एक शे'र अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित 320 वें सप्ताह का गिरह-नामा ।
आज का गिरह-नामा इन दो मिसरों पर आधारित है:
639 वाँ मिसरा: ''अपनी तनख्वाह कई बार गिनी है मैंने " ।
~ नुसरत सिद्दीकी
640 वाँ मिसरा: ''किसी सूरत मेरी चाहत की उस तक भी ख़बर जाए" ।
~ डॉ० तृप्ति मिश्रा
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जायज़ा लीजिए अलग अलग ज़ावियों से इन मिसरों पर लगाई हुई गिरह का;
639 वें मिसरे: 'अपनी तनख्वाह कई बार गिनी है मैंने'
पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:
नोट दो सौ का है ग़ायब तो कहूँ किससे मैं,
‘अपनी तनख़्वाह कई बार गिनी है मैंने’। 1 ।
~अनमोल प्रकाश शुक्ला, भारत
उसको इतना ,उसे इतना ,उसे इतना देना,
‘अपनी तनख़्वाह कई बार गिनी है मैंने’। 2 ।
~अनमोल प्रकाश शुक्ला, भारत
यार इस बार उधारी न चुका पाऊंगा,
‘अपनी तनख़्वाह कई बार गिनी है मैंने’।
~के पी सक्सेना, भारत
दस्तख़त जिस पे किए उतनी लिफ़ाफ़े में मिली
‘अपनी तनख़्वाह कई बार गिनी है मैंने’।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया
हर खुशी सोच के लेनी पड़ी किस्तों में मुझे,
‘अपनी तनख़्वाह कई बार गिनी है मैंने’। 1 ।
~अकबर शाद उदयपुरी, भारत
दोस्त ही देंगे सहारा तो गुज़ारा होगा,
‘अपनी तनख़्वाह कई बार गिनी है मैंने’। 2 ।
~अकबर शाद उदयपुरी, भारत
ख़्वाहिशो! और किसी दिल में बसो अब जाकर
‘अपनी तनख़्वाह कई बार गिनी है मैंने’। 1 ।
~सज्जाद अख्तर, भारत
इस महीने भी मुझे क़र्ज़ की पीनी होगी
‘अपनी तनख़्वाह कई बार गिनी है मैंने’। 2 ।
~सज्जाद अख्तर, भारत
तू बिरहमन है मेरे बच्चे कोई शौक़ न रख
'अपनी तनख़्वाह कई बार गिनी है मैं ने'।
~डाॅ. आदेश त्यागी, भारत
कर तो रक्खा है डिनर देने का वादा लेकिन
‘अपनी तनख़्वाह कई बार गिनी है मैंने’।
~ लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत
फ़ासला जेब औ ज़रूरत का है बढ़ता जाता
‘अपनी तनख़्वाह कई बार गिनी है मैंने’।
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत
मेरे खर्चों से सदा रहती है थोड़ी सी कम,
‘अपनी तनख़्वाह कई बार गिनी है मैंने’।
~खुर्रम नूर भारत
खर्च इस बार भी मुश्किल से ही चल पाएगा
‘अपनी तनख़्वाह कई बार गिनी है मैंने’।
~रेनू हुसैन, भारत
तुमको इस बार भी शॉपिंग न करा पाऊँगा
‘अपनी तनख़्वाह कई बार गिनी है मैंने’।
~मनोज 'अबोध', भारत
हैसियत है नहीं खर्चे करूं पूरे घर के
‘अपनी तनख़्वाह कई बार गिनी है मैंने’। 1 ।
~ममता 'किरण', भारत
पैसा छुट्टी का लगे काट लिया है उसने,
‘अपनी तनख़्वाह कई बार गिनी है मैंने’। 2 ।
~ममता 'किरण', भारत
शौक़ पर खर्च करूँ कैसे ये मुमकिन ही नहीं
‘अपनी तनख़्वाह कई बार गिनी है मैंने’।
~अनिमेष शर्मा 'आतिश', भारत
कम पड़ी है ये हमेशा ही सभी खर्चों से
‘अपनी तनख़्वाह कई बार गिनी है मैंने’।
आलोक अविरल, भारत
एक भी नोट इधर से न उधर कर देना,
‘अपनी तनख़्वाह कई बार गिनी है मैंने’।
~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क
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640 वें मिसरे: 'किसी सूरत मेरी चाहत की उस तक भी ख़बर जाए '
पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:
नहीं कुछ और सूझे है सिवा इसके कि ऐ ऑका,
'किसी सूरत मेरी चाहत की उस तक भी ख़बर जाए’।
~के पी सक्सेना, भारत
उसे ही प्यार करता हूँ उसी पर जाँ छिड़कता हूँ
'किसी सूरत मेरी चाहत की उस तक भी ख़बर जाए'।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया
उठा ले काश मेरा ख़त जो फेंका राह में उसकी,
'किसी सूरत मेरी चाहत की उस तक भी ख़बर जाए '।
~अनमोल प्रकाश शुक्ला, भारत
मेरी दीवानगी का उसको शायद ही पता होगा
'किसी सूरत मेरी चाहत की उस तक भी ख़बर जाए '।
~लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत
कबूतर, नामाबर, ईमेल, मोबाइल हो या कुछ हो
'किसी सूरत मेरी चाहत की उस तक भी ख़बर जाये'।
~डाॅ. आदेश त्यागी, भारत
वो डरता है मुहब्बत से मुझे ये इल्म है फिर भी
'किसी सूरत मेरी चाहत की उस तक भी ख़बर जाए'।
~प्रज्ञा त्रिवेदी ,भारत
मैं देखूँ उसको जी भरके मेरे हो सामने दिलबर
'किसी सूरत मेरी चाहत की उस तक भी ख़बर जाए’।
~रेनू हुसैन, भारत
उसी की याद रखता हूं मैं अपनी हर दुआओं में,
'किसी सूरत मेरी चाहत की उस तक भी ख़बर जाए’।
~अकबर शाद उदयपुरी, भारत
बुलाओ प्रेस को तुम,मैं इधर ‘टंकी’ पे चढ़ता हूँ
‘किसी सूरत मेरी चाहत की उस तक भी ख़बर जाए’।
~मनोज 'अबोध', भारत
मैं हर पल रब से अब ये ही दुआ बस करती रहती हूं
'किसी सूरत मेरी चाहत की उस तक भी ख़बर जाए'।
~ममता किरण, भारत
सरे महफ़िल जो उसने दफ़अतन मुङ मुड़ के देखा है
'किसी सूरत मेरी चाहत की उस तक भी ख़बर जाए'।
~अनिमेष शर्मा 'आतिश', भारत
हमें कहना नहीं आता वो आंखें पढ़ नहीं सकता,
'किसी सूरत मेरी चाहत की उस तक भी ख़बर जाए' । 1 ।
~कौसर भुट्टो, दुबई
मेरी बेचैनियों का कुछ असर उस दिल पे भी तो हो,
'किसी सूरत मेरी चाहत की उस तक भी ख़बर जाए'। 2 ।
~कौसर भुट्टो, दुबई
हवाओं में घटाओं में धनक की इन शुआओं में,
‘किसी सूरत मेरी चाहत की उस तक भी ख़बर जाए’।
~ अशोक सिंह , न्यू यॉर्क
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©️सर्वाधिकार सुरक्षित। इस पोस्ट में साझा किए गए सभी गिरह के शे'र 'एक शे'र अर्ज़ किया है' पटल पर शामिल शायरों के हैं। इनमें से कोई भी शे'र शायर की लिखित पूर्व सहमति के बग़ैर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।
संपादक
~ कौसर भुट्टो, दुबई
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