मंगलवार, 7 जुलाई 2026

328 वाँ सप्ताह एक शे’र गिरह-नामा: 04 जुलाई, 2026

 328 वाँ सप्ताह एक शे’र गिरह-नामा: 04 जुलाई, 2026

एक‌ शे'र‌ अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित 328 वाँ सप्ताह गिरह-नामा।

 आज का मुशायरा इन दो मिसरों पर आधारित था:

 655 वाँ मिसरा: ''हम ने हर उस शख्स से पूछा जिस के नैन नशीले' l

~ गुलाम मोहम्मद कासिर

 656 वाँ मिसरा: ''हम ने बार हा ढूँढा तुम ने बार हा पाया'।

 ~ मिर्ज़ा ग़ालिब
                                 *****^*****

 जायज़ा लीजिए अलग अलग ज़ावियों से इन मिसरों पर लगाई हुई गिरह का;

 655 वें मिसरे: 'हम ने हर उस शख्स से पूछा जिस के नैन नशीले'

पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:


उसकी आँखों में झाँका या मदिरा पी के आए हो 
'हम ने हर उस शख़्स से पूछा जिस के नैन नशीले थे'l
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया


कैसा जादू, कैसा जलवा आँखों से तुम करते हो,
'हम ने हर उस शख़्स से पूछा जिस के नैन नशीले थे' l
~अकबर शाद 'उदयपुरी' भारत


राज़ तुम्हारी आँखों का हम जान न पाए आज तलक,
'हम ने हर उस शख़्स से पूछा जिस के नैन नशीले थे'।
~अकबर शाद 'उदयपुरी' भारत


ठेके बन्द कराने का ठेका ले कर निकले हो क्या?
'हम ने हर उस शख़्स से पूछा, जिस के नैन नशीले थे'l
~डाॅ. आदेश त्यागी, भारत


हमको सच सच बतलाओ क्या उसको देखकर आये हो
'हम ने हर उस शख़्स से पूछा जिस के नैन नशीले थे'l
~सज्जाद अख्तर, भारत


अपनी सुध बुध खोकर लौटे हो क्या उस मदिरालय से,
'हम ने हर उस शख़्स से पूछा जिसके नैन नशीले थे'।
~अनमोल प्रकाश शुक्ला, भारत 


इश्क़ का जादू मेरे सर चढ़ कर क्यूं बोल नहीं पाया 
'हम ने हर उस शख़्स से पूछा जिसके नैन नशीले थे'।
~ममता 'किरण', भारत


उस का नाम पता मिल जाए इतना ही तो शौक रहा 
'हम ने हर उस शख़्स से पूछा जिसके नैन नशीले थे'।
~रेनू हुसैन, भारत 


देख के तेरी आँखों में क्या कोई कभी मदहोश हुआ?
'हमने हर उस शख़्स से पूछा जिसके नैन नशीले थे'।
~मंजुल मिश्र 'मंज़र लखनवी, भारत


हर उस मोड पे रुक कर देखा जिस पर उसकी खुशबू थी 
'हम ने हर उस शख्स से पूछा जिस के नैन नशीले थे' l
~रविकांत, भारत


शाम ढले जब प्यास बढ़ी तो मयख़ाने के बारे में,
'हमने हर उस शख़्स से पूछा जिसके नैन नशीले थे'।
~खुर्रम नूर, भारत


बेक़ाबू हो किसका जल्वा सर पे हमारे बोल रहा,
‘हम ने हर उस शख़्स से पूछा जिस के नैन नशीले थे'।
~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क 


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  656 वें मिसरे: 'हम ने बार हा ढूँढा तुम ने बार हा पाया'

 पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:


दो दिलों के आँगन में, प्रेम के परिदों को 
'हम ने बार-हा ढूँडा, तुम ने बार-हा पाया' l
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया


हम रहे सवालों में, तुम रहे जवाबों में,
'हम ने बार-हा ढूँढा, तुम ने बार-हा पाया'।
~अकबर शाद उदयपुरी, भारत


जो वफ़ा निभा पाये, साथ ऐसे साथी का
'हम ने बारहा ढूँढा, तुम ने बारहा पाया' l
~सज्जाद अख्तर, भारत


बुलहवस ज़माने में दिल से चाहने वाला 
'हम ने बारहा ढूँढा, तुम ने बारहा पाया'l
(बुलहवस = वासनायुक्त )
~डाॅ. आदेश त्यागी, भारत


खेल ये नसीबों ने इस तरह से खेला कुछ,
‘हम ने बार-हा ढूँढा तुम ने बार-हा पाया’।
~ अशोक सिंह , न्यू यॉर्क 


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इस कार्यक्रम का यू-ट्यूब वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करिये:


©️सर्वाधिकार सुरक्षित। इस पोस्ट में साझा किए गए सभी गिरह के शे'र 'एक शे'र अर्ज़ किया है' पटल पर शामिल शायरों के हैं। इनमें से कोई भी शे'र शायर की लिखित पूर्व सहमति के बग़ैर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।

संपादक

~ कौसर भुट्टो, दुबई


 


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