ,भारत
आज भी है शादाब मेरे दिल में पहली-पहली उल्फ़त
'मेरे लबों पर तेरा फ़साना पहले भी था, आज भी है'।
~डाॅ. आदेश त्यागी, भारत
इक अरसे से हम दोनों हैं ग़ैरों की जागीरें ,पर,
'मेरे लबों पर तेरा फ़साना पहले भी था आज भी है'।
~खुर्रम नूर, भारत
तस्वीरें हैं सजी हुईं तेरी ही मन के मंदिर में
'मेरे लबों पर तेरा फ़साना पहले भी था आज भी है'।
~ममता किरण, भारत
माना तूने तोड़ दिया दिल ,इससे फ़र्क नहीं कुछ भी,
'मेरे लबों पर तेरा फ़साना पहले भी था आज भी है'।
~अनमोल प्रकाश शुक्ला, भारत
सबकी अपनी-अपनी ढपली सबका अपना-अपना राग,
'मेरे लबों पर तेरा फ़साना पहले भी था आज भी है'।
~कौसर भुट्टो, दुबई
बाद-ए-ख़िज़ाँ में भूला सब पर फ़स्ल-ए-गुल की याद नहीं,
'मेरे लबों पर तेरा फ़साना पहले भी था आज भी है'।
*बाद-ए-ख़िज़ाँ=पतझड़ की हवा; फ़स्ल-ए-गुल=बहार
~ अशोक सिंह , न्यू यॉर्क
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संपादक
~ कौसर भुट्टो, दुबई