एक शे'र अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित #डिजिटल_वीडियो_गोष्ठी का 307 वाँ तरही मुशायरा कार्यक्रम।
आज का मुशायरा इन दो मिसरों पर आधारित था:
615 वाँ मिसरा: 'झूठी खुशियों से सच्चा ग़म अच्छा लगता है'।
~ वाली आसी
616 वाँ मिसरा: ' 'मिरी अना भी कहाँ सर झुकाने वाली है'।
~ वाली आसी
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जायज़ा लीजिए अलग अलग ज़ावियों से इन मिसरों पर लगाई हुई गिरह का;
615 वें मिसरे: 'झूठी खुशियों से सच्चा ग़म अच्छा लगता है'
पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:
जो सच था वही दिल ने अपनाना सीखा,
‘झूठी ख़ुशियों से सच्चा ग़म अच्छा लगता है’।
~अकबर 'शाद' उदयपुरी, भारत
कब तक यूँ ही सबके आगे हँसना है हमको,
‘झूठी ख़ुशियों से सच्चा ग़म अच्छा लगता है’। 1 ।
~मनोज अबोध भारत
कब तक सारे शे’रों पर ही ‘वा-वा’ करनी है ,
‘झूठी ख़ुशियों से सच्चा ग़म अच्छा लगता है’। 2 ।
~मनोज अबोध भारत
काश कोई लफ़्फ़ाज़ रहनुमा को ये समझा दे,
‘झूठी ख़ुशियों से सच्चा ग़म अच्छा लगता है’। 1 ।
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत
अच्छा है जो तेरा असली चेहरा देख लिया ,
‘झूठी ख़ुशियों से सच्चा ग़म अच्छा लगता है’। 2 ।
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत
दर्पण जब-जब कह देता है अभिनय ठीक नहीं ,
‘झूठी ख़ुशियों से सच्चा ग़म अच्छा लगता है’।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया
मरहम का अहसान कभी मंज़ूर नहीं हमको ,
‘झूठी ख़ुशियों से सच्चा ग़म अच्छा लगता है’।
~सज्जाद अख्तर भारत
हो न सकेगा पीतल सोना चाहे जो कर लो ,
‘झूठी ख़ुशियों से सच्चा ग़म अच्छा लगता है’।
~रेनू हुसैन भारत
उनकी लल्लो-चप्पो हमको नेक नही भायी,
‘झूठी ख़ुशियों से सच्चा ग़म अच्छा लगता है’।
~केपी सक्सेना भारत
सबका मन रखने को चाहे हंस लूं मैं लेकिन ,
‘झूठी ख़ुशियों से सच्चा ग़म अच्छा लगता है’।
~ममता 'किरण' भारत
जीवन जीने की है इक ईमानदार कोशिश
*झूठी खुशियों से सच्चा ग़म अच्छा लगता है।*
~अनमोल प्रकाश शुक्ला, भारत
इतने झटके इस जीवन में खाए हैं कि अब
‘झूठी ख़ुशियों से सच्चा ग़म अच्छा लगता है’।
~आलोक 'अविरल', भारत
ग़म तो ग़म है, अच्छा लगना मुश्किल है, फिर भी,
‘झूठी ख़ुशियों से सच्चा ग़म अच्छा लगता है’।
~खुर्रम 'नूर', भारत
कितनी देर भला चकमक की चिंगारी रुकती,
‘झूठी ख़ुशियों से सच्चा ग़म अच्छा लगता है’।
~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क
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616 वें मिसरे: 'मिरी अना भी कहाँ सर झुकाने वाली है'
पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:
ख़ुदा ने भेजा है शायर बना के धरती पर
‘मिरी अना भी कहाँ सर झुकाने वाली है’। 1 ।
~लक्ष्मी शंकर वाजपेई भारत
गुरूर है तो रहे उसको अपनी दौलत पर
‘मिरी अना भी कहाँ सर झुकाने वाली है’। 2 ।
~लक्ष्मी शंकर वाजपेई भारत
बड़ा ही नाज है अपनी उन्हें वसीयत पर
‘मिरी अना भी कहाँ सर झुकाने वाली है’।
~के पी सक्सेना , भारत
मेरी उपज है तो इतना तो मैं समझता हूँ
‘मिरी अना भी कहाँ सर झुकाने वाली है’।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया
मैं डरने वाली नहीं हूं रसूख़ से उनके
‘मिरी अना भी कहाँ सर झुकाने वाली है’।
~ममता किरण भारत
वो मुझको देख के मसरूफ़ हो गया कस्दन,
‘मिरी अना भी कहाँ सर झुकाने वाली है’।
~अनमोल प्रकाश शुक्ला, भारत
वो जितना तोड़ लें मुझको नहीं मैं टूटूंगीं,
‘मिरी अना भी कहाँ सर झुकाने वाली है’।
~रेनू हुसैन, भारत
तुझे जमाना लगेगा मुझे मनाने में,
'मिरी अना भी कहाँ सर झुकाने वाली है'।
~सुषमा मल्होत्रा, न्यू जर्सी
मुझे पता है तेरे जौर-ओ-ज़ुल्म की शिद्दत,
'मेरी अना भी कहाँ सर झुकाने वाली है' ।
~डॉ. आदेश त्यागी, भारत
तेरे गुरूर की हद टूटती नहीं जब तक,
मेरी अना भी कहाँ सर झुकाने वाली है।
~मंजुल मंज़र लखनवी
बढ़ेगा हाथ जो उनका न दोस्ती के लिए,
‘मिरी अना भी कहाँ सर झुकाने वाली है’।
~ अशोक सिंह , न्यू यॉर्क
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इस कार्यक्रम का यू-ट्यूब वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करिये:
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संपादक
~ कौसर भुट्टो, दुबई
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