सोमवार, 20 अप्रैल 2026

317 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 18 अप्रैल , 2026

317 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 18 अप्रैल , 2026

एक‌ शे'र‌ अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित #डिजिटल_वीडियो_गोष्ठी का 317 वाँ तरही मुशायरा कार्यक्रम।

 आज का मुशायरा इन दो मिसरों पर आधारित था:

633 वाँ मिसरा: 'कोई राह में आईना रख गया है'। 

~ खुमार बाराबंकवी


634 वाँ मिसरा: 'हम लोग तो दामन भी कुशादा नहीं रखते'।

~ नजीब अहमद
                                 *****^*****

 जायज़ा लीजिए अलग अलग ज़ावियों से इन मिसरों पर लगाई हुई गिरह का;

633वें मिसरे: ' 'कोई राह में आईना रख गया है'' 

पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:


वो जो भी है शैदाई है सिर्फ़ सच का,
‘कोई राह में आईना रख गया है’। 1 l
~अनमोल प्रकाश शुक्ला, भारत 


हमेशा चलो जेब में ले के कंघी,
‘कोई राह में आईना रख गया है’। 2 l
~अनमोल प्रकाश शुक्ला, भारत 


नक़ाबों की सारी तहें खुल गई हैं 
‘कोई राह में आईना रख गया है’।
~सज्जाद अख्तर, भारत


मिलाएगा कैसे वो ख़ुद से भी नज़रें
‘कोई राह में आईना रख गया है’। 1 l
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत


सम्हल के उछाला करो अब से पत्थर
‘कोई राह में आईना रख गया है’। 2 l
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत


नहीं अब है आता कोई संग मुझ तक
‘कोई राह में आईना रख गया है’। 3 l
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत


लगे मयक़दे लोग कतरा के जाने
‘कोई राह में आईना रख गया है’।
~के पी सक्सेना, भारत 


वो मंज़िल को था खेल समझे.. न सोचा
‘कोई राह में आईना रख गया है’।
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


सँवरने का मौक़ा मिला है सभी को
‘कोई राह में आईना रख गया है’।
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत


ख़ताएं छुपानी हुईं अब तो मुश्किल 
‘कोई राह में आईना रख गया है’।
~ममता 'किरण', भारत


न पूछो सँवर कर में आता हूँ अब क्यों 
‘कोई राह में आईना रख गया है’।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया


अचानक ही पत्थर उठाने लगे सब 
‘कोई राह में आईना रख गया है’।
~मनोज 'अबोध', भारत 


नहीं उस गली अब गुजरता है कोई
‘कोई राह में आईना रख गया है’।
~कौसर भुट्टो यूएई


ठिठक कुछ हँसे, कुछ ने नज़रें चुराईं,
‘कोई राह में आईना रख गया है’।
~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क 


*✨*☀️**✨**


 634 वें मिसरे: 'हम लोग तो दामन भी कुशादा नहीं रखते'

 पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:


वो देने पे आए तो समेटेंगे कहां तक
‘हम लोग तो दामन भी कुशादा नहीं रखते’।
~सज्जाद अख्तर, भारत


है जानना मुश्किल ये बहुत किसके दिल में क्या,
‘हम लोग तो दामन भी कुशादा नहीं रखते’।
~अनमोल प्रकाश शुक्ला, भारत 


हर शय को समेटें भी तो किस दिल से समेटें,
'हम लोग तो दामन भी कुशादा नहीं रखते'।
~डॉ० भावना कुँअर, ऑस्ट्रेलिया


नेमत ये मुहब्बत की भला कैसे मिलेगी
‘हम लोग तो दामन भी कुशादा नहीं रखते’।
~प्रज्ञा त्रिवेदी ,भारत


रहमत यहाँ रब की तो मुसलसल ही बरसती 
‘हम लोग तो दामन भी कुशादा नहीं रखते’ l
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत


दाता के ख़ज़ाना है ये कम हो नहीं सकता
 ‘हम लोग तो दामन भी कुशादा नहीं रखते’।
~रेनू हुसैन, भारत 


दावा कि खुले दिल के हैं, कहने के लिए है 
‘हम लोग तो दामन भी कुशादा नहीं रखते’।
~मनोज अबोध, भारत


खिड़की या दरीचे तो जरा दूर की शय हैं 
‘हम लोग तो दामन भी कुशादा नहीं रखते’।
~रूबी मोहंती, भारत 


इस दौर में चोरों का हुआ ख़ौफ़ है इतना 
‘हम लोग तो दामन भी कुशादा नहीं रखते’। 1 l
~ममता किरण, भारत


हम लोग सजग अपनी अना के लिए हैं ख़ूब 
‘हम लोग तो दामन भी कुशादा नहीं रखते’। 2 l
~ममता किरण, भारत


बिन माँगे ही भर देता है झोली वो सभी की,  
‘हम लोग तो दामन भी कुशादा नहीं रखते’।
~ अशोक सिंह ,न्यू यॉर्क 


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इस कार्यक्रम का यू-ट्यूब वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करिये:


©️सर्वाधिकार सुरक्षित। इस पोस्ट में साझा किए गए सभी गिरह के शे'र 'एक शे'र अर्ज़ किया है' पटल पर शामिल शायरों के हैं। इनमें से कोई भी शे'र शायर की लिखित पूर्व सहमति के बग़ैर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।

संपादक

~ कौसर भुट्टो, दुबई


 


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