रविवार, 11 जनवरी 2026

303 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 10 जनवरी, 2026

303 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 10 जनवरी, 2026

एक‌ शे'र‌ अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित #डिजिटल_वीडियो_गोष्ठी का 303 वाँ तरही मुशायरा कार्यक्रम।

 आज का मुशायरा इन दो मिसरों पर आधारित था:

605 वाँ मिसरा: "हम मुद्दतों उदास रहे कुछ नहीं बना" ।
~कोमल जोविया


606 वाँ मिसरा: "आज तो रूह पे मारा है तमाचा तू ने"।
~ हिमांशी बावरा

                                 *****^*****

 जायज़ा लीजिए अलग अलग ज़ावियों से इन मिसरों पर लगाई हुई गिरह का;

605 वें मिसरे: 'हम मुद्दतों उदास रहे कुछ नहीं बना'

पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:


आ जाये फ़िक्र ओ फ़न का अदब ये ही सोचकर,
 'हम मुद्दतों उदास रहे कुछ नहीं बना'।
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत


उस बेवफ़ा ने भूल के अपनी ख़बर न ली
 'हम मुद्दतों उदास रहे कुछ नहीं बना'।
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


जिसका बना हो हाथ खड़ा कर के बोल दे 
 'हम मुद्दतों उदास रहे कुछ नहीं बना'।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया


सारी ये कायनात हँसी जब वो हँस पड़ी,
 'हम मुद्दतों उदास रहे कुछ नहीं बना' ।
~आलोक 'अविरल', भारत


जब टूटने लगी हमारी निस्बतों की डोर,
'हम मुद्दतों उदास रहे कुछ नहीं बना' ।
~रेनू हुसैन, भारत


उनको बगैर मांगे हर इक शय हुई नसीब,
'हम मुद्दतों उदास रहे कुछ नहीं बना' । 1 l
~सज्जाद अख़्तर, भारत


साला ससुर या सास रहे कुछ नहीं बना 
'हम मुद्दतों उदास रहे कुछ नहीं बना' l 2 l
~सज्जाद अख़्तर, भारत


हर कोई आ गया तेरी दिल जोई के लिए 
'हम मुद्दतों उदास रहे कुछ नहीं बना' l 3 l
~ सज्जाद अख्तर ,भारत 


इक दिन की मयकशी में ही सब कुछ लगे अलग, 
‘हम मुद्दतों उदास रहे कुछ नहीं बना’।
~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क 


*✨*☀️**✨**


 606 वें मिसरे: ‘आज तो रूह पे मारा है तमाचा तू ने’

 पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:


क़ौल पे, अहद- ए- वफ़ा पे मेरे यूँ शक करके
'आज तो रूह पे मारा है तमाचा तूने' l 1 ।
~प्रज्ञा त्रिवेदी ,भारत


बिल डिनर का कभी तुम भी तो चुकाओ , (कहकर)
'आज तो रूह पे मारा है तमाचा तूने' l 2 ।
~प्रज्ञा त्रिवेदी, भारत


बातों बातों में जो अहसान जता बैठा है,
'आज तो रूह पे मारा है तमाचा तू ने' l
~अनमोल प्रकाश शुक्ला, भारत 


छोड़ते आए थे  नादांन समझकर पहले
‘आज तो रूह पे मारा है तमाचा तू ने’।
~के पी सक्सेना , भारत 


ज़ख़्म जो तू ने दिए हैं वो दिखें भी कैसे
‘आज तो रूह पे मारा है तमाचा तू ने’।
~संजीव दुआ, भारत 


बेरुख़ी सामने ग़ैरों के नहीं ठीक सनम 
'आज तो रूह पे मारा है तमाचा तू ने' l
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया


ज़ख़्म चेहरे का ही होता तो मैं सह भी लेता
'आज तो रूह पे मारा है तमाचा तू ने' l
~अकबर 'शाद', भारत


आज देखी है मैंने तल्ख जुबाँ तेरी भी,
'आज तो रूह पे मारा है तमाचा तूने' ।
~रेनू हुसैन, भारत 


कर के शक यूँ मेरी नीयत पे, मेरी ग़ैरत पर,
‘आज तो रूह पे मारा है तमाचा तू ने’।
~ अशोक सिंह , न्यू यॉर्क 


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इस कार्यक्रम का यू-ट्यूब वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करिये:


©️सर्वाधिकार सुरक्षित। इस पोस्ट में साझा किए गए सभी गिरह के शे'र 'एक शे'र अर्ज़ किया है' पटल पर शामिल शायरों के हैं। इनमें से कोई भी शे'र शायर की लिखित पूर्व सहमति के बग़ैर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।

संपादक

~ कौसर भुट्टो, दुबई


 


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