मंगलवार, 17 फ़रवरी 2026

308 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 14 फरवरी, 2026

308 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: 14 फरवरी, 2026

एक‌ शे'र‌ अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित #डिजिटल_वीडियो_गोष्ठी का 307 वाँ तरही मुशायरा कार्यक्रम।

 आज का मुशायरा इन दो मिसरों पर आधारित था:

615 वाँ मिसरा: 'झूठी खुशियों से सच्चा ग़म अच्छा लगता है'।

~ वाली आसी


616 वाँ मिसरा: ' 'मिरी अना भी कहाँ सर झुकाने वाली है'।

 ~ वाली आसी

                                 *****^*****

 जायज़ा लीजिए अलग अलग ज़ावियों से इन मिसरों पर लगाई हुई गिरह का;

615 वें मिसरे: 'झूठी खुशियों से सच्चा ग़म अच्छा लगता है'

पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:


जो सच था वही दिल ने अपनाना सीखा,
‘झूठी ख़ुशियों से सच्चा ग़म अच्छा लगता है’।
~अकबर 'शाद' उदयपुरी, भारत


कब तक यूँ ही सबके आगे हँसना है हमको,
‘झूठी ख़ुशियों से सच्चा ग़म अच्छा लगता है’। 1 ।
~मनोज अबोध भारत


कब तक सारे शे’रों पर ही ‘वा-वा’ करनी है ,
‘झूठी ख़ुशियों से सच्चा ग़म अच्छा लगता है’। 2 ।
~मनोज अबोध भारत


काश कोई लफ़्फ़ाज़ रहनुमा को ये समझा दे,
‘झूठी ख़ुशियों से सच्चा ग़म अच्छा लगता है’। 1 ।
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


अच्छा है जो तेरा असली चेहरा देख लिया ,
‘झूठी ख़ुशियों से सच्चा ग़म अच्छा लगता है’। 2 ।
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत


दर्पण जब-जब कह देता है अभिनय ठीक नहीं ,
‘झूठी ख़ुशियों से सच्चा ग़म अच्छा लगता है’।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया


मरहम का अहसान कभी मंज़ूर नहीं हमको ,
‘झूठी ख़ुशियों से सच्चा ग़म अच्छा लगता है’।
~सज्जाद अख्तर भारत


हो न सकेगा पीतल सोना चाहे जो कर लो ,
‘झूठी ख़ुशियों से सच्चा ग़म अच्छा लगता है’।
~रेनू हुसैन भारत


उनकी लल्लो-चप्पो हमको नेक नही भायी,
‘झूठी ख़ुशियों से सच्चा ग़म अच्छा लगता है’।
~केपी सक्सेना भारत


सबका मन रखने को चाहे हंस लूं मैं लेकिन ,
‘झूठी ख़ुशियों से सच्चा ग़म अच्छा लगता है’।
~ममता 'किरण' भारत


जीवन जीने की है इक ईमानदार कोशिश 
*झूठी खुशियों से सच्चा ग़म अच्छा लगता है।*
~अनमोल प्रकाश शुक्ला, भारत 


इतने झटके इस जीवन में खाए हैं कि अब
‘झूठी ख़ुशियों से सच्चा ग़म अच्छा लगता है’।
~आलोक 'अविरल', भारत


ग़म तो ग़म है, अच्छा लगना मुश्किल है, फिर भी,
‘झूठी ख़ुशियों से सच्चा ग़म अच्छा लगता है’।
~खुर्रम 'नूर', भारत


कितनी देर भला चकमक की चिंगारी रुकती,
‘झूठी ख़ुशियों से सच्चा ग़म अच्छा लगता है’।
~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क 


*✨*☀️**✨**


 616 वें मिसरे: 'मिरी अना भी कहाँ सर झुकाने वाली है'

 पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:

ख़ुदा ने भेजा है शायर बना के धरती पर 
‘मिरी अना भी कहाँ सर झुकाने वाली है’। 1 ।
~लक्ष्मी शंकर वाजपेई भारत


गुरूर है तो रहे उसको अपनी दौलत पर
‘मिरी अना भी कहाँ सर झुकाने वाली है’। 2 ।
~लक्ष्मी शंकर वाजपेई भारत


बड़ा ही नाज है अपनी उन्हें वसीयत पर
‘मिरी अना भी कहाँ सर झुकाने वाली है’।
~के पी सक्सेना , भारत 


मेरी उपज है तो इतना तो मैं समझता हूँ 
‘मिरी अना भी कहाँ सर झुकाने वाली है’।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया


मैं डरने वाली नहीं हूं रसूख़ से उनके 
‘मिरी अना भी कहाँ सर झुकाने वाली है’।
~ममता किरण भारत


वो मुझको देख के मसरूफ़ हो गया कस्दन,
‘मिरी अना भी कहाँ सर झुकाने वाली है’।
~अनमोल प्रकाश शुक्ला, भारत 


वो जितना तोड़ लें मुझको नहीं मैं टूटूंगीं,
‘मिरी अना भी कहाँ सर झुकाने वाली है’।
~रेनू हुसैन, भारत 


तुझे जमाना लगेगा मुझे मनाने में,
'मिरी अना भी कहाँ सर झुकाने वाली है'। 
~सुषमा मल्होत्रा, न्यू जर्सी


मुझे पता है तेरे जौर-ओ-ज़ुल्म की शिद्दत,
'मेरी अना भी कहाँ सर झुकाने वाली है' ।
~डॉ. आदेश त्यागी, भारत


तेरे गुरूर की हद टूटती नहीं जब तक,
मेरी अना भी कहाँ सर झुकाने वाली है।
~मंजुल मंज़र लखनवी


बढ़ेगा हाथ जो उनका न दोस्ती के लिए,
‘मिरी अना भी कहाँ सर झुकाने वाली है’।
~ अशोक सिंह , न्यू यॉर्क 


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इस कार्यक्रम का यू-ट्यूब वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करिये:


©️सर्वाधिकार सुरक्षित। इस पोस्ट में साझा किए गए सभी गिरह के शे'र 'एक शे'र अर्ज़ किया है' पटल पर शामिल शायरों के हैं। इनमें से कोई भी शे'र शायर की लिखित पूर्व सहमति के बग़ैर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।

संपादक

~ कौसर भुट्टो, दुबई


 


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