एक शे'र अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित 323 वाँ साप्ताहिक ब्लॉग ।
आज का मुशायरा इन दो मिसरों पर आधारित था:
645 वाँ मिसरा: 'और जब पलटे क़यामत ढा गए'।
~ अहमद नसीम कासमी
646 वाँ मिसरा: 'राज़ दिल के तो निगाहों से अदा होते हैं'।
~ मजरूह सुल्तानपुरी' ।
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जायज़ा लीजिए अलग अलग ज़ावियों से इन मिसरों पर लगाई हुई गिरह का;
645 वें मिसरे: 'और जब पलटे क़यामत ढा गए '
पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:
उनके चलने की अदा क़ातिल ही थी
‘और जब पलटे क़यामत ढा गए’।
~रेनू हुसैन, भारत
इक तरफ़ सिक के थे अध पक्के कबाब,
'और जब पलटे क़यामत ढा गए'।
खुर्रम नूर भारत
उनकी आमद जैसे रोज़ ए रस्त ख़ेज़
'और जब पलटे क़यामत ढा गए'।
खुर्रम नूर भारत
मुस्कुराये मुझसे थोड़ा दूर चल,
'और जब पलटे क़यामत ढा गए'।
~अनमोल प्रकाश शुक्ला, भारत
हार कर वो इक क़दम पीछे हटे
'और जब पलटे क़यामत ढा गये' ।
~ममता 'किरण', भारत
आये थे लड़ के क़यामत से करीब
'और जब पलटे क़यामत ढा गए'।
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत
रूबरू थे तो उड़ा रखे थे होश
'और जब पलटे क़यामत ढा गए'।
~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क
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646 वें मिसरे: 'राज़ दिल के तो निगाहों से अदा होते हैं '
पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:
दिल के अफ़्साने ज़ुबाँ तक नहीं आया करते,
'राज़ दिल के तो निगाहों से अदा होते हैं'।
~अकबर शाद उदयपुरी, भारत
फेर लो, ढक लो, छुपा लो, न इन्हें पढ़ने दो
'राज़ दिल के तो निगाहों से अदा होते हैं'।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया
लाख कोशिश करो पर न छुपा पाओगे
‘राज़ दिल के तो निगाहों से अदा होते हैं’।
~आलोक अविरल, भारत
इश्क़ लफ़्ज़ों का तो हर्गिज़ भी नहीं है मोहताज
'राज़ दिल के तो निगाहों से अदा होते हैं'। 1 l
~प्रज्ञा त्रिवेदी ,भारत
छुप न पाएंगे तबस्सुम के लिफ़ाफ़ों में ग़म
'राज़ दिल के तो निगाहों से अदा होते हैं'। 2 l
~प्रज्ञा त्रिवेदी ,भारत
आप ये बात न पूछें कि मुहब्बत है क्या,
'राज़ दिल के तो निगाहों से अदा होते हैं'।
~अनिमेष शर्मा भारत
मुझसे मत पूछ मेरे दर्द भरे दिल का सबब
'राज़ दिल के तो निगाहों से अदा होते हैं'।
~रेनू हुसैन, भारत
करते गप-शप न लब-ए-नम ये मोहब्बत में कोई,
‘राज़ दिल के तो निगाहों से अदा होते हैं’।
~ अशोक सिंह , न्यू यॉर्क
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इस कार्यक्रम का यू-ट्यूब वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करिये:
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संपादक
~ कौसर भुट्टो, दुबई
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