बुधवार, 24 जून 2026

325 वाँ सप्ताह एक शे’र गिरह-नामा: 13 जून, 2026

 325 वाँ सप्ताह एक शे’र गिरह-नामा: 13 जून, 2026

एक‌ शे'र‌ अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित 322 वाँ सप्ताह गिरह-नामा।

 आज का मुशायरा इन दो मिसरों पर आधारित था:

649 वाँ मिसरा: 'तुम परिंदे  हो वतन छोड़ के जा सकते हो' ।

~अम्मार इक़बाल


 650 वाँ मिसरा: 'रोज़ जीना रोज़ मरना चाहिए'।

~ अंजुम रहबर
                                 *****^*****

 जायज़ा लीजिए अलग अलग ज़ावियों से इन मिसरों पर लगाई हुई गिरह का;

649 वें मिसरे: 'तुम परिंदे  हो वतन छोड़ के जा सकते हो'

पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:


सरहदें तो हैं बनाई गईं मेरी ख़ातिर
‘तुम परिंदे हो वतन छोड़ के जा सकते हो’।
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत


हम तो मिट्टी की मुहब्बत में यहाँ रहते हैं 
‘तुम परिंदे हो वतन छोड़ के जा सकते हो’।
~रेनू हुसैन, भारत 


हम हैं इंसान जहाँ जन्मे वहीं मरते हैं,
‘तुम परिंदे हो वतन छोड़ के जा सकते हो’।
~अनिमेष शर्मा, भारत


देश और माँ को नहीं छोड़ के जाते हम लोग 
'तुम परिन्दे हो, वतन छोड़ के जा सकते हो' ।
~डाॅ. आदेश त्यागी, भारत


ये गगन पंख ये परवाज़ तुम्हारा हक़ है 
'तुम परिन्दे हो वतन छोड़ के जा सकते हो' ।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया


मेरी आँखों में तेरे ख़्वाब का रहता है वतन
‘तुम परिंदे हो वतन छोड़ के जा सकते हो’।
~अकबर शाद 'उदयपुरी' भारत


मुझको तो प्यारी है अपने ही वतन की मिट्टी 
‘तुम परिंदे हो वतन छोड़ के जा सकते हो’।
~ममता 'किरण', भारत


हम तो वो पेड़ हैं जो अपनी जड़ों से हैं जुड़े
‘तुम परिंदे हो वतन छोड़ के जा सकते हो’।
~डॉ. भावना कुँअर, ऑस्ट्रेलिया


आसरा तुमको दें वो पेड़ हैं हम गुलशन के
‘तुम परिंदे हो वतन छोड़ के जा सकते हो’।
~प्रगीत कुँअर, ऑस्ट्रेलिया


हमने तो बांध लिया खुद को जड़ों से अपनी
‘तुम परिंदे हो वतन छोड़ के जा सकते हो’।
~सज्जाद अख्तर, भारत


हम तो इंसान हैं, मिट्टी से मुहब्बत हमको,
‘तुम परिंदे हो वतन छोड़ के जा सकते हो’।
~खुर्रम नूर भारत


हम तो मिट्टी से जुड़े बस्ती के बाशिंदे हैं,
‘तुम परिंदे हो वतन छोड़ के जा सकते हो’।
~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क 


*✨*☀️**✨**


  650 वें मिसरे:  'रोज़ जीना रोज़ मरना चाहिए'

 पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:


रात है मृत्यु सुबह जीवन, यहाँ
'रोज़ जीना रोज़ मरना चाहिए' l
~प्रज्ञा त्रिवेदी ,भारत


फ़लसफ़ा ये भी बहुत अच्छा लगा,
'रोज़ जीना रोज़ मरना चाहिए' l
~अनिमेष शर्मा, भारत


ये भी कोई फिलसफ़ा है दोस्तो!
'रोज़ जीना रोज़ मरना चाहिए’।
~के.पी. सक्सेना, भारत


वो ग़लत है कह रहा है जो ये बात,
‘रोज़ जीना रोज़ मरना चाहिए’।
~अनमोल प्रकाश शुक्ला, भारत 


फ़ालतू बकवास झूठा ज्ञान है 
'रोज़ जीना रोज़ मारना चाहिए' l
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया


अब तो आदत सी हुई है ज़िंदगी 
‘रोज़ जीना रोज़ मरना चाहिए’।
~रेनू हुसैन, भारत


सीख सूरज से हमें मिलती यही
 'रोज़ जीना रोज़ मरना चाहिए'।
~ममता किरण, भारत


कौन है आख़िर जो कह कर मर गया
'रोज़ जीना, रोज़ मरना चाहिये' l
~डाॅ. आदेश त्यागी, भारत


ज़िंदगी जब बोझ हो जाए तो फिर 
‘रोज़ जीना रोज़ मरना चाहिए’।
~सज्जाद अख्तर, भारत


जिंदगी को खूब जीना चाहिए,
‘रोज़ जीना रोज़ मरना चाहिए’।
~अकबर शाद 'उदयपुरी' भारत


कह गईं लहरें हमारे कान में 
'रोज़ जीना रोज़ मरना चाहिए'l
~डॉ० भावना कुँअर, ऑस्ट्रेलिया


साँस के आवागमन ने ये कहा
 ‘रोज़ जीना रोज़ मरना चाहिए’।
~प्रगीत कुँअर, ऑस्ट्रेलिया


प्यार पाना चाहते हो तुम अगर 
 ‘रोज़ जीना रोज़ मरना चाहिए’।
~प्रेम बिहारी मिश्रा , भारत


चंद पैसों के लिए क्यों आदमी,
 रोज़ जीना रोज़ मरना चाहिए
~आलोक अविरल, भारत


जाने किस ने दे दिया ये फ़लसफ़ा,
‘रोज़ जीना रोज़ मरना चाहिए’।
~ अशोक सिंह , न्यू यॉर्क 


****^*****


इस कार्यक्रम का यू-ट्यूब वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करिये:


©️सर्वाधिकार सुरक्षित। इस पोस्ट में साझा किए गए सभी गिरह के शे'र 'एक शे'र अर्ज़ किया है' पटल पर शामिल शायरों के हैं। इनमें से कोई भी शे'र शायर की लिखित पूर्व सहमति के बग़ैर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।

संपादक

~ कौसर भुट्टो, दुबई


 


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

332 वाँ सप्ताह एक शे’र गिरह-नामा: 1 अगस्त, 2026

 332 वाँ सप्ताह एक शे’र गिरह-नामा: 1 अगस्त, 2026 एक‌ शे'र‌ अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित  332 वाँ सप्ताहिक गिरह...