एक शे'र अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित #डिजिटल_वीडियो_गोष्ठी का 305 वाँ तरही मुशायरा कार्यक्रम।
आज का मुशायरा इन दो मिसरों पर आधारित था:
609 वाँ मिसरा: "ख़ालिक की 'इनायत के सिवा कुछ भी नहीं है " ।
~इन' आम थानवी
610 वाँ मिसरा: "है उसका निगहबान होना ज़रूरी" ।
~ 'एक शेर कार्यशाला
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जायज़ा लीजिए अलग अलग ज़ावियों से इन मिसरों पर लगाई हुई गिरह का;
609 वें मिसरे: 'ख़ालिक की 'इनायत के सिवा कुछ भी नहीं है'
पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:
इस बात से इनकार भला कौन करेगा!
‘ख़ालिक़ की 'इनायत के सिवा कुछ भी नहीं है’।
~के पी सक्सेना, भारत
इस ग़म भरी दुनिया मे किसी दोस्त का मिलना
‘ख़ालिक़ की 'इनायत के सिवा कुछ भी नहीं है’।
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत
मिट्टी से भी इंसान बना देता है पल में
‘ख़ालिक़ की 'इनायत के सिवा कुछ भी नहीं है’।
~संजीव दुआ, भारत
मुझको जो मयस्सर है अभी तक वो सभी कुछ
‘ख़ालिक़ की 'इनायत के सिवा कुछ भी नहीं है’।
~सज्जाद अख़्तर, भारत
राहों मे बिछे हैं जो मेरी चाँद सितारे,
‘ख़ालिक़ की 'इनायत के सिवा कुछ भी नहीं है’।
~अनमोल प्रकाश शुक्ला, भारत
मसनद पे जो क़ाबिज़ हैं ये कुछ कूढ़मगज भी
‘ख़ालिक़ की 'इनायत के सिवा कुछ भी नहीं है’। 1 l
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत
हम जैसे को ये तेरी मोहब्बत जो मिली है,
‘ख़ालिक़ की 'इनायत के सिवा कुछ भी नहीं है’। 2 l
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत
इज़्ज़त, ये मुहब्बत के ज़ख़ीरे, ये मसर्रत,
‘ख़ालिक़ की 'इनायत के सिवा कुछ भी नहीं है’।
~खुर्रम नूर भारत
ये चाँद सितारों का सरे आम निकलना,
‘ख़ालिक़ की 'इनायत के सिवा कुछ भी नहीं है’।
~रेनू हुसैन भारत
धरती पे उगे अन्न औ मेघों से गिरे जल,
‘ख़ालिक़ की 'इनायत के सिवा कुछ भी नहीं है’।
~ममता 'किरण' भारत
ये साँस की सौग़ात, ये जीवन की कहानी
‘ख़ालिक़ की 'इनायत के सिवा कुछ भी नहीं है’।
~मनोज 'अबोध' भारत
ये कार, ये बंगला , ये नई शान, ये शौक़त
‘ख़ालिक़ की 'इनायत के सिवा कुछ भी नहीं है’।
~रूबी मोहंती भारत
ये रहमतें, ये बरकतें,.सब्र ओ सुकूँ साँसें,
'ख़ालिक की इनायत के सिवा कुछ भी नहीं है।
~कौसर भुट्टो, दुबई
शामिल हूँ जो दुनिया के तमाशों में अभी तक,
‘ख़ालिक़ की 'इनायत के सिवा कुछ भी नहीं है’।
~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क
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610 वें मिसरे: ‘है उसका निगहबान होना ज़रूरी’
पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:
जो मिलना है मिल जाएगा वक्त पर सब
‘है उसका निगहबान होना ज़रूरी’।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया
फ़क़त राह मिलने से मंज़िल मिली कब,
‘है उसका निगहबान होना ज़रूरी’।
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत
जो इक रूह रहती है हम सब के भीतर
‘है उसका निगहबान होना ज़रूरी’।
~लक्ष्मी शंकर वाजपेई भारत
हरिक चीज़ होगी मयस्सर हमें फिर
‘है उसका निगहबान होना ज़रूरी’।
~ममता किरण भारत
नज़र इक अदद तो सभी को मिली है
‘है उसका निगहबान होना ज़रूरी’।
~प्रज्ञा त्रिवेदी ,भारत
नहीं कोई ताबीज़ यूँ ही फलेगी!
‘है उसका निगहबान होना ज़रूरी’।
~के पी सक्सेना , भारत
बियाबान जंगल के जैसी है दुनिया
'है उसका निगहबान होना ज़रूरी' l
~रेनू हुसैन, भारत
नहीं जीतना कोई भी जंग मुश्किल
‘है उसका निगहबान होना ज़रूरी’।
~मनोज 'अबोध', भारत
है औक़ात इंसा की क्या,जो करे कुछ
‘है उसका निगहबान होना ज़रूरी’।
~रूबी मोहंती, भारत
गुज़र हो दिल-ओ-जॉं से बे-फ़िक्री की तो,
‘है उसका निगहबान होना ज़रूरी’।
~ अशोक सिंह , न्यू यॉर्क
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इस कार्यक्रम का यू-ट्यूब वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करिये:
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संपादक
~ कौसर भुट्टो, दुबई
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