एक शे'र अर्ज़ किया है’ मंच के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित 331 वाँ साप्ताहिक गिरह-नामा।
आज का मुशायरा इन दो मिसरों पर आधारित था:
661 वाँ मिसरा: 'हम आज तक वो चोट हैं दिल पर लिए हुए'।
~ 'असगर' गोंडवी
662 वाँ मिसरा: 'यूँ सताने की तो आदत मिरे घनश्याम की थी'।
~ परवीन शाकिर
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जायज़ा लीजिए अलग अलग ज़ावियों से इन मिसरों पर लगाई हुई गिरह का;
661 वें मिसरे: 'हम आज तक वो चोट हैं दिल पर लिए हुए'
पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:
जिसका हुआ था उनको कभी इल्म तक नहीं
‘हम आज तक वो चोट हैं दिल पर लिए हुए’।
~ प्रज्ञा त्रिवेदी , भारत
कड़वे तुम्हारे बोलों ने दिल छलनी जो किया
‘हम आज तक वो चोट हैं दिल पर लिए हुए’।
~लक्ष्मी शंकर बाजपेई, भारत
मारी जो तू ने तान के ता'नों के तीर से
'हम आज तक वो चोट हैं दिल पर लिये हुए'।
~डाॅ. आदेश त्यागी, भारत
थामा था हाथ ग़ैर का जब मेरे सामने
‘हम आज तक वो चोट हैं दिल पर लिए हुए’।
~मनोज 'अबोध', भारत
उल्फ़त से दूर तुम तो गए कारोबार में,
‘हम आज तक वो चोट हैं दिल पर लिए हुए’।
~ अशोक सिंह, न्यूयॉर्क
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662 वें मिसरे: 'यूँ सताने की तो आदत मिरे घनश्याम की थी'
पर 'एक शे'र अर्ज़ किया है' के शायरों की लगाई गईं गिरह:
किसने माखन ये उड़ेला है मेरी मटकी से
‘यूँ सताने की तो आदत मिरे घनश्याम की थी’।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया
छेड़ के मुरली मुझे किसने किया है बेसुध
‘यूँ सताने की तो आदत मिरे घनश्याम की थी’।
~ दिगंबर नासवा, मलेशिया
कंकरी मार के छुप जाना कहाँ से सीखा!
‘यूँ सताने की तो आदत मिरे घनश्याम की थी’।
~प्रज्ञा त्रिवेदी ,भारत
ले उधारी हो गए हो जो रफू चक्कर तुम
‘यूँ सताने की तो आदत मिरे घनश्याम की थी’।
~प्रज्ञा त्रिवेदी ,भारत
आज ये किसने खिजाया, कहा टी ली ली झर
‘यूँ सताने की तो आदत मिरे घनश्याम की थी’।
~डाॅ. आदेश त्यागी, भारत
रू-ब-रू आना कभी हँसना कभी छिप जाना
‘यूँ सताने की तो आदत मिरे घनश्याम की थी’।
~रेनू हुसैन, भारत
तुमने वादा था किया फिर भी नहीं आये तुम
‘यूँ सताने की तो आदत मिरे घनश्याम की थी’।
~ममता किरण, भारत
तट से जमुना जी के ले कौन गया वस्त्र मेरे,
‘यूँ सताने की तो आदत मिरे घनश्याम की थी’।
~ अशोक सिंह , न्यू यॉर्क
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संपादक
~ कौसर भुट्टो, दुबई
अच्छा आइडिया है सभी गिरह के अशआर सृजनात्मक का कौशल उकेर रहे हैं
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