एक शे'र अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित 326 वाँ सप्ताह गिरह-नामा।
आज का मुशायरा इन दो मिसरों पर आधारित था:
651 वाँ मिसरा: 'वो मेरे साथ रहा और मुझे कभी न मिला'।
~ बशीर बद्र
652 वाँ मिसरा: 'किसी आवारा बादल सा गुज़र जा'।
~ राजेंद्र नाथ 'रहबर'
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जायज़ा लीजिए अलग अलग ज़ावियों से इन मिसरों पर लगाई हुई गिरह का;
651 वें मिसरे: 'वो मेरे साथ रहा और मुझे कभी न मिला'
पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:
किया तलाश जो भीतर था आदमी मुझ में
'वो मेरे साथ रहा और मुझे कभी न मिला' l
~लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत
हमारा क़ुर्ब था कुछ रात और सहर की तरह
'वो मेरे साथ रहा और मुझे कभी न मिला'l
~डाॅ. आदेश त्यागी, भारत
न जाने कैसा रहा रिश्ता मेरा साथ उसके
'वो मेरे साथ रहा और मुझे कभी न मिला'।
~ममता 'किरण', भारत
मैं इसको कातिबे तक़दीर की रज़ा समझूँ?
'वो मेरे साथ रहा और मुझे कभी न मिला' l
~सज्जाद अख्तर, भारत
करेगा कौन यकीं हाय इस मुक़द्दर पर!
'वो मेरे साथ रहा और मुझे कभी न मिला’ l
~के पी सक्सेना, भारत
वो मेरा ख़ाब था , अहसास था कि और ही कुछ
'वो मेरे साथ रहा और मुझे कभी न मिला' l 1 l
~रेनू हुसैन, भारत
निभा रहा था मेरा इश्क़ यूँ रवायत में
'वो मेरे साथ रहा और मुझे कभी न मिला'l 2 l
~रेनू हुसैन, भारत
अगर बताऊँ हक़ीक़त तो कोई मानेगा
'वो मेरे साथ रहा और मुझे कभी न मिला' l
~अनिमेष शर्मा, भारत
न जाने कौन से कोने में छुपा था दिल के
'वो मेरे साथ रहा और मुझे कभी न मिला'l
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया
तमाम उम्र उसे ढूँढ़ता रहा ख़ुद में
‘वो मेरे साथ रहा और मुझे कभी न मिला’ l
~मनोज अबोध, भारत
हमारी जीस्त रही जैसे रेल की पटरी,
'वो मेरे साथ रहा औऱ मुझे कभी न मिला'।
~अनमोल प्रकाश शुक्ला, भारत
नहीं मैं मानती ऐसा जो लोग कहते हैं
‘वो मेरे साथ रहा और मुझे कभी न मिला’
~डॉ० भावना कुँअर, ऑस्ट्रेलिया
किसी नदी के जैसे साथ दो किनारे हों,
‘वो मेरे साथ रहा और मुझे कभी न मिला’। 1 ।
~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क
ख़ुदा नहीं तो भला और क्या कहेंगे उसे,
‘वो मेरे साथ रहा और मुझे कभी न मिला’। 2 l
~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क
अलग अलग ही हमेशा थीं काम की शिफ़्टें,
‘वो मेरे साथ रहा और मुझे कभी न मिला’। 3 l
~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क
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652 वें मिसरे: 'किसी आवारा बादल सा गुज़र जा'
पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:
गुज़रना है हसीनों की गली से,
'किसी आवारा बादल सा गुज़र जा' ।
~अनिमेष शर्मा, भारत
बरसने पर भी कुछ मिलना नहीं है,
'किसी आवारा बादल सा गुज़र जा' ।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया
जगत की माया में आसक्त मत हो
'किसी आवारा बादल सा गुज़र जा'।
~डाॅ. आदेश त्यागी, भारत
ये दुनिया चार दिन का इक तमाशा,
'किसी आवारा बादल सा गुज़र जा'।
~अकबर शाद उदयपुरी, भारत
न ठहर इस दिल के वीराने में अब तू
“किसी आवारा बादल सा गुज़र जा”
डॉ० भावना कुँअर, ऑस्ट्रेलिया
तुझे रुकना नहीं है उस गली में
'किसी आवारा बादल सा गुज़र जा' ।
~रेनू हुसैन, भारत
बरसना है नहीं पर उस गली से,
‘किसी आवारा बादल सा गुज़र जा’।
~ अशोक सिंह , न्यू यॉर्क
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संपादक
~ कौसर भुट्टो, दुबई
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