एक शे'र अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित #डिजिटल_वीडियो_गोष्ठी का 316 वाँ तरही मुशायरा कार्यक्रम।
आज का मुशायरा इन दो मिसरों पर आधारित था:
631 वाँ मिसरा: 'जो भी करना है इसी नस्ल को करना होगा' ।
~ 'मेराज' फ़ैज़ाबादी
632 वाँ मिसरा: 'इससे बेहतर तो यही है कि भुला दो मुझको'।
~ देवीचरण कश्यप' ।
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जायज़ा लीजिए अलग अलग ज़ावियों से इन मिसरों पर लगाई हुई गिरह का;
631 वें मिसरे: ' जो भी करना है इसी नस्ल को करना होगा'
पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:
जैसे हालात हैं उनसे तो यही लगता है
‘जो भी करना है इसी नस्ल को करना होगा’।
~सज्जाद अख्तर, भारत
गैर को पाठ पढ़ाने से नही कुछ हासिल!
‘जो भी करना है इसी नस्ल को करना होगा’।
~के पी सक्सेना, भारत
सबके मज़हब रहें महफ़ूज़ , मगर इसके लिए
‘जो भी करना है इसी नस्ल को करना होगा’।
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत
अपने खोते हुए आदाब बचाने के लिये
'जो भी करना है इसी नस्ल को करना होगा' ।
`डा आदेश त्यागी, भारत
क्यों तको राह कोई आ के उजाला देगा
‘जो भी करना है इसी नस्ल को करना होगा’।
~ममता किरण, भारत
बात ये सदियों से हर नस्ल ही कहती आई,
‘जो भी करना है इसी नस्ल को करना होगा’।
~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क
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632 वें मिसरे: 'इससे बेहतर तो यही है कि भुला दो मुझको'
पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:
गुफ़्तगू से रहे महरूम अगर उल्फ़त ये
‘इससे बेहतर तो यही है कि भुला दो मुझको’।
~प्रज्ञा त्रिवेदी ,भारत
साथ देना नहीं मुमकिन है अगर उल्फ़त में
‘इससे बेहतर तो यही है कि भुला दो मुझको’।
~प्रज्ञा त्रिवेदी ,भारत
तुम को जीने ही न दें चैन से यादें मेरी
‘इससे बेहतर तो यही है कि भुला दो मुझको’।
~लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत
डर सताता है अगर इस क़दर ज़माने का
‘इससे बेहतर तो यही है कि भुला दो मुझको’।
~लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत
बात नज़रों की तेरे दिल में उतर जाने लगे
‘इससे बेहतर तो यही है कि भुला दो मुझको’।
~रेनू हुसैन, भारत
ग़म बहुत होगा तुम्हें आगे इसी माज़ी का
‘इससे बेहतर तो यही है कि भुला दो मुझको’।
~अनमोल प्रकाश शुक्ला, भारत
शक न छूटेगा तो हर बात पे झगड़ा होगा
‘इससे बेहतर तो यही है कि भुला दो मुझको’।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया
रास आने लगीं तनहाइयां यदि तुमको अब
‘इससे बेहतर तो यही है कि भुला दो मुझको’।
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत
इश्क़ है तुमको मगर खौफ़ जमाने का है
‘इससे बेहतर तो यही है कि भुला दो मुझको’।
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत
नाम मेरा कहीं बदनाम न तुमको कर दे!
‘इससे बेहतर तो यही है कि भुला दो मुझको’।
~के पी सक्सेना, भारत
अब उदासी नहीं छिप पाती है मुस्कानों में
'इस से बेहतर तो यही है कि भुला दो मुझ को'। 1 ।
~डाॅ. आदेश त्यागी, भारत
सुनो, बरबाद न हो जाये कहीं मुस्तक़बिल
'इस से बेहतर तो यही है कि भुला दो मुझ को'। 2 ।
~डाॅ. आदेश त्यागी, भारत
बारहा अश्क बहाने से मिलेगा क्या अब
'इस से बेहतर तो यही है कि भुला दो मुझ को'। 3 ।
~डाॅ. आदेश त्यागी, भारत
मेरी हस्ती से फ़क़त रंज ही पहुँचेगा अब
‘इससे बेहतर तो यही है कि भुला दो मुझको’।
~शिव मोहन, किर्गिस्तान
याद कर के मुझे क्यों ज़ख्म कुरेदो कल के
‘इससे बेहतर तो यही है कि भुला दो मुझको’।
~खुर्रम नूर, भारत
दो क़दम साथ अगर मेरे नहीं चल सकते
‘इससे बेहतर तो यही है कि भुला दो मुझको’।
~ममता किरण, भारत
दाद-फ़रियाद करो जा-ब-जा दर -दर जा कर,
‘इससे बेहतर तो यही है कि भुला दो मुझको’।
~ अशोक सिंह , न्यू यॉर्क
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इस कार्यक्रम का यू-ट्यूब वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करिये:
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संपादक
~ कौसर भुट्टो, दुबई
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