एक शे'र अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित #डिजिटल_वीडियो_गोष्ठी का 304 वाँ तरही मुशायरा कार्यक्रम।
आज का मुशायरा इन दो मिसरों पर आधारित था:
607 वाँ मिसरा: 'उम्र का तंग न पैमाना बनाया होता'।
~ बहादुर शाह ज़फ़र
608 वाँ मिसरा: 'बस अब तो फ़ैसले होंगें यहीं तेरे यहीं मेरे' ।
~ अंजुम ख़ालिक
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जायज़ा लीजिए अलग अलग ज़ावियों से इन मिसरों पर लगाई हुई गिरह का;
607 वें मिसरे: 'उम्र का तंग न पैमाना बनाया होता'
पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:
इंतज़ार उनका था मंजूर क़ज़ा तक भी गर
'उम्र का तंग न पैमाना बनाया होता'। 1 ।
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत
इंतज़ार मिलने का ताउम्र भी कर लेते गर
'उम्र का तंग न पैमाना बनाया होता'। 2 ।
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत
अक़्ल ने दिल से ज़रा पहले सुना होता गर
'उम्र का तंग न पैमाना बनाया होता'।
~अकबर 'शाद' उदयपुरी, भारत
ख़्वाहिशों को जो खुले पँख दिए उड़ने के
'उम्र का तंग न पैमाना बनाया होता'।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया
काम लिक्खे थे मिरे नाम जो दुनिया भर के
'उम्र का तंग न पैमाना बनाया होता'।
~मनोज 'अबोध' भारत
मेरी ख़्वाहिश पे बिठा देना था पहरा या फिर
'उम्र का तंग न पैमाना बनाया होता'।
~ममता 'किरण' भारत
जुस्तजू की नहीं जब तय है हद-ए-इम्कानी,
‘उम्र का तंग न पैमाना बनाया होता’।
~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क
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608 वें मिसरे: 'बस अब तो फ़ैसले होंगें यहीं तेरे यहीं मेरे'
पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:
चले आओ कि बैठें रू-ब-रू होकर के हम दोनों
'बस अब तो फ़ैसले होंगें यहीं तेरे यहीं मेरे' । 1 ।
~प्रज्ञा त्रिवेदी ,भारत
नहीं होती किताबत में कोई ग़लती कभी 'उससे '
'बस अब तो फ़ैसले होंगें यहीं तेरे यहीं मेरे' । 2 ।
~प्रज्ञा त्रिवेदी ,भारत
नहीं है कोई जन्नत दूसरी या फिर जहन्नुम ही
'बस अब तो फ़ैसले होंगें यहीं तेरे यहीं मेरे' ।
~मनोज 'अबोध' भारत
किसी भी इक अदालत से बड़ी अपनी अदालत है
'बस अब तो फ़ैसले होंगें यहीं तेरे यहीं मेरे' ।
~ममता 'किरण' भारत
ख़ुदा मौजूद है दुनिया में तो रोज़े क़यामत क्यों
'बस अब तो फ़ैसले होंगें यहीं तेरे यहीं मेरे' ।
~सज्जाद अख़्तर, भारत
वफ़ा किसने निभाई और किसने बेवफ़ाई की,
'बस अब तो फ़ैसले होंगें यहीं तेरे यहीं मेरे' ।
~अनमोल प्रकाश शुक्ला, भारत
क़यामत तक न रुक पाऊँगी मैं इंसाफ़ की ख़ातिर
‘बस अब तो फ़ैसले होंगे यहीं तेरे यहीं मेरे’ ।
~श्वेता सिंह 'उमा' रूस
मिलेगा क्या अदालत में सिवा पेशी के मेरी जॉं!
'बस अब तो फ़ैसले होंगे यहीं तेरे यहीं मेरे’।
~के पी सक्सेना , भारत
बिताए छै यही है सातवाँ सम्बन्ध अब जानम
'बस अब तो फ़ैसले होंगें यहीं तेरे यहीं मेरे' ।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया
कचहरी कोर्ट दुनिया दारी की बातें न ही आतिश,
‘बस अब तो फ़ैसले होंगे यहीं तेरे यहीं मेरे’।
~ अशोक सिंह , न्यू यॉर्क
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इस कार्यक्रम का यू-ट्यूब वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करिये:
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संपादक
~ कौसर भुट्टो, दुबई
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