एक शे'र अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित #डिजिटल_वीडियो_गोष्ठी का 302 वाँ तरही मुशायरा कार्यक्रम।
आज का मुशायरा इन दो मिसरों पर आधारित था:
603 वाँ मिसरा: "जो सँभल कर चल रहा था रेंगता देखा गया"।
~ अंजुम लुधियानवी
604 वाँ मिसरा: ''तब कहीं फूल मुस्कुराते हैं" ।
~ अज़्म शाकिरी
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जायज़ा लीजिए अलग अलग ज़ावियों से इन मिसरों पर लगाई हुई गिरह का;
603 वें मिसरे: '"जो सँभल कर चल रहा था रेंगता देखा गया"
पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:
वक्त की रफ़्तार के आगे है बेबस हर कोई,
'जो सँभल कर चल रहा था रेंगता देखा गया' l
~दिगंबर नसवा, मलेशिया
जो भी थे बैसाखियों पर पा गए मंज़िल मगर,
‘जो सँभल कर चल रहा था रेंगता देखा गया’।
~अनमोल शुक्ल 'अनमोल' , भारत
जिसकी थी ग़लती अकड़ता ही रहा रिश्तों में वो,
‘जो सँभल कर चल रहा था रेंगता देखा गया’। 1 ।
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत
सामने तूफ़ाँ के ,बस था टिक सका दुस्साहसी,
‘जो सँभल कर चल रहा था रेंगता देखा गया’। 2 ।
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत
बार्डर पर देख दहशतगर्द को छुपते हुए ,
‘जो सँभल कर चल रहा था रेंगता देखा गया’। 1 ।
~लक्ष्मी शंकर वाजपेई, भारत
जब शिकंजा और भी कसने लगा क़ानून का,
‘जो सँभल कर चल रहा था रेंगता देखा गया’। 2 ।
~लक्ष्मी शंकर वाजपेई, भारत
वो था सत्ता के शिखर पर छल कपट के ज़ोर से ,
‘जो सँभल कर चल रहा था रेंगता देखा गया’।
~ममता किरण, भारत
तिकड़मों की होड़ में शकुनी के पॉंसे ही चलें,
‘जो सँभल कर चल रहा था रेंगता देखा गया’।
~के.पी. सक्सेना, भारत
एक सीधे रास्ते पर चलने वाला आदमी,
‘जो सँभल कर चल रहा था रेंगता देखा गया’।
~सज्जाद अख्तर, भारत
वाहनों और यात्रियों की बेतहाशा भीड़ में,
‘जो सँभल कर चल रहा था रेंगता देखा गया’।
~सज्जाद अख्तर, भारत
जो उसूलों को बताते थे धता वे बढ़ गए,
‘जो सँभल कर चल रहा था रेंगता देखा गया’।
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत
क्या से क्या होता गया इस वक्त की रफ़्तार में ,
‘जो सँभल कर चल रहा था रेंगता देखा गया’।
`रेनू हुसैन भारत
जो परिंदा फ़िक्र से बिंदास था वो उङ गया,
'जो संभल कर चल रहा था, रेंगता देखा गया' ।
आलोक 'अविरल', भारत
फ़ाख्ता कल तक उड़ाते थे जो मन्त्री पद पे हैं,
‘जो सँभल कर चल रहा था रेंगता देखा गया’।
~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क
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604 वें मिसरे: "तब कहीं फूल मुस्कुराते हैं"
पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:
मिट्टी सहती है कितनी तकलीफें
'तब कहीं फूल मुस्कुराते हैं । 1 ।
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत
जब हिफ़ाज़त मिली हो कांटों की
'तब कहीं फूल मुस्कुराते हैं' । 2 ।
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत
जब पसीना बहाता है माली,
'तब कहीं फूल मुस्कुराते हैं। 1 ।
~अनमोल शुक्ल ' अनमोल' , भारत
जब मिले खाद औ हवा पानी,
'तब कहीं फूल मुस्कुराते हैं'। 2 ।
~अनमोल शुक्ल ' अनमोल' , भारत
रंग भरता है रात भर कोई
'तब कहीं फूल मुस्कुराते हैं' ।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया
जब वो हँसता है खिलखिलाकर के
'तब कहीं फूल मुस्कुराते हैं' । 1 ।
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत
बीज उगता है चीरकर मिट्टी
'तब कहीं फूल मुस्कुराते हैं’। 2 ।
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत
जब वो होता है ख़ुश ज़रा सा भी
'तब कहीं फूल मुस्कुराते हैं'। 3 ।
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत
आप जब हमको याद आते हैं
'तब कहीं फूल मुस्कुराते हैं’।
~ सज्जाद अख्तर ,भारत
रात-दिन बागबॉं करे मेहनत
'तब कहीं फूल मुस्कुराते हैं'।
~ममता किरण, भारत
हो कभी कातिले खिज़ाँ मौसम,
'तब कहीं फूल मुस्कुराते हैं'। 1 ।
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत
प्यार देता है जब उन्हें माली
‘तब कहीं फूल मुस्कुराते हैं’। 2 ।
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत
खाद पानी मिले मुहब्बत का
‘तब कहीं फूल मुस्कुराते हैं’। 3 ।
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत
जब हिफ़ाज़त करें कई काँटे
‘तब कहीं फूल मुस्कुराते हैं’। 4 ।
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत
जब मुहब्बत लुटाती है शबनम
‘तब कहीं फूल मुस्कुराते हैं’। 5 ।
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत
जब बहारों का आता है मौसम
‘तब कहीं फूल मुस्कुराते हैं’। 6 ।
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत
जब भ्रमर मिल के गुनगुनाते हैं
‘तब कहीं फूल मुस्कुराते हैं’। 7 ।
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत
सौंप देता है दिल उन्हें माली
‘तब कहीं फूल मुस्कुराते हैं’। 8 ।
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत
जब खिज़ाँ का वज़ूद मिट जाए
‘तब कहीं फूल मुस्कुराते हैं’। 9 ।
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत
रात दिन चैन बागवां खोए
‘तब कहीं फूल मुस्कुराते हैं’। 10 ।
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत
प्रेम की जब हवा चले मोहक
‘तब कहीं फूल मुस्कुराते हैं’। 11 ।
~प्रेम बिहारी मिश्रा, भारत
साथ जब आसमान देता है
'तब कहीं फूल मुस्कुराते हैं’ ।
~के पी सक्सेना, भारत
तितलियाँ चूमती हैं शरमा कर
'तब कहीं फूल मुस्कुराते हैं'।
अनिमेष शर्मा 'आतिश', भारत
जब मुहब्बत दिलों में तारी हो,
'तब कहीं फूल मुस्कुराते हैं'।
रेनू हुसैन, भारत
साल भर धूप सहती है धरती,
'तब कहीं फूल मुस्कुराते हैं' ।
~शिव मोहन सिंह, किर्गिस्तान
भौरों की भन्न जब भनक आए,
'तब कहीं फूल मुस्कुराते हैं’ ।
~ अशोक सिंह , न्यू यॉर्क
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इस कार्यक्रम का यू-ट्यूब वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करिये:
©️सर्वाधिकार सुरक्षित। इस पोस्ट में साझा किए गए सभी गिरह के शे'र 'एक शे'र अर्ज़ किया है' पटल पर शामिल शायरों के हैं। इनमें से कोई भी शे'र शायर की लिखित पूर्व सहमति के बग़ैर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।
संपादक
~ कौसर भुट्टो, दुबई
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