मंगलवार, 27 जनवरी 2026

305 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 24 जनवरी, 2026

305 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 24 जनवरी, 2026

एक‌ शे'र‌ अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित #डिजिटल_वीडियो_गोष्ठी का 305 वाँ तरही मुशायरा कार्यक्रम।

 आज का मुशायरा इन दो मिसरों पर आधारित था:

609 वाँ मिसरा: "ख़ालिक की 'इनायत के सिवा कुछ भी नहीं है " ।
~इन' आम थानवी


610 वाँ मिसरा: "है उसका निगहबान होना ज़रूरी" ।

~ 'एक शेर कार्यशाला

                                 *****^*****

 जायज़ा लीजिए अलग अलग ज़ावियों से इन मिसरों पर लगाई हुई गिरह का;

609 वें मिसरे: 'ख़ालिक की 'इनायत के सिवा कुछ भी नहीं है' 
पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:


 इस बात से इनकार भला कौन करेगा!
‘ख़ालिक़ की 'इनायत के सिवा कुछ भी नहीं है’।
~के पी सक्सेना, भारत 


इस ग़म भरी दुनिया मे किसी दोस्त का मिलना
‘ख़ालिक़ की 'इनायत के सिवा कुछ भी नहीं है’।
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत


मिट्टी से भी इंसान बना देता है पल में 
‘ख़ालिक़ की 'इनायत के सिवा कुछ भी नहीं है’।
~संजीव दुआ, भारत


मुझको जो मयस्सर है अभी तक वो सभी कुछ
‘ख़ालिक़ की 'इनायत के सिवा कुछ भी नहीं है’।
~सज्जाद अख़्तर, भारत


राहों मे बिछे हैं जो मेरी चाँद सितारे,
‘ख़ालिक़ की 'इनायत के सिवा कुछ भी नहीं है’।
~अनमोल प्रकाश शुक्ला, भारत 


मसनद पे जो क़ाबिज़ हैं ये कुछ कूढ़मगज भी 
‘ख़ालिक़ की 'इनायत के सिवा कुछ भी नहीं है’। 1 l
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


हम जैसे को ये तेरी मोहब्बत जो मिली है, 
‘ख़ालिक़ की 'इनायत के सिवा कुछ भी नहीं है’। 2 l
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


इज़्ज़त, ये मुहब्बत के ज़ख़ीरे, ये मसर्रत,
‘ख़ालिक़ की 'इनायत के सिवा कुछ भी नहीं है’।
~खुर्रम नूर भारत


ये चाँद सितारों का सरे आम निकलना, 
‘ख़ालिक़ की 'इनायत के सिवा कुछ भी नहीं है’।
~रेनू हुसैन भारत


धरती पे उगे अन्न औ मेघों से गिरे जल,
‘ख़ालिक़ की 'इनायत के सिवा कुछ भी नहीं है’।
~ममता 'किरण' भारत


ये साँस की सौग़ात, ये जीवन की कहानी 
‘ख़ालिक़ की 'इनायत के सिवा कुछ भी नहीं है’।
~मनोज 'अबोध' भारत


ये कार, ये बंगला , ये नई शान, ये शौक़त 
‘ख़ालिक़ की 'इनायत के सिवा कुछ भी नहीं है’।
~रूबी मोहंती भारत


ये रहमतें, ये बरकतें,.सब्र ओ सुकूँ साँसें, 
'ख़ालिक की इनायत के सिवा कुछ भी नहीं है।
~कौसर भुट्टो, दुबई 


शामिल हूँ जो दुनिया के तमाशों में अभी तक,
‘ख़ालिक़ की 'इनायत के सिवा कुछ भी नहीं है’।
~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क 


*✨*☀️**✨**


 610 वें मिसरे: ‘है उसका निगहबान होना ज़रूरी’

 पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:


जो मिलना है मिल जाएगा वक्त पर सब 
‘है उसका निगहबान होना ज़रूरी’।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया


फ़क़त राह मिलने से मंज़िल मिली कब, 
‘है उसका निगहबान होना ज़रूरी’।
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत


जो इक रूह रहती है हम सब के भीतर 
‘है उसका निगहबान होना ज़रूरी’।
~लक्ष्मी शंकर वाजपेई भारत


हरिक चीज़ होगी मयस्सर हमें फिर 
‘है उसका निगहबान होना ज़रूरी’।
~ममता किरण भारत


नज़र इक अदद तो सभी को मिली है
‘है उसका निगहबान होना ज़रूरी’।
~प्रज्ञा त्रिवेदी ,भारत


नहीं कोई ताबीज़ यूँ ही फलेगी!
‘है उसका निगहबान होना ज़रूरी’।
~के पी सक्सेना , भारत 


बियाबान जंगल के जैसी है दुनिया 
'है उसका निगहबान होना ज़रूरी' l
~रेनू हुसैन, भारत 


नहीं जीतना कोई भी जंग मुश्किल 
‘है उसका निगहबान होना ज़रूरी’।
~मनोज 'अबोध', भारत


है औक़ात इंसा की क्या,जो करे कुछ 
‘है उसका निगहबान होना ज़रूरी’।
~रूबी मोहंती, भारत


गुज़र हो दिल-ओ-जॉं से बे-फ़िक्री की तो,
‘है उसका निगहबान होना ज़रूरी’।
~ अशोक सिंह , न्यू यॉर्क 


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इस कार्यक्रम का यू-ट्यूब वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करिये:


©️सर्वाधिकार सुरक्षित। इस पोस्ट में साझा किए गए सभी गिरह के शे'र 'एक शे'र अर्ज़ किया है' पटल पर शामिल शायरों के हैं। इनमें से कोई भी शे'र शायर की लिखित पूर्व सहमति के बग़ैर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।

संपादक

~ कौसर भुट्टो, दुबई


 


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