एक शे'र अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित #डिजिटल_वीडियो_गोष्ठी का 317 वाँ तरही मुशायरा कार्यक्रम।
आज का मुशायरा इन दो मिसरों पर आधारित था:
633 वाँ मिसरा: 'कोई राह में आईना रख गया है'।
~ खुमार बाराबंकवी
634 वाँ मिसरा: 'हम लोग तो दामन भी कुशादा नहीं रखते'।
~ नजीब अहमद
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जायज़ा लीजिए अलग अलग ज़ावियों से इन मिसरों पर लगाई हुई गिरह का;
633वें मिसरे: ' 'कोई राह में आईना रख गया है''
पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:
वो जो भी है शैदाई है सिर्फ़ सच का,
‘कोई राह में आईना रख गया है’। 1 l
~अनमोल प्रकाश शुक्ला, भारत
हमेशा चलो जेब में ले के कंघी,
‘कोई राह में आईना रख गया है’। 2 l
~अनमोल प्रकाश शुक्ला, भारत
नक़ाबों की सारी तहें खुल गई हैं
‘कोई राह में आईना रख गया है’।
~सज्जाद अख्तर, भारत
मिलाएगा कैसे वो ख़ुद से भी नज़रें
‘कोई राह में आईना रख गया है’। 1 l
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत
सम्हल के उछाला करो अब से पत्थर
‘कोई राह में आईना रख गया है’। 2 l
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत
नहीं अब है आता कोई संग मुझ तक
‘कोई राह में आईना रख गया है’। 3 l
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत
लगे मयक़दे लोग कतरा के जाने
‘कोई राह में आईना रख गया है’।
~के पी सक्सेना, भारत
वो मंज़िल को था खेल समझे.. न सोचा
‘कोई राह में आईना रख गया है’।
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत
सँवरने का मौक़ा मिला है सभी को
‘कोई राह में आईना रख गया है’।
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत
ख़ताएं छुपानी हुईं अब तो मुश्किल
‘कोई राह में आईना रख गया है’।
~ममता 'किरण', भारत
न पूछो सँवर कर में आता हूँ अब क्यों
‘कोई राह में आईना रख गया है’।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया
अचानक ही पत्थर उठाने लगे सब
‘कोई राह में आईना रख गया है’।
~मनोज 'अबोध', भारत
नहीं उस गली अब गुजरता है कोई
‘कोई राह में आईना रख गया है’।
~कौसर भुट्टो यूएई
ठिठक कुछ हँसे, कुछ ने नज़रें चुराईं,
‘कोई राह में आईना रख गया है’।
~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क
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634 वें मिसरे: 'हम लोग तो दामन भी कुशादा नहीं रखते'
पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:
वो देने पे आए तो समेटेंगे कहां तक
‘हम लोग तो दामन भी कुशादा नहीं रखते’।
~सज्जाद अख्तर, भारत
है जानना मुश्किल ये बहुत किसके दिल में क्या,
‘हम लोग तो दामन भी कुशादा नहीं रखते’।
~अनमोल प्रकाश शुक्ला, भारत
हर शय को समेटें भी तो किस दिल से समेटें,
'हम लोग तो दामन भी कुशादा नहीं रखते'।
~डॉ० भावना कुँअर, ऑस्ट्रेलिया
नेमत ये मुहब्बत की भला कैसे मिलेगी
‘हम लोग तो दामन भी कुशादा नहीं रखते’।
~प्रज्ञा त्रिवेदी ,भारत
रहमत यहाँ रब की तो मुसलसल ही बरसती
‘हम लोग तो दामन भी कुशादा नहीं रखते’ l
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत
दाता के ख़ज़ाना है ये कम हो नहीं सकता
‘हम लोग तो दामन भी कुशादा नहीं रखते’।
~रेनू हुसैन, भारत
दावा कि खुले दिल के हैं, कहने के लिए है
‘हम लोग तो दामन भी कुशादा नहीं रखते’।
~मनोज अबोध, भारत
खिड़की या दरीचे तो जरा दूर की शय हैं
‘हम लोग तो दामन भी कुशादा नहीं रखते’।
~रूबी मोहंती, भारत
इस दौर में चोरों का हुआ ख़ौफ़ है इतना
‘हम लोग तो दामन भी कुशादा नहीं रखते’। 1 l
~ममता किरण, भारत
हम लोग सजग अपनी अना के लिए हैं ख़ूब
‘हम लोग तो दामन भी कुशादा नहीं रखते’। 2 l
~ममता किरण, भारत
बिन माँगे ही भर देता है झोली वो सभी की,
‘हम लोग तो दामन भी कुशादा नहीं रखते’।
~ अशोक सिंह ,न्यू यॉर्क
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इस कार्यक्रम का यू-ट्यूब वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करिये:
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संपादक
~ कौसर भुट्टो, दुबई
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