गुरुवार, 4 जून 2026

323 वाँ सप्ताह एक शे’र गिरह-नामा: 30 मई, 2026

323 वाँ सप्ताह एक शे’र गिरह-नामा: 30 मई, 2026

एक‌ शे'र‌ अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित 323 वाँ साप्ताहिक ब्लॉग ।

 आज का मुशायरा इन दो मिसरों पर आधारित था:

 645 वाँ मिसरा: 'और जब पलटे क़यामत ढा गए'।

~ अहमद नसीम कासमी 


646 वाँ मिसरा: 'राज़ दिल के तो निगाहों से अदा होते हैं'।

 ~ मजरूह सुल्तानपुरी' । 


                                 *****^*****

 जायज़ा लीजिए अलग अलग ज़ावियों से इन मिसरों पर लगाई हुई गिरह का;

645 वें मिसरे: 'और जब पलटे क़यामत ढा गए ' 

पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:


उनके चलने की अदा क़ातिल ही थी 
‘और जब पलटे क़यामत ढा गए’।
~रेनू हुसैन, भारत


इक तरफ़ सिक के थे अध पक्के कबाब, 
'और जब पलटे क़यामत ढा गए'।
खुर्रम नूर भारत


उनकी आमद जैसे रोज़ ए रस्त ख़ेज़
'और जब पलटे क़यामत ढा गए'।
खुर्रम नूर भारत


मुस्कुराये मुझसे थोड़ा दूर चल,
'और जब पलटे क़यामत ढा गए'।
~अनमोल प्रकाश शुक्ला, भारत 


हार कर वो इक क़दम पीछे हटे
'और जब पलटे क़यामत ढा गये' ।
~ममता 'किरण', भारत


आये थे लड़ के क़यामत से करीब
 'और जब पलटे क़यामत ढा गए'।
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत


रूबरू थे तो उड़ा रखे थे होश
'और जब पलटे क़यामत ढा गए'।
~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क 


*✨*☀️**✨**


 646 वें मिसरे: 'राज़ दिल के तो निगाहों से अदा होते हैं ' 

 पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:


दिल के अफ़्साने ज़ुबाँ तक नहीं आया करते,
'राज़ दिल के तो निगाहों से अदा होते हैं'।
~अकबर शाद उदयपुरी, भारत 


फेर लो, ढक लो, छुपा लो, न इन्हें पढ़ने दो 
'राज़ दिल के तो निगाहों से अदा होते हैं'।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया


लाख कोशिश करो पर न छुपा पाओगे
‘राज़ दिल के तो निगाहों से अदा होते हैं’।
~आलोक अविरल, भारत


इश्क़ लफ़्ज़ों का तो हर्गिज़ भी नहीं है मोहताज
'राज़ दिल के तो निगाहों से अदा होते हैं'। 1 l
~प्रज्ञा त्रिवेदी ,भारत


छुप न पाएंगे तबस्सुम के लिफ़ाफ़ों में ग़म
'राज़ दिल के तो निगाहों से अदा होते हैं'। 2 l
~प्रज्ञा त्रिवेदी ,भारत


आप ये बात न पूछें कि मुहब्बत है क्या,
 'राज़ दिल के तो निगाहों से अदा होते हैं'।
~अनिमेष शर्मा भारत


मुझसे मत पूछ मेरे दर्द भरे दिल का सबब
'राज़ दिल के तो निगाहों से अदा होते हैं'।
~रेनू हुसैन, भारत 


करते गप-शप न लब-ए-नम ये मोहब्बत में कोई,
‘राज़ दिल के तो निगाहों से अदा होते हैं’।
~ अशोक सिंह , न्यू यॉर्क 


****^*****


इस कार्यक्रम का यू-ट्यूब वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करिये:


©️सर्वाधिकार सुरक्षित। इस पोस्ट में साझा किए गए सभी गिरह के शे'र 'एक शे'र अर्ज़ किया है' पटल पर शामिल शायरों के हैं। इनमें से कोई भी शे'र शायर की लिखित पूर्व सहमति के बग़ैर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।

संपादक

~ कौसर भुट्टो, दुबई


 


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

332 वाँ सप्ताह एक शे’र गिरह-नामा: 1 अगस्त, 2026

 332 वाँ सप्ताह एक शे’र गिरह-नामा: 1 अगस्त, 2026 एक‌ शे'र‌ अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित  332 वाँ सप्ताहिक गिरह...