एक शे'र अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित 322 वाँ सप्ताह गिरह-नामा।
आज का मुशायरा इन दो मिसरों पर आधारित था:
643 वाँ मिसरा: 'दिलों के खेल में ख़ुद्दारियां नहीं चलती' ।
~ कैफ़ भोपाली
644 वाँ मिसरा: 'प्यार की मदहोश खुशबू का खजाना चाहिए' ।
~ रवींद्र प्रकाश हंस' ।
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जायज़ा लीजिए अलग अलग ज़ावियों से इन मिसरों पर लगाई हुई गिरह का;
643 वें मिसरे: 'दिलों के खेल में ख़ुद्दारियां नहीं चलती'
पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:
निभा सको तो निभाओ ज़रा सा झुक करके
'दिलों के खेल में ख़ुद्दारियां नहीं चलती' ।
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत
ग़ुरूर-ओ-ज़ात नहीं पूछती मोहब्बत भी,
'दिलों के खेल में ख़ुद्दारियां नहीं चलती' । 1 ।
~अकबर शाद 'उदयपुरी' भारत
कभी जो टूट के चाहो तो खुद समझ जाओ,
'दिलों के खेल में ख़ुद्दारियां नहीं चलती' । 2 l
~अकबर शाद 'उदयपुरी' भारत
बुरा नही है ये चिसमिश अगर लड़े भी अब
'दिलों के खेल में ख़ुद्दारियां नहीं चलती' । 3 l
~अकबर शाद 'उदयपुरी' भारत
यहां तो हार में भी जश्न जीत का होगा
'दिलों के खेल में ख़ुद्दारियां नहीं चलती' ।
~सज्जाद अख्तर, भारत
ख़ुदी के सख़्त उसूलों का इश्क़ में क्या काम
'दिलों के खेल में ख़ुद्दारियाँ नहीं चलतीं' ।
~डाॅ. आदेश त्यागी, भारत
सरों के बल भी मुहब्बत में चलना पड़ता है
'दिलों के खेल में ख़ुद्दारियां नहीं चलती' ।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया
कि बाज़ वक्त अना को भुलाना पड़ता है
'दिलों के खेल में ख़ुद्दारियां नहीं चलती'।
~ममता 'किरण', भारत
मुझे ख़बर ही नहीं ख़ुद की भी सिवा उसके
‘दिलों के खेल में ख़ुद्दारियां नहीं चलतीं’।
~रेनू हुसैन, भारत
अना का काम कोई हैं नहीं मोहब्बत में,
‘दिलों के खेल में ख़ुद्दारियां नहीं चलतीं’।
~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क
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644 वें मिसरे: 'प्यार की मदहोश खुशबू का खजाना चाहिए'
पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:
नाम लिख्खे जाएँगे, वे सामने आएँ, जिन्हें
'प्यार की मदहोश खुशबू का खजाना चाहिए'।
~मनोज 'अबोध', भारत
नाम तुम लिक्खो न लिक्खो आशिकों में पर हमें
'प्यार की मदहोश खुशबू का खजाना चाहिए'।
~अनिमेष शर्मा, भारत
चाँदनी रातों को सर पहलू में रखकर आपका,
'प्यार की मदहोश खुशबू का खजाना चाहिए'।
~अनमोल प्रकाश शुक्ला, भारत
वो चला सरहद प तो उसने कहा ये, कब मुझे
'प्यार की मदहोश खुशबू का खजाना चाहिए'। 1 l
~रेनू हुसैन, भारत
और कुछ ज़्यादा नहीं पर एक ख़्वाहिश है मेरी
'प्यार की मदहोश खुशबू का खजाना चाहिए'। 2 l
~रेनू हुसैन, भारत
दूर से ही कर सकूँ महसूस जिसको बा-रहा
'प्यार की मदहोश खुशबू का खजाना चाहिए'।
~प्रज्ञा त्रिवेदी ,भारत
यूँ न केवल सन्दली साँसों की बख़्शिश से नवाज़
'प्यार की मदहोश ख़ुशबू का ख़ज़ाना चाहिये' ।
~डाॅ. आदेश त्यागी, भारत
आप दो या आप दो या आप दो हमको तो बस
'प्यार की मदहोश खुशबू का खजाना चाहिए'।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया
सोने चॉंदी के ख़ज़ाने की नहीं हमको तलब
'प्यार की मदहोश खुशबू का खजाना चाहिए'।
~ममता किरण, भारत
चाहतों की दिल को अब भीनी महक काफ़ी नहीं,
'प्यार की मदहोश खुशबू का ख़ज़ाना चाहिए' ।
~खुर्रम नूर, भारत
इस दिल-ए-ख़ुश-फ़ह्म को बस है यही ज़िद आजकल,
‘प्यार की मदहोश ख़ुशबू का ख़जाना चाहिए’।
~ अशोक सिंह , न्यू यॉर्क
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संपादक
~ कौसर भुट्टो, दुबई
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