मंगलवार, 26 मई 2026

322 वाँ सप्ताह एक शे’र गिरह-नामा: 23 मई, 2026

322 वाँ सप्ताह एक शे’र गिरह-नामा: 23 मई, 2026

एक‌ शे'र‌ अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित 322 वाँ सप्ताह गिरह-नामा।

 आज का मुशायरा इन दो मिसरों पर आधारित था:

643 वाँ मिसरा: 'दिलों के खेल में ख़ुद्दारियां नहीं चलती' । 

~ कैफ़ भोपाली 


644 वाँ मिसरा: 'प्यार की मदहोश खुशबू का खजाना चाहिए' ।

~ रवींद्र प्रकाश हंस' । 

                                 *****^*****

 जायज़ा लीजिए अलग अलग ज़ावियों से इन मिसरों पर लगाई हुई गिरह का;

643 वें मिसरे: 'दिलों के खेल में ख़ुद्दारियां नहीं चलती'

पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:


निभा सको तो निभाओ ज़रा सा झुक करके
 'दिलों के खेल में ख़ुद्दारियां नहीं चलती' ।
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत


ग़ुरूर-ओ-ज़ात नहीं पूछती मोहब्बत भी,
 'दिलों के खेल में ख़ुद्दारियां नहीं चलती' । 1 ।
~अकबर शाद 'उदयपुरी' भारत


कभी जो टूट के चाहो तो खुद समझ जाओ,
  'दिलों के खेल में ख़ुद्दारियां नहीं चलती' । 2 l
~अकबर शाद 'उदयपुरी' भारत


बुरा नही है ये चिसमिश अगर लड़े भी अब
 'दिलों के खेल में ख़ुद्दारियां नहीं चलती' । 3 l
~अकबर शाद 'उदयपुरी' भारत


यहां तो हार में भी जश्न जीत का होगा
 'दिलों के खेल में ख़ुद्दारियां नहीं चलती' ।
~सज्जाद अख्तर, भारत


ख़ुदी के सख़्त उसूलों का इश्क़ में क्या काम 
'दिलों के खेल में ख़ुद्दारियाँ नहीं चलतीं' ।
~डाॅ. आदेश त्यागी, भारत


सरों के बल भी मुहब्बत में चलना पड़ता है 
 'दिलों के खेल में ख़ुद्दारियां नहीं चलती' ।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया


कि बाज़ वक्त अना को भुलाना पड़ता है 
 'दिलों के खेल में ख़ुद्दारियां नहीं चलती'।
~ममता 'किरण', भारत


मुझे ख़बर ही नहीं ख़ुद की भी सिवा उसके
 ‘दिलों के खेल में ख़ुद्दारियां नहीं चलतीं’।
~रेनू हुसैन, भारत 


अना का काम कोई हैं नहीं मोहब्बत में,
‘दिलों के खेल में ख़ुद्दारियां नहीं चलतीं’।
~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क 


*✨*☀️**✨**


 644 वें मिसरे: 'प्यार की मदहोश खुशबू का खजाना चाहिए'

 पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:



नाम लिख्खे जाएँगे, वे सामने आएँ, जिन्हें 
'प्यार की मदहोश खुशबू का खजाना चाहिए'।
~मनोज 'अबोध', भारत 


नाम तुम लिक्खो न लिक्खो आशिकों में पर हमें
'प्यार की मदहोश खुशबू का खजाना चाहिए'।
~अनिमेष शर्मा, भारत


चाँदनी रातों को सर पहलू में रखकर आपका,
'प्यार की मदहोश खुशबू का खजाना चाहिए'।
~अनमोल प्रकाश शुक्ला, भारत 


वो चला सरहद प तो उसने कहा ये, कब मुझे
'प्यार की मदहोश खुशबू का खजाना चाहिए'। 1 l
~रेनू हुसैन, भारत 


और कुछ ज़्यादा नहीं पर एक ख़्वाहिश है मेरी 
'प्यार की मदहोश खुशबू का खजाना चाहिए'। 2 l
~रेनू हुसैन, भारत


दूर से ही कर सकूँ महसूस जिसको बा-रहा
'प्यार की मदहोश खुशबू का खजाना चाहिए'।
~प्रज्ञा त्रिवेदी ,भारत


यूँ न केवल सन्दली साँसों की बख़्शिश से नवाज़ 
'प्यार की मदहोश ख़ुशबू का ख़ज़ाना चाहिये' ।
~डाॅ. आदेश त्यागी, भारत


आप दो या आप दो या आप दो हमको तो बस 
'प्यार की मदहोश खुशबू का खजाना चाहिए'।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया


सोने चॉंदी के ख़ज़ाने की नहीं हमको तलब
'प्यार की मदहोश खुशबू का खजाना चाहिए'।
~ममता किरण, भारत


चाहतों की दिल को अब भीनी महक काफ़ी नहीं, 
'प्यार की मदहोश खुशबू का ख़ज़ाना चाहिए' ।
~खुर्रम नूर, भारत


इस दिल-ए-ख़ुश-फ़ह्‌म को बस है यही ज़िद आजकल,
‘प्यार की मदहोश ख़ुशबू का ख़जाना चाहिए’।
~ अशोक सिंह , न्यू यॉर्क 


****^*****


इस कार्यक्रम का यू-ट्यूब वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करिये:



©️सर्वाधिकार सुरक्षित। इस पोस्ट में साझा किए गए सभी गिरह के शे'र 'एक शे'र अर्ज़ किया है' पटल पर शामिल शायरों के हैं। इनमें से कोई भी शे'र शायर की लिखित पूर्व सहमति के बग़ैर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।

संपादक

~ कौसर भुट्टो, दुबई


 


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

332 वाँ सप्ताह एक शे’र गिरह-नामा: 1 अगस्त, 2026

 332 वाँ सप्ताह एक शे’र गिरह-नामा: 1 अगस्त, 2026 एक‌ शे'र‌ अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित  332 वाँ सप्ताहिक गिरह...