289 वाँ एक शे’र गिरह-नामा: , 4 अक्टूबर,2025
एक शे'र अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित #डिजिटल_वीडियो_गोष्ठी का 289वाँ तरही मुशायरा कार्यक्रम।
आज का मुशायरा इन दो मिसरों पर आधारित था:
577 वाँ मिसरा: 'वगरना उनके दिल में इतनी गहराई नहीं होती'।
~ डॉ कैलाश गुरू स्वामी
578 वाँ मिसरा: ‘ऐ दिल बता तू इतने समय तक कहाँ रहा’।
~ अनिल गहलौत
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जायज़ा लीजिए अलग अलग ज़ावियों से इन मिसरों पर लगाई हुई गिरह का;
577 वें मिसरे: 'वगरना उनके दिल में इतनी गहराई नहीं होती'
पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:
गनीमत है उन्हें याद आ गये शायद पुराने दिन ,
'वगरना उनके दिल में इतनी गहराई नहीं होती' । 1।
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत
चुनावों के है दिन उनको सभी से वोट लेने हैं ,
'वगरना उनके दिल में इतनी गहराई नहीं होती' । 2।
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत
उन्हें मालूम है उनको पड़ेगा काम कुछ दिन में,
'वगरना उनके दिल में इतनी गहराई नहीं होती' । 3।
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत
कहा था कार्डियोलॉजिस्ट ने लेकिन नहीं माने
'वगरना उनके दिल में इतनी गहराई नहीं होती'
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत
सफ़र की धूप में शायद तपे हैं ज़ियादा वो भी,
'वगरना उनके दिल में इतनी गहराई नहीं होती' ।
~ममता किरण , भारत
कोई तो ज़ख़्म है नासूर बन कर जो सुलगता है
'वगरना उनके दिल में इतनी गहराई नहीं होती' ।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया
न जाने कम-सिनी में कितनी ही चोटें मिली होंगी ,
'वगरना उनके दिल में इतनी गहराई नहीं होती' । 1।
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत
उन्होंने ख़ूब साधु संतों का सान्न्ध्यि है पाया
'वगरना उनके दिल मे इतनी गहराई नहीं होती' ।
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत
ये तो हम हैं, तबज्जो जो दे रहे हैं उन्हें हरदम
'वगरना उनके दिल में इतनी गहराई नहीं होती’ ।
~के पी सक्सेना, भारत
मुझे लगता है वो भी प्यार में दिल हार बैठे हैं,
'वगरना उनके दिल में इतनी गहराई नहीं होती' ।
~ अनमोल प्रकाश शुक्ला, भारत
कहानी में उतरता है वो रोता है बिलखता है
‘वगरना उसके दिल में इतनी गहराई नहीं होती’।
~ रेणु हुसैन, भारत
कोई तो ज़ख़्म जा उतरा रग-ए-जाँ में बहुत गहरे,
‘वगरना उनके दिल में इतनी गहराई नहीं होती’। 1।
~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क
गुरु कैलाश के चक्कर का है कोई असर उन पर,
‘वगरना उनके दिल में इतनी गहराई नहीं होती’। 2 ।
~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क
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578 वें मिसरे: ‘‘ऐ दिल बता तू इतने समय तक कहाँ रहा’
पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:
इन तितलियों के बीच ही था बाँटना मुझे
'ऐ दिल बता तू इतने समय तक कहाँ रहा' । 1।
~दिगंबर नासवा, मलेशिया
चिश्मिश सी एक लड़की को देना था प्यार से
'ऐ दिल बता तू इतने समय तक कहाँ रहा' । 2।
~दिगंबर नासवा, मलेशिया
माना कि,कुछ दिनों से बढ़ी है अवारगी!
'ऐ दिल बता तू इतने समय तक कहाँ रहा’।
~के पी सक्सेना, भारत
हर मोड़ शाद ढूँढा तुझे मैंने रात-दिन,
'ऐ दिल बता तू इतने समय तक कहाँ रहा' । 1 ।
~ अकबर शाद 'उदयपुरी', भारत
हर एक लम्हा तेरी कमी ने सताया है,
'ऐ दिल बता तू इतने समय तक कहाँ रहा' । 2।
~ अकबर शाद 'उदयपुरी', भारत
धड़का है तब, कि खेल ये तेरे लगें फ़िज़ूल
'ऐ दिल बता तू इतने समय तक कहाँ रहा' ।
~ प्रज्ञा त्रिवेदी, भारत
मैं चौंक चौंक जाता था अनजाने ख़ौफ़ से
'ऐ दिल बता तू इतने समय तक कहां रहा' ।
~ सज्जाद अख़्तर, भारत
तेरी तलाश थी मुझे हर सिम्त हर तरफ़,
'ऐ दिल बता तू इतने समय तक कहां रहा' ।
~ रेनू हुसैन, भारत
इन धड़कनों से हो रहा आवारगी का शक,
'अय दिल बता तू इतने समय तक कहाँ रहा '।
ख़ुर्रम 'नूर' भारत
धड़कन भी लड़खड़ाई नहीं ऐसे जतन से,
‘ऐ दिल बता तू इतने समय तक कहाँ रहा’।
~ अशोक सिंह , न्यूयॉर्क
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संपादक
~ कौसर भुट्टो, दुबई
Good job -pragya
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