मंगलवार, 28 जुलाई 2026

329 वाँ सप्ताह एक शे’र गिरह-नामा: 11 जुलाई, 2026

 329 वाँ सप्ताह एक शे’र गिरह-नामा: 11 जुलाई, 2026

एक‌ शे'र‌ अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित 329 वाँ साप्ताहिक गिरह-नामा।

 आज का मुशायरा इन दो मिसरों पर आधारित था:

 657 वाँ मिसरा: 'कहने का सलीका हो तो उन्वान बहुत हैं'l

~निहाल रिज़वी


 658 वाँ मिसरा:  'तन्हाइयों में हमको मिलता करार क्यों है'। 

~ अनिल कुमार जैन

                                 *****^*****

 जायज़ा लीजिए अलग अलग ज़ावियों से इन मिसरों पर लगाई हुई गिरह का;

 657 वें मिसरे: 'कहने का सलीका हो तो उन्वान बहुत हैं'

पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:


दुनिया को ज़रा ग़ौर से पढ़ना तो समझना
‘कहने का सलीक़ा हो तो उन्वान बहुत हैं’।
~अकबर शाद 'उदयपुरी' भारत


हर सिम्त तख़य्युल के हैं लाखों सर-ओ-सामां 
'कहने का सलीक़ा हो तो उन्वान बहुत हैं'।
~डाॅ. आदेश त्यागी, भारत


सोहबत में अदीबों की समझ पाये हैं अब-तक 
‘कहने का सलीक़ा हो तो उन्वान बहुत हैं’।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया


कहना न अगर आए तो उन्वान करे क्या,
‘कहने का सलीक़ा हो तो उन्वान बहुत हैं’।
~अनमोल प्रकाश शुक्ला, भारत 


मुझको नहीं आया कभी सच्चाई छिपाना
 ‘कहने का सलीक़ा हो तो उन्वान बहुत हैं’।
~रेनू हुसैन, भारत 


गुफ़्तार के उस्लूब से ही बात बने है,
‘कहने का सलीक़ा हो तो उन्वान बहुत हैं’।
~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क 


*✨*☀️**✨**


  658 वें मिसरे: 'तन्हाइयों में हमको मिलता करार क्यों है'

 पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:


कुछ राज़ इसमें होगा , कुछ बात इसमें होगी 
'तन्हाइयों में हमको मिलता करार क्यों है'।
~ रविकांत अनमोल, भारत


उकता गये हैं क्या हम दुनिया की रौनक़ों से 
'तन्हाइयों में हम को मिलता क़रार क्यों है'।
~डाॅ. आदेश त्यागी, भारत


है शौक़ महफ़िलों का पर ये समझ न पाया,
'तन्हाइयों में हमको मिलता क़रार क्यों है'।
~अनमोल प्रकाश शुक्ला, भारत 


हर शोर से ये दिल तो कतराता है हमारा,
'तन्हाइयों में हमको मिलता क़रार क्यों है'।
~अकबर शाद 'उदयपुरी' भारत


दुनिया के शोर गुल से बेज़ार हो गए हम 
'तन्हाइयों में हमको मिलता क़रार क्यों है'। 1 ।
~रेनू हुसैन, भारत 


मैं पूछती हूँ ख़ुद से तन्हाइयों में अक्सर 
'तन्हाइयों में हमको मिलता क़रार क्यों है'। 2 ।
~रेनू हुसैन, भारत 


है ज़िंदगी के मेले इतने लुभावने फिर,
'तन्हाइयों में हमको मिलता क़रार क्यों है'।
~ अशोक सिंह , न्यू यॉर्क 


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इस कार्यक्रम का यू-ट्यूब वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करिये:


©️सर्वाधिकार सुरक्षित। इस पोस्ट में साझा किए गए सभी गिरह के शे'र 'एक शे'र अर्ज़ किया है' पटल पर शामिल शायरों के हैं। इनमें से कोई भी शे'र शायर की लिखित पूर्व सहमति के बग़ैर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।

संपादक

~ कौसर भुट्टो, दुबई


 


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